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Mahakauthig uproar: फिर विवादों में महाकौथिग, प्रेस वार्ता में पत्रकारों ने घेरा

infopost December 18, 2025
Mahakauthig uproar

Mahakauthig uproar: महाकौथिग मेले के संबंध में जानकारी देने के लिए बुलाई गई प्रेस वार्ता में उस समय हंगामा खड़ा हो गया जब आयोजकों ने पत्रकारों से मेले के प्रचार प्रसार का अनुरोध किया।

Mahakauthig uproar: आप लोग चाहते क्या हैं?

इंफोपोस्ट न्यूज

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Mahakauthig uproar: प्रेस वार्ता का आयोजन नोएडा मीडिया क्लब में किया गया था। एक पत्रकार ने कहा, आप लोग चाहते क्या हैं? आप मेला परिसर से पत्रकारों को हाथ पकड़ कर बाहर निकाल देते हैं। कमियां बताने वाले पत्रकार को कानूनी नोटिस भेजते हैं। और उम्मीद करते हैं कि वही पत्रकार आपके मेले का प्रचार प्रसार करेंगे।

इस पर आयोजकों ने जो बात कही, उससे हंगामा और बढ़ गया। आयोजकों ने कहा, मेले में कुछ यूट्यूबर पहुंच जाते हैं, जिन्हें निकालना पड़ता है। इस पर पत्रकारों ने कहा, आप लोग यूट्यूबर को छोटा क्यों समझते हैं? आज नब्बे प्रतिशत मीडिया यूट्यूब पर है। और प्रचार प्रसार का सबसे सुलभ और सशक्त माध्यम यूट्यूब ही है।

आयोजकों पर पत्रकारों से बदसलूकी के आरोप पर प्रतिक्रिया

बता दें कि आयोजकों पर पिछले वर्ष कुछ पत्रकारों से बदसलूकी करने के आरोप लगे थे। इस पर कुछ पत्रकारों ने खबर प्रकाशित की थी। जिन्हें कानूनी नोटिस भेज दिए गए थे। जिसे आज के हंगामे की वजह बताया जा रहा है। लेकिन आयोजकों में हंगामे के बावजूद कोई सुधार नहीं आया। उन्होंने भोजन का समय होने के बावजूद पत्रकारों को खाना नहीं खिलाया। जबकि भोजन के समय पर बुलाए जाने पर खाना खिलाना सामान्य शिष्टाचार माना जाता है। ऐसे में यह समझना कठिन है कि इस महामेले के जरिए किस संस्कृति का प्रचार प्रसार किया जा रहा है?

दरअसल, महाकौथिग मेला उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक माना जाता है। यह मेला पहाड़ी समाज की सांस्कृतिक पहचान, लोकनृत्य, लोकसंगीत, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों के प्रदर्शन का प्रमुख मंच है। हाल के समय में महाकौथिग मेले को लेकर एक विवाद सामने आया, जिसने प्रशासन, आयोजकों और आम जनता का ध्यान आकर्षित किया।

आयोजन, प्रबंधन और उद्देश्य को लेकर उठे सवाल

विवाद का मुख्य कारण मेले के आयोजन, प्रबंधन और उद्देश्य को लेकर उठे सवाल बताए जा रहे हैं। कुछ सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों का आरोप है कि मेला अपने मूल उद्देश्य से भटक रहा है और इसमें स्थानीय संस्कृति के बजाय व्यावसायिक गतिविधियों को अधिक प्राथमिकता दी जा रही है। उनका कहना है कि बाहरी व्यापारियों की बढ़ती भागीदारी से स्थानीय कारीगरों और कलाकारों को अपेक्षित मंच नहीं मिल पा रहा है।

इसके अलावा, मेले में कथित रूप से कुछ ऐसे कार्यक्रमों और प्रस्तुतियों को शामिल किए जाने पर भी आपत्ति जताई गई, जिन्हें स्थानीय परंपराओं के अनुकूल नहीं माना गया। इस मुद्दे पर कुछ संगठनों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर मेले की रूपरेखा में बदलाव की मांग की। वहीं, सुरक्षा व्यवस्था, ट्रैफिक जाम और स्वच्छता जैसे प्रशासनिक पहलुओं को लेकर भी जनता ने असंतोष व्यक्त किया।

महाकौथिग मेला समय के साथ विकसित

आयोजक पक्ष का कहना है कि महाकौथिग मेला समय के साथ विकसित हो रहा है और इसका उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को जोड़ना है। उनके अनुसार, व्यावसायिक गतिविधियों से मेले को आर्थिक मजबूती मिलती है, जिससे भविष्य में इसे और बेहतर रूप में आयोजित किया जा सकता है। प्रशासन ने भी दोनों पक्षों की बात सुनने और संतुलित समाधान निकालने का आश्वासन दिया है।

Mahakauthig uproar: निष्कर्षतः, महाकौथिग मेला विवाद परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन की चुनौती को दर्शाता है। यदि सभी हितधारकों के साथ संवाद स्थापित कर पारदर्शी तरीके से निर्णय लिए जाएं, तो यह मेला अपनी सांस्कृतिक गरिमा बनाए रखते हुए सफलतापूर्वक आयोजित किया जा सकता है।

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