Vote Theft Protest: दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित INDIA गठबंधन की सभा में राहुल गांधी ने चुनाव प्रक्रिया, मतदाता सूची और लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर केंद्र सरकार तथा चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शन किसी एक राजनीतिक दल या नेता का नहीं, बल्कि देश के युवाओं, किसानों, मजदूरों और आम नागरिकों की आवाज है। राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग दोहराते हुए कहा कि विपक्ष संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेगा।
Vote Theft Protest: राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर लगाए गंभीर आरोप
इंफोपोस्ट/Vote Theft Protest
दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित INDIA गठबंधन की सभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि यहां जुटे लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तक अपना संदेश पहुंचा दिया है। उन्होंने मंच पर मौजूद मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव और फारूक अब्दुल्ला सहित गठबंधन के नेताओं तथा नागरिक संगठनों के प्रतिनिधियों का स्वागत किया। राहुल ने सभा में पहुंचे लोगों का आभार जताते हुए कहा कि यह किसी एक पार्टी की आवाज नहीं है।
राहुल गांधी ने कहा कि इस प्रदर्शन में देश के युवा, किसान और मजदूर अपनी आवाज बुलंद करने आए हैं। उन्होंने कहा कि भारत में लोकतंत्र और संविधान को कमजोर नहीं होने दिया जाएगा। राहुल ने सत्ता में बैठे लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि उनके पास चाहे जितना पैसा और ताकत हो, वे संविधान से बड़े नहीं हो सकते। उनके मुताबिक, संविधान देश के प्रत्येक नागरिक के अधिकारों की रक्षा करने वाली सर्वोच्च व्यवस्था है और उसकी गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
मतदाता सूची में नाम हटाने को लेकर उठाए सवाल
Vote Theft Protest: अपने भाषण में राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि देश में कई वर्षों से चुनावों में वोट चोरी हो रही है। उन्होंने पश्चिम बंगाल के अलावा मध्य प्रदेश, हरियाणा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और कर्नाटक का उल्लेख किया। राहुल ने 2024 के लोकसभा चुनाव का संदर्भ देते हुए दावा किया कि चुनाव के बाद मतदाता सूची से 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए। उन्होंने इस संख्या को देश के कुल मतदाताओं का लगभग 15 प्रतिशत बताते हुए कहा कि सात मतदाताओं में से एक का नाम सूची से बाहर हुआ।
राहुल गांधी ने अपने भाषण में कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में एनडीए और विपक्ष के बीच लगभग तीन प्रतिशत का अंतर था। उन्होंने मतदाता सूची से 15 प्रतिशत नाम हटाए जाने के अपने दावे को इस अंतर से जोड़ते हुए चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठाया। राहुल ने कहा कि यह सामान्य प्रशासनिक मामला नहीं, बल्कि नागरिकों की लोकतांत्रिक आवाज से जुड़ा विषय है। उन्होंने इन आंकड़ों को चुनाव आयोग की ओर से हटाए गए नामों से जोड़कर पेश किया।
ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग
राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से हटना होगा। अपने संबोधन में उन्होंने उनके खिलाफ कार्रवाई और जेल जाने की बात भी कही। राहुल ने आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के कारण देश के नागरिकों के मताधिकार और उनकी अभिव्यक्ति पर असर पड़ रहा है। उन्होंने इसे सामान्य चोरी से अलग बताते हुए लोकतंत्र के लिए गंभीर चुनौती करार दिया।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के बिना नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री और अमित शाह गृह मंत्री नहीं बन पाते। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर देश की विभिन्न संस्थाओं को अपने प्रभाव में लेने का आरोप लगाया। राहुल ने शिक्षा, स्वास्थ्य, सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय, न्यायपालिका, नौकरशाही और पुलिस जैसी संस्थाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ये संस्थाएं किसी व्यक्ति या संगठन की नहीं, बल्कि देश के नागरिकों की हैं।
किसानों, युवाओं और मजदूरों के अधिकारों का मुद्दा
राहुल गांधी ने अपने भाषण में चुनावी मुद्दों के साथ आर्थिक और सामाजिक असमानता का विषय भी उठाया। उन्होंने कहा कि संस्थाओं पर नियंत्रण का असर किसानों, युवाओं और मजदूरों के अधिकारों पर पड़ रहा है। उनके अनुसार, किसानों को उनकी मेहनत का उचित लाभ नहीं मिल रहा और युवाओं को रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की संपत्ति कुछ चुनिंदा लोगों के हाथों में केंद्रित होती जा रही है।
उन्होंने उद्योगपतियों अंबानी और अडानी का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि बड़े कारोबारियों के कर्ज माफ किए जाते हैं, जबकि छोटे कारोबारियों और किसानों के परिवारों को बैंक से कर्ज लेने तथा उसे चुकाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। राहुल ने कहा कि ऐसा भारत स्वीकार नहीं किया जा सकता, जिसमें आर्थिक अवसर कुछ लोगों तक सीमित रह जाएं। उन्होंने एक ऐसे देश की कल्पना रखी, जहां मेहनत करने वाले किसान, विद्यार्थी और आम नागरिकों को अपनी मेहनत का फल मिल सके।
शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे पर भी टिप्पणी
राहुल गांधी ने शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ देश के बुनियादी ढांचे का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ बड़े कारोबारी समूहों का प्रभाव इन क्षेत्रों में बढ़ रहा है। अपने भाषण में उन्होंने हवाई अड्डों, रेलवे, बिजली व्यवस्था और अन्य बुनियादी सुविधाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के संसाधनों पर किसी एक समूह का नियंत्रण नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश की संस्थाएं और सार्वजनिक संसाधन जनता के हित में काम करने चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत ऐसा होना चाहिए, जहां किसान अपनी मेहनत से अपने सपने पूरे कर सके और विद्यार्थी पढ़ाई के बाद रोजगार प्राप्त कर सके। राहुल ने शिव की बारात का उदाहरण देते हुए ऐसे समाज की कल्पना रखी, जिसमें हर व्यक्ति को शामिल होने और आगे बढ़ने का अवसर मिले। उन्होंने कहा कि देश केवल दो-तीन लोगों के लिए नहीं, बल्कि सभी नागरिकों के लिए होना चाहिए।
कानूनी कार्रवाई और जवाबदेही की बात
राहुल गांधी ने कहा कि कथित वोट चोरी के मामले में विपक्ष आगे भी सवाल उठाएगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की। उनके अनुसार, चुनावी प्रक्रिया में यदि किसी तरह की गड़बड़ी हुई है तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए और देश के नागरिकों को न्याय मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को छोड़ने वाला नहीं है।
हालांकि, अपने भाषण में राहुल गांधी ने यह भी कहा कि उनका राजनीतिक विरोध व्यक्तिगत दुश्मनी या नफरत पर आधारित नहीं है। उन्होंने कहा कि वे नरेंद्र मोदी, अमित शाह या ज्ञानेश कुमार से व्यक्तिगत नफरत नहीं करते। राहुल ने अपने विचार को अहिंसा और मोहब्बत की राजनीति से जोड़ते हुए कहा कि विरोध का रास्ता शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक होना चाहिए। उन्होंने कार्यकर्ताओं से हिंसा और नफरत से दूर रहने की अपील की।
सभी नागरिकों की आवाज बचाने की अपील
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में समाज के कमजोर और वंचित वर्गों का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश में सबसे पीछे खड़े व्यक्ति की आवाज की रक्षा करना जरूरी है। इस संदर्भ में उन्होंने हिंदू, मुस्लिम, सिख, आदिवासी, दलित, महिलाओं और दिव्यांग नागरिकों का नाम लिया। उनका कहना था कि लोकतंत्र का अर्थ केवल चुनाव कराना नहीं, बल्कि हर नागरिक को अपनी बात रखने और अपने अधिकारों का इस्तेमाल करने का अवसर देना भी है।
उन्होंने महात्मा गांधी के विचार का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की आवाज सबसे अधिक महत्वपूर्ण है। राहुल ने कहा कि देश में नफरत और दुश्मनी के बजाय भाईचारे तथा आपसी प्रेम का माहौल होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा राजनीति में नफरत बढ़ी है, जिससे देश और उसकी सामाजिक एकता को नुकसान पहुंच रहा है।
किसी एक पार्टी का नहीं, देश की आवाज का प्रदर्शन
Vote Theft Protest: अपने भाषण के अंतिम हिस्से में राहुल गांधी ने रामलीला मैदान में जुटे लोगों को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शन किसी एक राजनीतिक पार्टी या नेता का आयोजन नहीं है, बल्कि इसमें अलग-अलग राजनीतिक दलों, नागरिक संगठनों और आम लोगों की भागीदारी है। उन्होंने इसे लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए उठी देश की आवाज बताया। राहुल ने कहा कि इस संघर्ष में शांति और अहिंसा का रास्ता अपनाया जाएगा।
सभा के समापन पर राहुल गांधी ने एक बार फिर कहा कि देश के प्रत्येक नागरिक की आवाज सुरक्षित रहनी चाहिए। उन्होंने प्रदर्शन में शामिल लोगों का आभार जताते हुए जय हिंद के नारे के साथ अपना संबोधन समाप्त किया। रामलीला मैदान की इस सभा में उनका मुख्य संदेश मतदाता सूची की पारदर्शिता, चुनाव आयोग की जवाबदेही, संविधान की रक्षा और देश में भाईचारे को मजबूत करने पर केंद्रित रहा।


