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फर्मेंटेशन से ब्रेड-दही से लेकर ‘बिना पशु’ दूध जैसा प्रोटीन तक: क्या है Precision Fermentation?

infopost September 12, 2026
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फर्मेंटेशन एक जैविक प्रक्रिया है जिसके जरिए सूक्ष्मजीव या उनके एंजाइम शर्करा और अन्य पोषक तत्वों को बदलकर नए पदार्थ बनाते हैं। यह प्रक्रिया ब्रेड, केक, बिस्किट, दही, जूस और शराब जैसे कई खाद्य पदार्थों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और अब इसका आधुनिक रूप Precision Fermentation भी चर्चा में है।

फर्मेंटेशन क्या है?

सरल भाषा में फर्मेंटेशन ऐसी जैविक प्रक्रिया है जिसमें सूक्ष्मजीव या उनके एंजाइम किसी खाद्य पदार्थ में मौजूद शर्करा और अन्य पोषक तत्वों को बदलकर नए पदार्थ बनाते हैं। उदाहरण के तौर पर Saccharomyces cerevisiae यानी सामान्य बेकर्स यीस्ट ब्रेड बनाने में इस्तेमाल होता है। यीस्ट आटे में मौजूद शर्करा का उपयोग करते हुए मुख्य रूप से कार्बन डाइऑक्साइड और एथेनॉल बनाता है; कार्बन डाइऑक्साइड आटे को फूलने में मदद करता है।

जूस से अल्कोहल बनने की प्रक्रिया

वीडियो में अंगूर, सेब और संतरे के जूस का उदाहरण देकर समझाया गया है कि कुछ परिस्थितियों में यीस्ट शर्करा को बदलकर एथेनॉल और कार्बन डाइऑक्साइड बना सकता है। यह अल्कोहलिक फर्मेंटेशन कहलाती है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर जूस अपने आप शराब में बदल जाता है; इसके लिए विशेष सूक्ष्मजीव, परिस्थितियां और नियंत्रित प्रक्रिया जरूरी होती हैं।

दही बनने में सूक्ष्मजीवों की भूमिका

दही बनने की सामान्य प्रक्रिया में मुख्य भूमिका लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया की होती है। ये बैक्टीरिया दूध में मौजूद लैक्टोज को लैक्टिक एसिड में बदलते हैं, जिससे दूध की अम्लता बढ़ती है और दूध के प्रोटीन जमने लगते हैं, जिसके परिणामस्वरूप दही बनता है। इसलिए दही को केवल यीस्ट की फर्मेंटेशन प्रक्रिया का परिणाम बताना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं होगा।

फंगस और बैक्टीरिया: हर बार हानिकारक नहीं

वीडियो में यह स्पष्ट किया गया है कि फंगस या बैक्टीरिया का मतलब हमेशा खराब या जहरीला होना नहीं है। खाद्य उद्योग में कई प्रकार के सूक्ष्मजीव उपयोगी होते हैं—कुछ भोजन को बदलने, स्वाद विकसित करने, गैस बनाने या विशेष खाद्य घटक तैयार करने में मदद करते हैं। दूसरी ओर कुछ फंगस और बैक्टीरिया भोजन को खराब भी कर सकते हैं। इसलिए यह जानना जरूरी है कि कौन-सा सूक्ष्मजीव, किस परिस्थिति में और किस उद्देश्य से इस्तेमाल किया जा रहा है।

Precision Fermentation क्या है?

Precision Fermentation में विशेष सूक्ष्मजीवों का इस्तेमाल किसी खास प्रोटीन या अन्य उपयोगी पदार्थ के उत्पादन के लिए किया जाता है। इस तकनीक में विचार यह नहीं है कि यीस्ट को सीधे दूध में डालकर दूध बना दिया जाए; बल्कि नियंत्रित परिस्थितियों में सूक्ष्मजीवों को किसी विशेष प्रोटीन के उत्पादन के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

FDA रिकॉर्ड और दूध के प्रोटीन

FDA के रिकॉर्ड में ऐसे प्रोटीन का उल्लेख है जो फर्मेंटेशन के जरिए तैयार किए जाते हैं और दूध के प्रोटीन जैसे β-lactoglobulin से संबंधित हैं।

क्या फर्मेंटेशन-आधारित उत्पाद पारंपरिक दूध के समान होंगे?

किसी फर्मेंटेशन-आधारित उत्पाद को पारंपरिक दूध के समान मानना अपने आप में सही नहीं होगा। इसके पोषण, एलर्जी, स्वाद, संरचना और नियामकीय स्थिति का मूल्यांकन अलग-अलग किया जाना जरूरी है।

भविष्य और सावधानी

फर्मेंटेशन कोई नई तकनीक नहीं है; मानव सभ्यता लंबे समय से इसका उपयोग करती आई है। नया बदल यह है कि आधुनिक जैव-प्रौद्योगिकी फर्मेंटेशन को अधिक नियंत्रित और लक्ष्य-विशिष्ट तरीके से इस्तेमाल करने की कोशिश कर रही है। इसी वजह से भविष्य में दूध के प्रोटीन, खाद्य सामग्री और अन्य पोषक घटकों के उत्पादन के नए तरीके देखने को मिल सकते हैं।

साथ ही, इस तकनीक को समझते समय सोशल मीडिया के दावों और वैज्ञानिक तथ्यों के बीच अंतर करना भी जरूरी है।

निष्कर्ष

फर्मेंटेशन का मतलब सिर्फ खाना सड़ना नहीं है। नियंत्रित परिस्थितियों में यही जैविक प्रक्रिया ब्रेड को फूलाने, कुछ खाद्य पदार्थों के स्वाद और संरचना को बदलने तथा आधुनिक खाद्य तकनीक में विशेष प्रोटीन तैयार करने तक में उपयोगी हो सकती है। FDA के रिकॉर्ड भी फर्मेंटेशन-आधारित खाद्य घटकों और माइक्रोबियल प्रक्रियाओं के कई उदाहरण दर्ज करते हैं।

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