दिल्ली में हो रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मद्देनजर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के बीच मतभेद उभर कर सामने आए हैं; पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने आयोजनों से मिलने वाले ठोस फ़ायदों पर सवाल उठाए, जबकि शशि थरूर ने भारत की कूटनीतिक क्षमता की तारीफ़ की और बीजेपी नेता सुधांशु त्रिवेदी ने चिदंबरम पर तीखी प्रतिक्रिया दी।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और प्रतिक्रिया
ब्रिक्स देशों का 18वां शिखर सम्मेलन दिल्ली में हो रहा है और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत कई देशों के नेता राजधानी आ रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने शिखर सम्मेलनों के लाभों पर सवाल उठाए।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!पी. चिदंबरम ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा कि पिछली दो या तीन शिखर सम्मेलनों से उन्हें कोई ठोस नतीजा नज़र नहीं आया और उन्होंने पूछा, “इनसे देश को क्या ठोस फ़ायदा मिला?”
कांग्रेस नेताओं की अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ
चिदंबरम के इस बयान के बाद तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने प्रतिक्रिया देते हुए भारत की कूटनीतिक क्षमता की तारीफ़ की। थरूर की प्रतिक्रिया से यह संकेत मिलता है कि पार्टी के भीतर इस विषय पर असहमति मौजूद है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के बीच यह मतभेद आयोजन की प्रासंगिकता और उससे मिलने वाले ठोस लाभ पर बहस का रूप धारण कर गया है, जहां कुछ नेता आयोजन के औचित्य पर प्रश्न उठा रहे हैं और कुछ इसकी कूटनीतिक उपलब्धियों पर जोर दे रहे हैं।
बीजेपी की तीखी प्रतिक्रिया
पी चिदंबरम के बयान पर बीजेपी नेता सुधांशु त्रिवेदी ने तीखी प्रतिक्रिया दी और उन्हें “नाराज़ फूफा” बताया। सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, “कांग्रेस के दिग्गज नेता पी चिदंबरम का बयान उनकी ‘दिमागी क्षमता पर सवाल’ उठाता है. यह बयान देकर उन्होंने ‘खुद को नाराज़ फूफा साबित’ कर दिया है.”
त्रिवेदी ने आगे कहा, “रूस के राष्ट्रपति पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान समेत दुनिया के कई नेता आ रहे हैं और ऐसा लगता है कि वो (चिदंबरम) अपनी समझदारी इन सारे राष्ट्राध्यक्षों से ऊपर दिखाना चाहते हैं.”
पार्टीगत प्रभाव और सार्वजनिक बहस
इस घटनाक्रम से पार्टी के भीतर सार्वजनिक रूप से बयान सम्बन्धी मतभेद उजागर हुए हैं, जो शिखर सम्मेलन के समय राजनीतिक बहस को बढ़ा रहे हैं। बयान जारी करने वाले और उन पर प्रतिक्रियाएँ देने वाले नेताओं के दृष्टिकोण स्पष्ट रूप से अलग दिखाई दे रहे हैं।
किसी भी अतिरिक्त निष्कर्ष पर पहुंचने या किसी नए तथ्य के जोड़ने के बजाय, उपलब्ध बयानों के आधार पर यह चर्चा सीमित है कि शिखर सम्मेलनों के ठोस लाभों के बारे में अलग-अलग रुख मौजूद हैं।
पृष्ठभूमि
भारत ब्रिक्स, शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ), जी20 और क्वाड समेत कई बहुपक्षीय समूहों का हिस्सा है, और इसी बहुपक्षीयता के संदर्भ में शिखर सम्मेलनों की उपस्थिति और चर्चा हो रही है।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में दुनिया के कई राष्ट्राध्यक्षों की भागीदारी के बीच यह राजनीतिक और कूटनीतिक बहस उभरकर सामने आई है।
निष्कर्ष
उपलब्ध बयानों के अनुसार, पी. चिदंबरम ने शिखर सम्मेलनों से मिलने वाले ठोस फायदों पर सवाल उठाए हैं, शशि थरूर ने भारत की कूटनीति की प्रशंसा की है, और सुधांशु त्रिवेदी ने चिदंबरम पर तीखी टिप्पणी की है।


