‘शेयर्ड कैनवास’ समूह कला प्रदर्शनी का आयोजन मंगल मूर्ति इंस्टीट्यूट ऑफ फाइन आर्ट, मेरठ की ओर से किया गया। तीन दिवसीय इस आयोजन के आयोजक महेंद्र राय थे। प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य विभिन्न कलाकारों को एक साझा मंच उपलब्ध कराना था, जहां वे अपनी कला के माध्यम से विचारों, अनुभवों, भावनाओं और रचनात्मक दृष्टिकोणों को दर्शकों के सामने प्रस्तुत कर सकें। इस आयोजन ने कला प्रेमियों को अलग-अलग शैलियों और कलात्मक प्रयोगों को करीब से देखने तथा कलाकारों की रचनात्मक दुनिया को समझने का अवसर प्रदान किया।
मुक्ता सिंघल की चार कलाकृतियों ने खींचा ध्यान
मेरठ, उत्तर प्रदेश में रहकर अपनी कलात्मक यात्रा को आगे बढ़ा रहीं समकालीन कलाकार मुक्ता सिंघल ने इस प्रदर्शनी में अपनी चार चुनिंदा पेंटिंग्स प्रदर्शित कीं। उनकी कलाकृतियों में रंगों, रेखाओं और भावनाओं का ऐसा समन्वय देखने को मिला, जो कला के प्रति उनकी गंभीरता और संवेदनशील दृष्टिकोण को दर्शाता है। उनकी रचनाओं में केवल दृश्य सौंदर्य ही नहीं, बल्कि विचारों और अनुभूतियों को अभिव्यक्त करने का प्रयास भी दिखाई देता है।
मुक्ता सिंघल की कला की विशेषता विभिन्न माध्यमों पर उनकी मजबूत पकड़ है। वह पारंपरिक भारतीय वॉटरकलर तकनीक, जीवंत ऐक्रेलिक रंगों, पेन एवं इंक ड्रॉइंग तथा चारकोल-पेस्टल के माध्यम से अपनी रचनात्मक सोच को आकार देती हैं। इन माध्यमों के जरिए वह अलग-अलग विषयों और भावनाओं को अपनी विशिष्ट शैली में प्रस्तुत करती हैं।
उनकी कलात्मक अभिव्यक्ति में तकनीकी परिपक्वता, रचनात्मक विविधता और भावनात्मक गहराई का संतुलित मेल दिखाई देता है। अलग-अलग कला माध्यमों का प्रयोग उन्हें अपनी कल्पना को विविध रूपों में व्यक्त करने की स्वतंत्रता देता है। यही विविधता उनकी कलात्मक पहचान को विशिष्ट बनाती है।
परंपरा और आधुनिक संवेदनाओं का संगम
मुक्ता सिंघल की कलाकृतियों में प्राचीन कला परंपराओं और आधुनिक मानवीय भावनाओं के बीच एक सशक्त संबंध दिखाई देता है। उनकी कला में धैर्य, विरासत, संवेदनशीलता और आत्मिक अनुभूति जैसे तत्व महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। उनके लिए कैनवास केवल रंगों और आकृतियों को उकेरने की सतह नहीं, बल्कि भावनाओं और विचारों को जीवंत बनाने का माध्यम है।
उनकी कलात्मक सोच इस विचार को सामने लाती है कि कला को केवल बाहरी सुंदरता तक सीमित नहीं किया जा सकता। इसके माध्यम से मनुष्य की आंतरिक अनुभूतियों, अनुभवों और संवेदनाओं को भी अभिव्यक्त किया जा सकता है। रंगों और रेखाओं के जरिए कलाकार अपने विचारों को ऐसा रूप देता है, जिससे दर्शक भी उस रचना से भावनात्मक रूप से जुड़ सकें।
मुक्ता सिंघल का मानना है कि कला केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मा की एक पवित्र यात्रा है। इस यात्रा में धैर्य, विरासत और भावनाएं कैनवास पर जीवंत होती हैं। उनकी यह विचारधारा उनकी कलात्मक दृष्टि को समझने का एक महत्वपूर्ण आधार प्रस्तुत करती है। उनकी रचनाओं में परंपरा के प्रति सम्मान के साथ-साथ आधुनिक संवेदनाओं को स्थान देने का प्रयास भी दिखाई देता है।
दस कलाकारों को मिला साझा मंच
‘शेयर्ड कैनवास’ प्रदर्शनी में विभिन्न पृष्ठभूमियों और कलात्मक शैलियों से जुड़े कलाकारों ने हिस्सा लिया। मुक्ता सिंघल के अलावा अनामिका रस्तोगी, जय राय, महेंद्र राय, पूजा मुद्गल, प्रिया रावत, रेणु उमराव, रिंकी आनंद, शिखा श्योराण, स्नेहा रॉय और विराट तोमर के नाम भी प्रतिभागी कलाकारों की सूची में शामिल थे।
इन कलाकारों की भागीदारी ने प्रदर्शनी को विविध कलात्मक दृष्टिकोणों से समृद्ध बनाया। प्रत्येक कलाकार अपनी कल्पना, अनुभव और रचनात्मक शैली के माध्यम से कला को अलग-अलग रूपों में प्रस्तुत करता है। ऐसी समूह प्रदर्शनियां दर्शकों को एक ही स्थान पर कई तरह की कलात्मक अभिव्यक्तियों को देखने और उनके बीच समानताओं तथा भिन्नताओं को समझने का अवसर देती हैं।
इस तरह के आयोजन उभरते और स्थापित कलाकारों के बीच संवाद की संभावनाएं भी बढ़ाते हैं। कलाकारों को अपनी रचनाओं को व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाने, कला प्रेमियों से जुड़ने और अन्य रचनात्मक व्यक्तित्वों के काम को समझने का अवसर मिलता है।
कला और कलाकारों के बीच संवाद का माध्यम बनी प्रदर्शनी
तीन दिनों तक चली ‘शेयर्ड कैनवास’ प्रदर्शनी ने कला प्रेमियों को विभिन्न शैलियों, विचारों और रचनात्मक दृष्टिकोणों से रूबरू कराया। इस आयोजन ने यह भी रेखांकित किया कि कला की दुनिया में विविधता का विशेष महत्व है। अलग-अलग कलाकार अपनी व्यक्तिगत अनुभूतियों और दृष्टिकोणों के माध्यम से कला को नए अर्थ प्रदान करते हैं।
मुक्ता सिंघल की चार पेंटिंग्स की प्रदर्शनी में भागीदारी उनके रचनात्मक सफर का महत्वपूर्ण हिस्सा रही। उनकी कलाकृतियों ने यह अवसर प्रदान किया कि दर्शक उनके कलात्मक प्रयोगों, माध्यमों पर पकड़ और भावनात्मक अभिव्यक्ति को करीब से समझ सकें।
कुल मिलाकर, ‘शेयर्ड कैनवास’ समूह कला प्रदर्शनी ने कलाकारों की रचनात्मकता को साझा मंच प्रदान करने के साथ-साथ कला और समाज के बीच संबंध को मजबूत करने का प्रयास किया। मुक्ता सिंघल की भागीदारी ने इस आयोजन में मेरठ की समकालीन कला प्रतिभा को भी प्रतिनिधित्व दिया। उनकी कलात्मक यात्रा इस बात को रेखांकित करती है कि कला के माध्यम से परंपरा, कल्पना और मानवीय संवेदनाओं को एक साथ अभिव्यक्त किया जा सकता है।


