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Unified Civil Code: भाजपा पर भारी पड़ सकता है यह कदम

infopost August 18, 2024
Unified Civil Code

Unified Civil Code: यूसीसी यानी यूनीफाइड सिविल कोड भारतीय जनता पार्टी लागू करना चाहती है। क्योंकि इससे भाजपा अपने वोटबैंक को साधना चाहती है। लेकिन इस बात में कोई शक नहीं है कि इससे सांप्रदायिकता का जहर देश में फैलेगा। इसी के साथ चंद्र बाबू नायडू भी अपना तेवर दिखाने से पीछे नहीं हटेंगे। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है।

Unified Civil Code: नायडू के वायदों का क्या होगा?

इंफोपोस्ट डेस्क

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Unified Civil Code: चंद्र बाबू नायडू के घोषणा पत्र में मुसलमानों के लिए बहुत कुछ था। हज यात्रियों के लिए एक लाख रुपये, मौलवियों को दस हजार रुपये की मासिक सैलरी, मदरसों के मेंटीनेंस के लिए पांच हजार रुपये दिए जाने के वायदे किए गए थे। बताना जरूरी है कि चंद्र बाबू नायडू कभी अपने वायदे से पीछे नहीं हटते। शायद इसीलिए चंद्र बाबू नायडू ने भाजपा से साफ कह दिया है कि अब हमारी आपस में बन नहीं पाएगी। क्योंकि भाजपा अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रही है।

चंद्र बाबू नायडू ने धमकी तक दे डाली है कि सांप्रदायिकता वाला खेल बंद कीजिए और सुधर जाइए, वर्ना कुर्सी खींच लेंगे। इसमें कोई आश्चर्य नहीं किया जाना चाहिए। क्योंकि जब आरएसएस मोदी जी की कुर्सी खींचने पर उतारू है तो नायडू मोदी जी की महत्वपूर्ण बैसाखी भी हैं। उनके बल पर ही मोदी जी कुर्सी पर बैठे हैं। यही नहीं, भारतीय जनता पार्टी के लोग भी मोदी जी से आजादी चाहते हैं। ऐसे में मोदी जी की कुर्सी को कभी भी खतरे से बाहर नहीं कहा जा सकता।

आंध्र प्रदेश में सांप्रदायिकता नहीं, सुधार चाहते हैं नायडू

चंद्र बाबू नायडू की समस्या आंध्र प्रदेश है। उन्हें आंध्र प्रदेश को सुधारना है। वहां जातिवाद और सांप्रदायिकता का जहर नहीं फैलाना है। और मोदी को अगर कुर्सी पर बने रहना है तो उनके पास कोई मजबूत विकल्प भी नहीं है। क्योंकि पिछले दस वर्षों में जो जुमले हमारे देश के प्रधानमंत्री ने दिए हैं, उससे हर कोई वाकिफ है। यहां तक कि लोग मोदी जी के जुमलों से पक चुके हैं।

लेकिन नायडू ने कह दिया है कि अभी भी समय है, सुधर जाइए। इसके जरिये उन्होंने मोदी जी को आइना दिखा दिया है। कहा है कि यूनीफाइड सिविल कोड आप कभी भी लागू नहीं कर पाएंगे। अन्यथा आपकी कुर्सी हिल जाने में देर नहीं लगेगी। इन परिस्थितियों में नीतीश कुमार भी चांस की उम्मीद में डांस कर रहे हैं। क्योंकि नीतीश कुमार की कोई भी मांग पूरी नहीं हुई है और वह वक्फ बोर्ड बिल में फंस चुके हैं। क्योंकि इस बिल पर पहले तो उन्होंने समर्थन दे दिया, लेकिन बाद में मुकर गए। अंत में यह बिल जेपीसी कमेटी के पास चला गया।

बिहार में नीतीश कुमार को मिलता है मुसलिम वर्ग का वोट

बिहार में नीतीश कुमार को मुसलिम वर्ग का वोट मिलता है। इसलिए वह समर्थन से हाथ खींचते नजर आ रहे हैं। ऐसे में मोदी जी की सरकार जिन दो बैसाखियों पर टिकी है, वे बैसाखियां खिसकती नजर आ रही हैं। ऐसे में मोदी जी की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। उनकी समझ में नहीं आ रहा है कि नायडू को मनाएं, नीतीश को मनाएं, पार्टी के लोगों को मनाएं या आरएसएस को। नीतीश और नायडू का तांडव भयंकर भय पैदा कर रहा है।

इसी बीच कश्मीर और हरियाणा का चुनाव भी आ गया है, जो मोदी जी के लिए बहुत बड़ी चुनौती है। हरियाणा में 80 प्रतिशत लोग कांग्रेस की बात कर रहे हैं तो मात्र 20 प्रतिशत लोग भाजपा के पक्ष में हैं। इस प्रदेश में भाजपा ने लोकसभा की सभी दस सीटों पर जीत दर्ज किया था। लेकिन इस बार मामला फिफ्टी फिफ्टी का हो गया है। यानी कि भाजपा ने इस बार पांच सीटें गंवा दी जो कांग्रेस के खाते में चली गईं।

सितंबर में विधानसभा भंग कर देंगे नीतीश

Unified Civil Code: ऐसा अनुमान है कि नीतीश कुमार अगले माह यानी सितंबर में विधानसभा भंग कर देंगे। क्योंकि अब उन्हें मोदी जी पर कोई भरोसा या विश्वास नहीं है। इसलिए नीतीश की नजदीकियां लालू प्रसाद यादव से बढ़ती जा रही हैं। यह तो सभी जानते हैं कि नीतीश कुमार जब भी किसी को छोड़ते हैं तो सबसे पहले बातचीत बंद कर देते हैं।

मजे की बात यह है कि एक तरफ नीतीश यह कहते नहीं थकते थे कि अब मोदी जी के ही साथ रहेंगे और कहीं भी नहीं जाएंगे। लेकिन अब पैदल ही राबड़ी देवी के पास चले जाते हैं और कहते हैं, भाभी जी गलती हो गई। मोदी जी तो हमारी पार्टी ही तोड़ देंगे। मोदी जी लाल किले की प्राचीर से कह चुके हैं कि यूनीफाइड सिविल कोड लाकर रहेंगे। और अगर इस बिल को केंद्र सरकार लाती है तो हर राज्य को इसे लागू करना ही पड़ेगा। यह सब तब हो रहा है, जब केंद्र सरकार अल्प मत में है। और इस सरकार का कोई भी मिनिमम कॉमन प्रोग्राम भी नहीं आया है।

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