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I2U2 Summit: भारत कैसे करेगा खाद्य संकट का समाधान?

July 15, 2022
I2U2 Summit

I2U2 Summit: केंद्र सरकार ने फैसला किया है कि देशभर में कई फूड पार्क बनाए जाएंगे। इस कार्य में इजराइल, अमेरिका और यूनाइटेड अरब अमीरात बड़ी भूमिका निभाएंगे। यह फैसला आई2यू2 की पहली शीर्षस्तरीय बैठक में लिया गया। बैठक में पीएम नरेंद्र मोदी, इजराइल के पीएम येर लापिड, यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहयान और अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने हिस्सा लिया। इन नेताओं ने कई अहम बिंदुओं पर चर्चा की।

I2U2 Summit: क्या है आईटूयूटू सम्मिट?

श्रीकांत सिंह


I2U2 Summit: जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है कि इसमें दो आई यानी इंडिया और इजराइल हैं। और इसी प्रकार दो यू यानी यूएस या अमेरिका और यूएई या यूनाइटेड अरब अमीरात शामिल हैं। इस प्रकार आई2यू2 समूह में भारत, इजराइल, संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका शामिल हैं। इसी आधार पर चार देशों के इस समूह को ‘आई2यू2’ नाम दिया गया है।

बैठक में समूह के आर्थिक एजेंडे पर सहमति बन गई है। उसी के अनुसार वैश्विक खाद्य संकट की आशंका के मद्देनजर भारत में दो अरब डालर की लागत से कई फूड पार्क स्थापित किए जाएंगे। यह निवेश यूएई करेगा। इजराइल और अमेरिका की कंपनियों की तकनीकी या दूसरी जरूरी आवश्यकताओं को पूरा करने में अहम भूमिका रहेगी।

सोलर और पवन ऊर्जा से बनेगा 300 मेगावाट का बैट्री स्टोरेज सिस्टम

दूसरे प्रमुख फैसले के तहत तय किया गया है कि गुजरात में रिन्यूएबल ऊर्जा यानी सोलर और पवन से 300 मेगावाट का बैट्री स्टोरेज सिस्टम तैयार किया जाएगा। इसकी संभावना का अध्ययन करने के लिए अमेरिका की ट्रेड और डेवलपमेंट एजेंसी 33 करोड़ डालर उपलब्ध कराएगी।

चारों देशों के संयुक्त बयान में कहा गया है कि इस तरह की परियोजनाओं की मदद से भारत को रिन्यूएबल ऊर्जा सेक्टर में एक वैश्विक हब बनाया जा सकेगा। आई2यू2 संगठन की परिकल्पना इन देशों के विदेश मंत्रियों की 18 अक्टूबर, 2021 को आयोजित एक बैठक में की गई थी। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने इजराइल और खाड़ी देशों की बहुप्रतीक्षित यात्रा के दौरान बैठक का आयोजन किया है।

पीएम मोदी ने कहा, सकारात्मक एजेंडा तय

पीएम मोदी ने कहा है कि यह सही मायने में रणनीतिक साझेदार देशों की बैठक है। हम मित्र हैं और हमारे हित भी एक समान हैं। हमने पहली बैठक में ही सकारात्मक एजेंडा तय कर लिया है। कई क्षेत्रों की पहचान की गई है और इसके आगे का रोडमैप तैयार किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चिताओं के बीच हमारा कोआपरेटिव फ्रेमवर्क व्यावहारिक सहयोग का एक अच्छा माडल भी है। हमें पूरा विश्वास है कि चारों देश वैश्विक स्तर पर ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा और आर्थिक प्रगति के लिए महत्वपूर्ण योगदान देंगे। विदेश सचिव विनय क्वात्रा ने कहा कि सभी देशों को अपने यहां भारत में निर्मित पेमेंट गेटवे यूपीआई के भुगतान को स्वीकार करना चाहिए।

फूड फार्क के लिए गुजरात और मध्य प्रदेश का चयन

चारों देशों में जिन क्षेत्रों में सहयोग पर सहमति बनी है, उनमें जल, ऊर्जा, ट्रांसपोर्टेशन, अंतरिक्ष, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा के अलावा फिनटेक भी शामिल हैं। इन सभी क्षेत्रों में निजी सेक्टर के जरिये संयुक्त निवेश को प्रोत्साहित किया जाएगा। दूसरे देशों को केला, मसाले, प्याज, चावल जैसे खाद्य उत्पादों के निर्यात पर जोर दिया जाएगा।

कहा गया है कि फूड पार्क भारतीय किसानों की आमदनी दोगुनी करने में मदद कर सकेंगे। और उससे भारत में अनाज उत्पादन बढ़ाने के साथ खाड़ी क्षेत्रों में खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने के में मदद मिलेगी। सदस्य देशों के बीच खाद्य कारोबार की रुकावटों को दूर करने और अनाज की गुणवत्ता संबंधी मानकों को एक जैसा बनाने पर काम किया जाएगा। दक्षिण एशिया से लेकर पूरे खाड़ी क्षेत्र में खाद्य आपूर्ति से जुड़े संकट का समाधान हो सकता है।

संपादक की नजर में कितना कारगर होगा सरकार का कदम?

यदि सरकार अनाज संकट की आशंका को दूर करना चाहती है तो उसे इच्छाशक्ति का परिचय देना होगा। पिछले दिनों के अनुभव बताते हैं कि सरकार किसानों की आमदनी दोगुनी करने के प्रति कितनी संजीदा है। जैसा कि सरकार ने वादा किया था कि वर्ष 2022 में किसानों की आमदनी दोगुनी कर दी जाएगी। लेकिन वर्ष 2022 बीतने को है। क्या भारतीय किसानों की आमदनी दोगुनी हो गई?

दरअसल, सरकार चुनावी नफा नुकसान के नजरिये से ही बयान जारी करती है। आप देख ही चुके हैं कि किस प्रकार किसानों के साथ छल करके तीन कृषि कानून उन पर थोपे गए थे। जब सरकार को लगा कि सत्तासीन भाजपा पांच राज्यों के विधान सभा चुनाव में हार जाएगी तो तीनों कृषि कानून वापस ले लिए गए। तभी तो अब सरकार की बातों पर यकीन करना कठिन हो गया है। इसलिए सरकार को पहले किसानों का विश्वास जीतना होगा। नहीं तो इस तरह की बैठकों का कोई मतलब नहीं रह जाएगा।

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