Bihar1: चुनाव आयोग ने आखिरकार बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तारीखों की घोषणा कर दी है। राज्य में इस बार मतदान दो चरणों में होगा। पहला चरण 6 नवंबर और दूसरा चरण 11 नवंबर को। मतगणना की प्रक्रिया 14 नवंबर को होगी और उसी दिन शाम तक नतीजे आने की संभावना है। इस बार का चुनाव राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह नीतीश कुमार के नेतृत्व में चल रही NDA सरकार की परीक्षा के साथ-साथ तेजस्वी यादव की राजनीतिक साख के लिए भी निर्णायक होगा।
Bihar1: बिहार विधानसभा की अवधि 22 नवंबर 2025 को समाप्त
इंफोपोस्ट न्यूजडेस्क
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!Bihar1: चुनाव आयोग ने बताया कि बिहार विधानसभा की वर्तमान अवधि 22 नवंबर 2025 को समाप्त हो रही है, इसलिए पूरे चुनावी प्रक्रिया को इससे पहले पूरा करना आवश्यक था। आयोग ने त्योहारों — दीपावली और छठ — के बाद चुनाव तिथियाँ तय की हैं ताकि मतदाताओं की भागीदारी अधिकतम सुनिश्चित हो सके।
पहले चरण में लगभग 122 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान होगा, जिनमें गया, औरंगाबाद, नालंदा, जमुई, भागलपुर और कटिहार जैसे जिले शामिल हैं। दूसरे चरण में 121 सीटों पर वोटिंग होगी, जिनमें पटना, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, सिवान, गोपालगंज और बेगूसराय जिले प्रमुख हैं।
मतगणना 14 नवंबर को होगी और उसी दिन शाम तक परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे। राज्य भर में लगभग 80,000 मतदान केंद्र स्थापित किए जाएंगे और हर बूथ पर VVPAT एवं EVM मशीनों का इस्तेमाल किया जाएगा।
7.6 करोड़ मतदाता डालेंगे वोट
चुनाव आयोग के अनुसार इस बार लगभग 7.6 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इनमें 3.95 करोड़ पुरुष, 3.55 करोड़ महिलाएँ, और लगभग 50,000 तीसरे लिंग (ट्रांसजेंडर) मतदाता शामिल हैं। आयोग ने इस बार “Vote for Bihar 2025” नामक एक विशेष मतदाता जागरूकता अभियान भी शुरू किया है।
राज्य में मुख्य मुकाबला NDA और महागठबंधन (RJD–Congress–Left) के बीच रहने की संभावना है। सत्तारूढ़ NDA में जेडीयू के नीतीश कुमार और भाजपा (BJP) के सम्राट चौधरी संयुक्त रूप से मोर्चा संभालेंगे। विपक्षी खेमे में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदार हैं। कांग्रेस, वाम दल और कुछ छोटे क्षेत्रीय दल महागठबंधन का हिस्सा हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इस बार का चुनाव “स्थिरता बनाम परिवर्तन” के नारे पर लड़ा जाएगा। NDA विकास योजनाओं और शासन की निरंतरता का हवाला दे रही है, जबकि विपक्ष बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार और शिक्षा–स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार को मुद्दा बना रहा है।
प्रमुख चुनावी मुद्दे, सुरक्षा और तकनीकी इंतज़ाम
रोज़गार और पलायन युवाओं की बेरोज़गारी सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। शिक्षा और स्वास्थ्य शिक्षक भर्ती और सरकारी अस्पतालों की स्थिति पर विपक्ष हमलावर है। बाढ़ और आपदा प्रबंधन दरभंगा, सीतामढ़ी और कटिहार जैसे जिलों में बाढ़ राहत योजनाएँ केंद्र में हैं। महिलाओं की भागीदारी आयोग ने ‘महिला वोटर सप्ताह’ चलाने का एलान किया है ताकि महिला मतदान प्रतिशत 65% तक पहुँच सके।
चुनाव आयोग ने इस बार पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए कई डिजिटल उपाय किए हैं। प्रत्येक मतदान केंद्र पर CCTV कैमरे और वेबकास्टिंग की सुविधा होगी। इसके अलावा ‘cVIGIL Bihar’ नामक मोबाइल ऐप के ज़रिए आम लोग आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायत सीधे दर्ज करा सकेंगे। राज्य में लगभग 10,000 अर्धसैनिक बलों की तैनाती की जाएगी ताकि मतदान निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
निष्कर्ष
Bihar1: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 सिर्फ सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि राज्य की राजनीतिक दिशा तय करने वाला चुनाव साबित हो सकता है। जहां एक ओर नीतीश कुमार के लिए यह उनकी साख का इम्तिहान है, वहीं तेजस्वी यादव और विपक्ष के लिए यह मौके को भुनाने का बड़ा अवसर है। दो चरणों में होने वाला यह चुनाव प्रदेश की राजनीति में नए समीकरण और नए चेहरे भी सामने ला सकता है।


