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Rewari Culture: आखिर किस पार्टी में नहीं है रेवड़ी कल्चर?

July 16, 2022
Rewari Culture

Rewari Culture: हमारे नेता एक ओर रेवड़ी कल्चर को बढ़ावा देते हैं तो दूसरी ओर मुफ्त की रेवड़ियां बांट कर चुनावी नैया पार लगाते हैं। चाहे बात हर गरीब को 15 से 20 लाख रुपये मुफ्त मिलने की हो, चाहे मुफ्त मकान की। चाहे मुफ्त राशन की हो, चाहे मुफ्त बिजली, पानी, शिक्षा या बस यात्रा की। कोई पार्टी ऐसी नहीं है, जो रेवड़ियों से चुनावी नैया न पार लगाती हो।

Rewari Culture: मुफ्त की रेवड़ी बांटकर वोट बटोरने का कल्चर

श्रीकांत सिंह

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Rewari Culture: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के लोकार्पण अवसर पर कहा कि देश में मुफ्त की रेवड़ी बांटकर वोट बटोरने का कल्चर लाने की कोशिश हो रही है। ये रेवड़ी कल्चर देश के विकास के लिए बहुत घातक है। इससे देश के लोगों को बहुत सावधान रहना है। लेकिन लोग किस किस पार्टी से सावधान रहें। यह काम तो खुद भारतीय जनता पार्टी भी करती है। या यूं कहें कि सबसे ज्यादा करती है।

पीएम मोदी ने कहा कि हम कोई भी फैसला लें, निर्णय लें, नीति बनाएं, इसके पीछे सबसे बड़ी सोच यही होनी चाहिए कि इससे देश का विकास और तेज होगा। हर वो बात, जिससे देश को नुकसान होता है, देश का विकास प्रभावित होता है, उसे हमें दूर रखना है। लेकिन डालर के मुकाबले रुपये की क्या स्थिति है, यह किसी से छिपा है?

हर घर और हर गांव में आजादी का अमृत महोत्सव

पीएम मोदी ने कहा कि सरकार के स्तर पर जो काम जरूरी थे, वो भी हमने किया। इसका नतीजा ये निकला कि आज विदेश से आने वाले खिलौनों की संख्या कम हो गई है। साथ ही भारत से अब बड़ी संख्या में खिलौने विदेश में जाने लगे हैं। मैं आप सबको याद दिलाना चाहता हूं कि 15 अगस्त तक पूरे महीने, हिंदुस्तान के हर घर और हर गांव में आजादी का अमृत महोत्सव मनना चाहिए और शानदार तरीके से मनना चाहिए।

आखिर यह कैसे होगा? बेरोजगारी के हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। महंगाई सातवें आसमान पर है। लोगों की आय घट गई है। लोगों की सैलरी नहीं बढ़ रही है। वेतन आयोगों को समाप्त किया जा रहा है। ठेका प्रथा को बढ़ावा दिया जा रहा है। श्रम कानूनों को कमजोर किया जा रहा है। इस तरह अग्निपथ पर चलकर देश के युवा कैसे आजादी का अमृत महोत्सव मना पाएंगे? मुसीबतों में खुशियां मनाना क्या हास्यास्पद नहीं है?

बुंदेलखंड के हर जिले में 75 अमृत सरोवर

पीएम मोदी ने कहा कि बुंदेलखंड के हर जिले में 75 अमृत सरोवर बनाए जाएंगे। ये जल सुरक्षा और आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत बड़ा काम है। भारत में खिलौने बनाना पारंपरिक व्यवसाय रहा है। मैंने खिलौना उद्योगों को नए सिरे से काम करने का आग्रह किया था। लोगों से भी भारतीय खिलौने खरीदने का आग्रह किया था।

इस क्षेत्र में भी मुसीबत यह है कि सरकारी तंत्र लघु उद्योगों को आगे बढ़ाने के लिए कोई कारगर उपाय नहीं कर पा रहा है। भारत में उद्योग चलाना इसलिए कठिन है कि यहां लागत बहुत ज्यादा आती है। किसी भी उत्पाद को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाना दिनोंदिन अधिक खर्चीला होता जा रहा है। क्योंकि पेट्रोल और डीजल के दामों में बेतहाश बढ़ोतरी की जा रही है। उससे माल भाड़ा बढ़ता जा रहा है।

बुंदेलखंड के लाखों परिवारों को पानी का कनेक्शन

बुंदेलखंड हमेशा पानी के लिए तरसता रहा है। इस मुद्दे पर पीएम मोदी ने दावा किया है कि बुंदेलखंड के लाखों परिवारों को पानी का कनेक्शन दिया जा चुका है। लेकिन इसकी हकीकत किसी भी समाचार माध्यम के जरिये सामने नहीं आई। गोदी मीडिया कभी भी इस तरह के मुद्दों को उठाता ही नहीं। ऐसे में पीएम मोदी के दावों पर आखिर कैसे भरोसा किया जाए?

अगर बुंदलेखंड में नदियों के पानी को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट के लिए हजारों करोड़ रुपये स्वीकृत किए जा चुके हैं। बुंदेलखंड के बहुत बड़े हिस्से का जीवन बदल रहा है। आजादी के 75 वर्ष के अवसर पर देश में अमृत सरोवरों के निर्माण का संकल्प किया गया है। तो अच्छा है, लेकिन भरोसा कैसे पैदा होगा?

संपादक की नजर में समाधान क्या हो सकता है?

Rewari Culture: सरकार को चाहिए कि सबसे पहले गोदी मीडिया को सुधारे। गोदी मीडिया रात दिन नफरत का एजेंडा चलाता रहता है। इस चक्कर में तमाम बुनियादी मुद्दे चर्चा का विषय ही नहीं बन पाते। ऐसे में सरकार चाहे जितने दावे कर ले, लेकिन उसके दावों पर लोग आसानी से भरोसा नहीं कर पाएंगे। क्योंकि उन्हें रात दिन नफरत के एजेंडे से रूबरू होना पड़ता है।

दूसरी सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकारी नौकरियों के लिए खाली पद भरने में सरकार कोताही करती है। देश के युवा नौकरियों के लिए फार्म भरकर वर्षों इंतजार करते हैं। यह पता ही नहीं होता कि प्रतियोगिता परीक्षाएं कब अंजाम तक पहुंचेंगी। जब तक देश में बेरोजगारी की समस्या रहेगी, तब तक देश की अर्थव्यवस्था में सुधार लाए जाने की कल्पना भी नहीं की जा सकेगी। आखिर कब तक सरकार चिकनी चुपड़ी बातों से लोगों का पेट भरने की कोशिश करेगी?

 

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