Chhath in Bihar: बिहार की सबसे बड़ी खबर छठ पूजा के तीसरे दिन ‘संध्या अर्घ्य’ से जुड़ी रही। सूर्यास्त के समय नदियों, तालाबों और घाटों पर लाखों व्रतधारियों ने सूर्यदेव को पहला अर्घ्य अर्पित किया। यह पर्व बिहार की सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है, जो पर्यावरण संरक्षण, परिवारिक एकता और आस्था का संदेश देता है।
Chhath in Bihar: बिहार की जनता ने आस्था की मिसाल कायम की
इंफोपोस्ट न्यूजडेस्क
Chhath in Bihar: इस बार मौसम विभाग के पूर्वानुमान ने पूजा को चुनौतीपूर्ण बना दिया। पश्चिमी विक्षोभ और बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी भरी हवाओं के कारण पूरे राज्य में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना बनी रही, जिसने लाखों श्रद्धालुओं को परेशान किया। फिर भी, बिहार की जनता ने आस्था की मिसाल कायम की।
छठ पूजा का यह चरण चार दिवसीय महापर्व का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पहला दिन ‘नहाय-खाय’ (25 अक्टूबर) से शुरू होकर दूसरा दिन ‘खरना’ (26 अक्टूबर) गुजरा। आज ‘संध्या अर्घ्य’ के साथ तीसरा दिन संपन्न हुआ, जबकि कल 28 अक्टूबर को ‘उषा अर्घ्य’ के बाद पर्व का समापन होगा। पटना के गांधी संग्रहालय घाट से लेकर भागलपुर, मुजफ्फरपुर, दरभंगा और वैशाली के हर कोने में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी।
महिलाओं ने कठिन उपवास रखा
महिलाओं ने कठिन उपवास रखा, ठेकुआ और फल अर्पित किए। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ट्वीट कर व्रतधारियों को बधाई दी और सुशासन सरकार की ओर से घाटों पर सुरक्षा व सफाई की व्यवस्था का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “छठ बिहार की एकता और शांति का प्रतीक है। हमारी सरकार ने सभी घाटों पर विशेष इंतजाम किए हैं। “लेकिन सबसे बड़ी चुनौती मौसम की रही।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, 27 अक्टूबर को चंपारण, गोपालगंज, सीवान, सारण, वैशाली, दरभंगा, मधुबनी और मुजफ्फरपुर जैसे उत्तर और पश्चिम बिहार के जिलों में हल्की बारिश दर्ज की गई। पटना, गया, नालंदा, जहानाबाद, नवादा, अरवल, भोजपुर, बक्सर और कैमूर में भी बादल छाए रहे। बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव क्षेत्र ने नमी वाली हवाओं को उत्तर की ओर धकेल दिया, जिससे 27 से 31 अक्टूबर तक राज्य के अधिकांश भागों में वर्षा की चेतावनी जारी की गई।
मानसून के बाद का पहला बड़ा मौसमी बदलाव
विशेषज्ञों का कहना है कि यह मानसून के बाद का पहला बड़ा मौसमी बदलाव है, जो ठंड की शुरुआत का संकेत देता है। व्रतधारियों ने छाते और रेनकोट के साथ घाट पहुंचकर पूजा की, लेकिन कई जगहों पर पानी भरने से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया। प्रशासन ने ड्रोन से निगरानी की और लाइफबोट तैनात की। राजनीतिक दलों ने भी छठ को चुनावी रंग देने का मौका नहीं गंवाया। विधानसभा चुनाव 2025 के मद्देनजर एनडीए और महागठबंधन दोनों ने घाटों पर प्रचार किया। तेज प्रताप यादव ने महुआ विधानसभा क्षेत्र से नामांकन दाखिल करते हुए वादा किया कि सत्ता में आने पर महुआ में भारत-पाक क्रिकेट मैच का स्टेडियम बनेगा।
वहीं, भाजपा उम्मीदवार नितिन नबीन ने बांकीपुर में कहा, “नीतीश कुमार के सुशासन ने बिहार को जंगलराज से निकाला। अब विकास की रफ्तार तेज है।” जेडीयू ने 11 बागी नेताओं को निष्कासित किया, जो छठ के दौरान राजनीतिक हलचल बढ़ाने वाली दूसरी बड़ी घटना बनी।सांस्कृतिक रूप से छठ बिहार की पहचान है। यह पर्व सूर्य की सात किरणों से जुड़ा है, जहां षष्ठी माई को प्रसन्न करने के लिए 36 घंटे का निर्जला व्रत रखा जाता है।
मौसम की मार ने कई परिवारों को निराश किया
Chhath in Bihar: पर्यावरणविदों का मानना है कि यह जल संरक्षण का संदेश देता है। लेकिन मौसम की मार ने कई परिवारों को निराश किया। भागलपुर में एक व्रतधारी ने कहा, “बारिश ने तो भिगो दिया, लेकिन आस्था नहीं डिगाई।” कल उषा अर्घ्य के साथ पर्व समाप्त होगा, लेकिन मौसम पूर्वानुमान अभी भी वर्षा की चेतावनी दे रहा है।
कुल मिलाकर, छठ का संध्या अर्घ्य बिहार की आस्था की जीत था, लेकिन मौसम की मार ने इसे सबसे चर्चित खबर बना दिया। यह पर्व न केवल धार्मिक, बल्कि सामाजिक एकता का प्रतीक है। बिहार की जनता उम्मीद कर रही है कि आने वाले दिनों में मौसम सुधरे और पर्व शांतिपूर्ण संपन्न हो। उधर, दिल्ली एनसीआर के लोगों का हुजूम नोएडा में उमड़ पड़ा है। नोएडा स्टेडियम में छठ महापर्व के लिए पुख्ता व्यवस्था की गई है।


