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Operation Lotus: महाराष्ट्र और झारखंड में फिर शुरू हुआ खेल

infopost August 19, 2024
Operation Lotus

Operation Lotus: परिवारवाद की भले ही लाख निंदा की जाए, लेकिन राजनीति में अब किसी का भरोसा नहीं रह गया है। क्योंकि विपक्ष की सरकारें तोड़ने और गिराने वाला आपरेशन लोटस फिर शुरू हो गया है। महाराष्ट्र में शरद पवार और उद्धव ठाकरे के नेता फिर सीबीआई और ईडी के रडार पर हैं। झारखंड में हेमंत सोरेन की सरकार गिराने का गेम भी दोबारा शुरू हो गया है। आज हम बताएंगे पर्दे के पीछे की कहानी जिसमें साजिश है, धोखा है और है सत्ता की सियासत।

Operation Lotus: हेमंत के सबसे करीबी नेता चंपई भाजपा के मेहमान

इंफोपोस्ट डेस्क

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Operation Lotus: कहानी शुरू होती है हेमंत सोरेन के अजीज नेता चंपई सोरेन से। वह अचानक रांची से दिल्ली आ धमके। और उनकी मुलाकात भाजपा के चाणक्य टाइप नेताओं से हुई। हालांकि उन्होंने भाजपा में शामिल होने की अफवाहों का खंडन कर दिया है। लेकिन चंपई अकेले दिल्ली नहीं आए हैं। उनके साथ चार पांच विधायक और हैं। खबर है कि चंपई सोरेन बहुत जल्द बीजेपी में शामिल होने जा रहे हैं।

आप जानते ही है कि हेमंत सोरेज जब जेल भेज दिए गए तो उन्होंने चंपई सोरेन को झारखंड का मुख्यमंत्री बना दिया था। इस प्रकार चंपई झारखंड मुक्ति मोर्चा पार्टी में दूसरे नंबर के नेता बन गए। उसी समय से भाजपा के बड़े बड़े नेता चंपई पर डोरे डालने लगे थे। और परिणाम यह हुआ कि आज हेमंत के सबसे करीबी नेता चंपई भाजपा के मेहमान बन गए हैं। यह अलग बात है कि चंपई ने अभी तक अपना कार्ड नहीं खोला है।

एकनाथ शिंदे ने भी कुछ ऐसा ही किया था

एकनाथ शिंदे भी कभी उद्धव ठाकरे के लिए चंपई हुआ करते थे। वह भी ठाकरे के बहुत करीबी माने जाते थे। ठाकरे साहब भी उन्हें मोस्ट ल्वायल कहा करते थे। सारी जिम्मेदारियां उन्हें सौंप रखी थी। और जब एकनाथ शिंदे शिवसेना में दूसरे नंबर के नेता बन गए तो उन पर भी भाजपा के बड़े बड़े नेता डोरे डालने लगे थे। अंत में रातोरात एकनाथ शिंदे ने शिवसेना तोड़ दी और भाजपा की गोद में जा बैठे।

कहने का मतलब यह कि विपक्षी पार्टी में जो भी नेता दूसरे नंबर पर होता है, वह कभी न कभी भाजपा का हो जाता है। आपरेशन लोटस की यही एक सच्चाई है। ठीक उसी प्रकार झारखंड मुक्ति मोर्चा के नंबर टू नेता चंपई सोरेन को तोड़ने की कोशिश की जा रही है। इस खेल में एक नेता हर बार कॉमन रहा है। हम बात कर रहे हैं हेमंत विश्वशर्मा की। क्योंकि अमित शाह यदि भाजपा के चाणक्य माने जाते हैं तो विश्वशर्मा भाजपा के मिनी चाणक्य हैं।

जमीन पर हेमंत विश्वशर्मा देते हैं आपरेशन लोटस को अंजाम

एकनाथ शिंदे ने जब शिवसेना तोड़ी थी तो उस समय सारा इंतजाम हेमंत विश्वशर्मा ने ही किया था। शिवसेना के बागी विधायकों को गुवाहाटी के एक होटल में ठहरने की व्यवस्था हेमंत विश्वशर्मा ने ही की थी। आप कह सकते हैं कि आपरेशन लोटस की रिमोट भले ही मोदी शाह के हाथ में थी लेकिन जमीन पर आपरेशन लोटस हेमंत विश्वशर्मा ही चला रहे थे। शायद इसीलिए उन्हें भाजपा का मिनी चाणक्य भी कहा जाता है।

इन्हीं हेमंत विश्वशर्मा को झारखंड भेजा गया है। क्योंकि झारखंड में भाजपा की सारी जिम्मेदारी अमित शाह ने हेमंत विश्वशर्मा को दे रखी है। इस प्रकार आपरेशन लोटस का मूलमंत्र यही है कि अगर किसी विपक्षी दल की सरकार गिरानी है तो मुख्यमंत्री के बाद दूसरे नंबर के नेता को तोड़ लिया जाए। यह अलग बात है कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी के नंबर दो नेता मनीष सिसोदिया कभी भी अमित शाह के झांसे में नहीं आए। हो सकता है कि इसीलिए उन्हें लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा।

निश्चित तौर पर फ्रस्ट्रेट है भाजपा

Operation Lotus: दरअसल, आपरेशन लोटस वहीं चलाया जाता है, जहां भाजपा की जमीन कमजोर होती है। इसलिए यह एक बड़ा सवाल है कि महाराष्ट्र और झारखंड जहां दीपावली के बाद चुनाव होने हैं, वहां भाजपा की जमीन पूरी तरह खिसक चुकी है? क्या बीजेपी हरियाणा की तरह महाराष्ट्र और झारखंड में अपनी जमीन खो चुकी है? यदि ऐसा है तो निश्चित तौर पर भाजपा फ्रस्ट्रेट है और वह आपरेशन लोटस चलाने के लिए विवश हो चुकी है।

झारखंड के एक निर्भीक पत्रकार आनंद कुमार के मुताबिक, शुरुआत से ही भाजपा झारखंड सरकार को अस्थिर करने के प्रयास में लगी हुई है। लेकिन कभी भी झारखंड में भाजपा का आपरेशन लोटस सफल नहीं हो पाया। क्योंकि समय रहते हेमंत सोरेन ने सब कुछ मैनेज कर लिया था। आज के हालात की बात करें तो 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा न केवल पांच ट्राइवल सीटें हार चुकी है, अपनी तीन सीटें भी गंवा चुकी है। पत्रकार उमाकांत लखेड़ा की मानें तो महाराष्ट्र में भी भाजपा की दाल गलने वाली नहीं है। आपरेशन लोटस भाजपा का फ्रस्ट्रेशन मात्र है। क्योंकि अब भाजपा के पास कोई विकल्प बचा ही नहीं है। भाजपा अपना विश्वास खो चुकी है।

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