संवाददाता, पटना, 23 जुलाई। Shipra Rajput : पत्रकार ओम वर्मा को मोतिहारी के मुफ्फसील थाना में बंधक बनाने के मामले में पटना हाइकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों पर गंभीर टिप्पणी की है। उच्च न्यायालय में विगत 14 जुलाई को पत्रकार ओम वर्मा द्वारा दायर अपराधिक रिट याचिका पर प्रथम सुनवाई हुई। न्यायमूर्ति संदीप कुमार ने रोष प्रकट करते हुए टिप्पणी की कि ट्रेनी डीएसपी को इस प्रकार की ट्रेनिंग दी जा रही है कि वह परिवादी और पत्रकार से थाने में बदसलूकी करे? उन्होंने तत्कालीन परिक्ष्यमान पुलिस उपाधीक्षक सह थानाप्रभारी मुफस्सिल, मोतिहारी को भी इस याचिका में पक्षकार बनाने का निर्देश दिया।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!माननीय न्यायमूर्ति द्वारा सरकार को याचिकर्ता द्वारा दायर याचिका के प्रत्येक पारा पर जवाब दाखिल करने एवं डीएसपी शिप्रा राजपूत को पृथक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त 2025 को मुकर्रर की गई है।
यह है मामला
Shipra Rajput: विदित हो कि 28 सितंबर 2024 को मोतिहारी के मुफस्सिल थाना में वरिष्ठ पत्रकार ओम वर्मा के द्वारा एक परिवाद के सिलसिले में तत्कालीन परीक्ष्यमान पुलिस उपाधीक्षक द्वारा थाना में बुलाया गया था एवं एकपक्षीय और अन्यायपूर्ण आचरण करते हुए ओम वर्मा के साथ बदसलूकी और अवैध ढंग से छह घंटे थाना परिसर में रखा गया था। इसके उपरांत श्री वर्मा ने निर्भीक होकर इस ज्यादती के खिलाफ बिहार पुलिस मुख्यालय, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, बिहार पुलिस ट्रेनिंग अकादमी, राजगीर में आवेदन देकर गुहार लगाई थी।
बिहार पुलिस अकादमी ने भी शुरू की कार्रवाई
Shipra Rajput: बिहार पुलिस अकादमी, पुलिस मुख्यालय द्वारा इस मामले में संज्ञान लेते हुए विभागीय कारवाई प्रारंभ की गई है। वहीं, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने पुलिस अधीक्षक, पूर्वी चंपारण को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
इसी क्रम में माननीय उच्च न्यायालय, पटना द्वारा इस मामले में दाखिल याचिका पर कार्रवाई शुरू की गई है जिससे आशा जागी है कि वर्दी की दुरुपयोग कर इसमें निहित शक्तियों का गलत प्रयोग करने वाली पुलिस अधिकारी बक्शे नहीं जाएंगे।


