Change in politics: भारतीय राजनीति में जो बदलाव आ रहे हैं और जिस दिशा में राजनीति जा रही है, उसमें सिर्फ दो चीजें होने की देर है। और चार सौ पार का जो नारा है न, वो कांग्रेस का नारा बन सकता है। कैसे कांग्रेस 400 पार का सपना देख सकती है, आज इसी को समझने की कोशिश करेंगे।
Change in politics: क्यों सुपर पावर बन रही है कांग्रेस?
इंफोपोस्ट डेस्क
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!Change in politics: यह समझना जरूरी हो गया है कि कांग्रेस में इन दिनों क्या क्या बदलाव आए हैं। और उसी बदलाव की वजह से किस प्रकार कांग्रेस दोबारा सुपर पावर बनती जा रही है। एक लंबे समय से हम कांग्रेस को एक डिफाल्ट पार्टी की तरह देख रहे हैं। जैसे रोशनी जाएगी तो अंधेरा होता है। उसी तरह से अगर किसी पार्टी की सरकार चली जाएगी तो कांग्रेस आ जाएगी। कम से कम नरसिंह राव के बाद से परिस्थितियां ऐसी ही बनी हुई हैं।
दरअसल, अभी तक कांग्रेस पार्टी विचारधारा को लेकर भ्रमित रही है। कभी उसके पास प्रशांत किशोर जैसे लोग आते हैं और कहते हैं कि हिंदुत्व को लेकर थोड़ा सॉफ्ट रहो। मोदी जी पर हमला मत करो। कभी कोई कहता है कि जनेऊ पहन कर घूम आओ। लेकिन कांग्रेस की जो मूल विचारधारा है, वही कांग्रेस की ताकत है।
कांग्रेस की मूल विचारधारा वाली मशाल
राजीव गांधी के बाद कांग्रेस पार्टी में अब एक ऐसा लीडर आया है, जिसने कांग्रेस की मूल विचारधारा वाली मशाल को थाम रखा है। विपक्ष में होने के कारण वह नेता इसी मशाल के जरिये अपना कारवां बड़ा कर सकता है। संसद में राहुल गांधी का विपक्ष के नेता के रूप में भाषण देना। और उस भाषण में हिंदुत्व के मसले पर डरो मत, डराओ मत के लिए शिव का नरेटिव लेना। और मोदी जी को उनके मुंह पर कहना कि तुम हिंदू नहीं हो।
इस कहने में एक संदेश छिपा है। संदेश यह है कि हिंदू धर्म कुछ और है और उसके ठेकेदार कुछ और हैं। कांग्रेस की यही समझ सामने आने से भाजपा में खलबली मची हुई है। राहुल गांधी की यात्राओं में मोहब्बत की दुकान का भी संदेश कमोबेश यही था कि सबको साथ लेकर चला जाए। लेकिन कहते तो मोदी जी भी रहे हैं कि सबका साथ, सबका विकास। लेकिन उनका यह विचार कभी भी समावेशी नहीं रहा है। यह तो है राजनीतिक दर्शन की बात।
राहुल गांधी प्रधानमंत्री पद के लिए लोगों की पहली पसंद
लोकसभा चुनाव के बाद सीएसजीएस का एक सर्वे आया। उसके अनुसार राहुल गांधी प्रधानमंत्री पद के लिए लोगों की पहली पसंद बन गए। मोदी जी नंबर दो हैं। और चार प्रतिशत का अंतर भी है। मोदी जी को 32 प्रतिशत लोग प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं तो 36 प्रतिशत लोग राहुल गांधी को प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं। इसका संदेश यह है कि राहुल गांधी अब प्रधानमंत्री के विकल्प के तौर पर देखे जाने लगे हैं।
अब तक जो आप से सवाल पूछा जाता था कि मोदी नहीं तो कौन? अब यह सवाल ही खत्म हो गया है। क्योंकि अब साबित हो चुका है कि राहुल गांधी एक सच्चा, मजबूत और 56 इंची सीने वाला मर्द है, जो अपने दम पर कुछ भी कर सकता है। और उसके दिल में करुणा का एक सागर है। उसके मन में देश की राजनीति को एक सही दिशा में ले जाने का विचार है। लोकसभा में उनके ऐतिहासिक भाषण से यह भी साफ हो चुका है कि राहुल गांधी हिंदी में भी अच्छा बोल सकते हैं।


