Cyclone devastation: बड़ी खबर साइक्लोन दित्वाह से उत्पन्न मानवीय संकट है। बंगाल की खाड़ी में उत्पन्न इस चक्रवात ने श्रीलंका में भारी तबाही मचाई है। साइक्लोन ने 400 से अधिक लोगों की जान ले ली और हजारों बेघर हो गए। श्रीलंका के कई हिस्सों में बाढ़, भूस्खलन और बुनियादी ढांचे का विनाश हुआ, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चरमरा गईं। ऐसे में भारत ने तत्काल मानवीय सहायता का ऐलान किया, जो ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति का जीता-जागता उदाहरण है।
Cyclone devastation: क्षेत्रीय एकजुटता का नया उदाहरण पेश
इंफोपोस्ट न्यूजडेस्क
Cyclone devastation: भारतीय वायुसेना का सी-17 एयरक्राफ्ट 2 दिसंबर की रात को कोलंबो पहुंचा, जिसमें उन्नत चिकित्सा उपकरण, फील्ड अस्पताल, दवाइयां और राहत सामग्री लदी हुई थी। श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने इस सहायता के लिए भारत का आभार व्यक्त किया और कहा कि यह ‘क्षेत्रीय एकजुटता का प्रतीक’ है।
साइक्लोन दित्वाह की शुरुआत नवंबर के अंत में हुई, जब बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव क्षेत्र विकसित हुआ। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने पहले ही चेतावनी जारी कर दी थी, लेकिन चक्रवात की तीव्रता ने सबको चौंका दिया। श्रीलंका के पूर्वी और उत्तरी तटों पर 150 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चलीं, जिससे पेड़ उखड़ गए, सड़कें धंस गईं और बिजली-पानी की आपूर्ति ठप हो गई।
जलमग्न गांवों में हजारों लोग फंसे
कोलंबो से त्रिंकोमाली तक के इलाकों में जलमग्न गांवों में हजारों लोग फंसे हुए थे। संयुक्तराष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक, पांच लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए, जिनमें महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा हैं। आर्थिक नुकसान का अनुमान 20 अरब डॉलर से अधिक है, जो श्रीलंका की जीडीपी का 10 प्रतिशत है।
इस संकट ने द्वीप राष्ट्र की कोविड के बाद की आर्थिक रिकवरी को झटका दिया, जहां पहले ही महंगाई और विदेशी कर्ज का बोझ था। भारत की प्रतिक्रिया न केवल त्वरित थी, बल्कि समग्र भी। विदेश मंत्रालय ने कहा कि सहायता में 50 टन से अधिक चिकित्सा किट शामिल हैं, जो सांस संबंधी बीमारियों और घावों के इलाज के लिए हैं।
भारतीय नौसेना के जहाज आईएनएस सारंग भी राहत सामग्री लेकर रवाना
इसके अलावा, भारतीय नौसेना के जहाज आईएनएस सारंग भी राहत सामग्री लेकर रवाना हो चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीलंका के राष्ट्रपति से फोन पर बात की, सहायता बढ़ाने का भरोसा दिलाया। यह घटना भारत-श्रीलंका संबंधों को मजबूत करने का अवसर बनी, जो 1971 के युद्ध के बाद से मजबूत बने हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सहायता ‘सॉफ्ट पावर डिप्लोमेसी’ का हिस्सा है, जो भारत को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के प्रभाव को संतुलित करने में मदद करेगी। घरेलू मोर्चे पर, साइक्लोन के अवशेष तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के तटों पर पहुंचे, जहां भारी बारिश और बाढ़ की चेतावनी है।
चेन्नई में ऑरेंज अलर्ट जारी, स्कूल-कॉलेज बंद
Cyclone devastation: चेन्नई में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया, स्कूल-कॉलेज बंद हैं। आईएमडी ने अगले 48 घंटों में 100 मिमी तक बारिश की भविष्यवाणी की, जो फसलों और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा सकती है। तमिलनाडु सरकार ने एनडीआरएफ की 10 टीमें तैनात कीं और केंद्र ने अतिरिक्त फंड जारी किया। इस संकट ने जलवायु परिवर्तन पर बहस छेड़ दी, जहां विशेषज्ञ कहते हैं कि ग्लोबल वॉर्मिंग से चक्रवातों की तीव्रता बढ़ रही है।
भारत, जो खुद बंगाल की खाड़ी में संवेदनशील है, ने इस अवसर पर ‘क्लाइमेट रेजिलिएंस’ पर जोर दिया। अर्थव्यवस्था पर असर देखा जा रहा है। श्रीलंका में चाय बागानों का नुकसान हुआ, जो भारत के निर्यात को प्रभावित कर सकता है। साथ ही, रुपया 90 डॉलर प्रति के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया, जो विदेशी निवेश की निकासी और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से प्रेरित है।


