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shipra rajput :  पत्रकार को थाना में बंधक बनाने के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मोतिहारी एसपी को भेजा नोटिस

infopost June 17, 2025
shipra rajput

संवाददाता, नयी दिल्ली, 17 जून।  shipra rajput :  राष्ट्रीय पत्रकार ओम वर्मा को मोतिहारी के मुफ्फसील थाना में बंधक बनाने, प्रताड़ना और केस में फंसाने की धमकी के ​मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, नयी दिल्ली हरकत में आ गया है और इस मामले में संज्ञान लिया है। मानवाधिकार आयोग ने मोतिहारी के एसपी को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह में जवाब मांगा है।

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shipra rajput
SP Swarn Prabhat

यह है मामला

shipra rajput : विदित हो कि ओम वर्मा ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के समक्ष विगत 3 अक्टूबर 2024 को स्वयं के साथ मुफस्सिल थाना मोतिहारी के तत्कालीन थानाध्यक्ष के प्रभार में रहीं परीक्ष्यमान पुलिस उपाधीक्षक शिप्रा राजपूत द्वारा बदसलूकी, बिना किसी अपराध के अवैध ढंग से रात तक थाने के हिरासत में रखने, मानसिक यंत्रणा देने और असंसदीय शब्दों का प्रयोग करने, मुकदमे में फंसाने की धमकी देने संबंधी आरोपों के साथ लिखित शिकायत दर्ज कराया था।

आयोग ने दर्ज किया केस
shipra rajput
Shipra Rajput

shipra rajput : इस परिवाद को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने स्वीकार करते डायरी संख्या 16381/IN/2024 दर्ज किया और समीक्षोपरांत आयोग ने केस संख्या 567/4/8/2025 दर्ज कर दिनांक 16 जून 2025 को पहली सुनवाई की। सुनवाई के दौरान पूर्वी चंपारण जिले के पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह के अंदर प्रत्युत्तर दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। आयोग ने 28.09.24 को पुलिस उपाधीक्षक के द्वारा परिवादी का अवैधानिक हिरासत, मानसिक यंत्रणा और धमकी के मामले को संज्ञान में लिया। आयोग के द्वारा परिवादी की इस शिकायत का अंश भी टिप्पणी में शामिल है कि पुलिस उपाधीक्षक ने रिश्वत की मांग की, परिवादी के परिवाद को नजरअंदाज किया, मानसिक यंत्रणा के साथ अवैध हिरासत में रखा और परिवादी के मौलिक और दैहिक स्वतंत्रता के मौलिक अधिकारों का हनन किया गया। पुलिस उपाधीक्षक शिप्रा राजपूत के इस अवैधानिक और अमानवीय कृत्य के लिए कानूनी कारवाई की मांग परिवादी ओम वर्मा द्वारा की गई, जैसा आयोग के आदेश प्रति में अंकित किया गया है।

जब रची गई थी थाना में हत्या की साजिश

shipra rajput : इस बारे में ओम वर्मा ने बताया कि 28 सितंबर 24 की वो रात मुझे बहुत अच्छे से याद है, जब ​मोतिहारी के मुफ्फसील थाना में मेरी हत्या की साजिश रची जा रही थी। मुझे दिन के 2 बजे से रात के 10 बजे तक थाना में बंधक बना कर रखा गया। मानसिक तौर पर प्रताड़ित किया गया। तत्कालीन प्रशिक्षु डीएसपी शिप्रा राजपूत ने मुझे पत्रकार होने के कारण गालियां दीं। कहा कि रात को लाकअप में रख कर मार डालेंगे और इसे सुसाइड का मामला बना देंगे। जैसे तैसे वह रात को छूटकर घर आए। तबीयत बिगड़ने के कारण उन्हें दूसरे दिन मोतिहारी के सदर अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। शिप्रा राजपूत की वजह से वह कई बीमारियों की चपेट में आ गए हैं। उन्हें शिप्रा राजपूत की वजह से जान का खतरा बना हुआ है। ओम वर्मा ने दावा किया कि अपने पद का दुरुपयोग कर शिप्रा राजपूत मेरे दुश्मनों के साथ मिलकर मेरी हत्या करवा सकती हैं या मुझे जेल में डलवा सकती हैं। मैंने अपनी पत्नी, बच्चे और शुभचिंतकों को वह दुखद दिन सहने के लिए अभी से हिम्मत देना शुरू कर दिया है। ओम वर्मा ने कहा कि वह इस मामले को अब राजनी​तिक डोमेन में भी लेकर आएंगे। shipra rajput dsp

shipra rajput

हर प्लेटफार्म पर की शिकायत

shipra rajput DSP : ओम वर्मा ने बताया कि जब मैंने हर प्लेटफार्म पर शिकायत की तो और समाचार का प्रसारण किया तो मुझे जेल में डालने के लिए शिप्रा राजपूत ने मोतिहारी के साइबर थाना में मेरे साथ—साथ तीन अन्य निर्दोष नागरिकों पर फर्जी आरोप लगाकर 14 नवंबर 2024 को एफआइआर कर दिया। इस मामले में शिप्रा राजपूत और मोतिहारी साइबर थाना ने सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट का भी ख्याल नहीं रखा। बताते चलें कि इस केस में मोतिहारी सिविल कोर्ट ने ओम वर्मा को राहत दे दी है। ओम वर्मा ने बताया कि मेरे उपर किया गया फर्जी केस शिप्रा राजपूत को उल्टा पड़ने वाला है। सभी सबूत मेरे पास उपलब्ध हैं। भारत के संविधान और कानून ने सभी को बराबर अधिकार दिए हैं। मुझे राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और न्यायालय पर पूरा भरोसा है। ओम वर्मा ने बताया कि इस मामले में वह एक वीडियो जारी करेंगे। मुझे यकीन है कि मोतिहारी सहित बिहार की जनता वैसा ही आशीर्वाद देगी जैसा पहले दिया था।

ओम वर्मा के साथ आई अधिवक्ताओं की भारी भरकम टीम

shipra rajput DSP : राष्ट्रीय पत्रकार ओम वर्मा की थाना में हत्या की साजिश और बंधक बनाने के ​मामले में मोतिहारी, पटना और दिल्ली में अधिवक्ताओं की भारी भरकम टीम खड़ी हो गई है। ये सभी ​अधिवक्ता बिना फीस के ओम वर्मा के साथ खड़े हो गए हैं। वकीलों का कहना है कि यह न्याय की लड़ाई है। इस सत्य और न्याय की लड़ाई में ओम वर्मा की ​जीत निश्चित है। उधर, नेशनल एडीटर्स एसोसिएशन भी ओम वर्मा के साथ खड़ा हो गया है। साथ ही कई राजनीतिक दलों ने ओम वर्मा से संपर्क किया है।

shipra rajput : ज्ञात हो कि ओम वर्मा दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म और मास कॉम करने के बाद हरि भूमि, रोहतक से अपने अखबारी कैरियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने दैनिक जागरण दिल्ली—एनसीआर ज्वाइन किया। वहां उन्होंने 17 वर्षों तक चीफ सबएडीटर के रूप में सेवाएं दीं। इस बीच वह राष्ट्रीय खबरिया चैनलों में डिबेट में हिस्सा लेते रहे। कई चैनलों ने उन्हें अपने पैनल में शामिल किया था। दैनिक जागरण के बाद उन्होंने राष्ट्रीय समाचार पोर्टल इन्फोपोस्ट न्यूज को संपादक के रूप में ज्वाइन किया। इन्फोपोस्ट न्यूज के साथ साथ अब वह राष्ट्रीय न्यूज पोर्टल नेशनल प्राइम न्यूज  https://nationalprimenews.com/ को भी सेवाएं दे रहे हैं। वह पत्रकारों के हक के लिए हमेशा आवाज उठाते रहे हैं। उनकी छवि बेदाग रही है। मोतिहारी उनका पैतृक घर है।

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