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ऑक्सफोर्ड, कैम्ब्रिज और यूके संसद में वेदांत व उपनिषदों की शिक्षाओं को रखा दुनिया के सामने, दिल्ली एयरपोर्ट पर समर्थकों ने किया जोरदार स्वागत

infopost June 15, 2026
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नई दिल्ली। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी, कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी और यूके संसद जैसे प्रतिष्ठित वैश्विक मंचों पर भारतीय दर्शन, वेदांत और उपनिषदों की शिक्षाओं को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के बाद प्रसिद्ध दार्शनिक, बेस्टसेलिंग लेखक आचार्य प्रशांत रविवार को स्वदेश लौटे। इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बड़ी संख्या में पहुंचे लोगों ने तिरंगे, स्वागत संदेशों और बधाई-पत्रों के साथ उनका अभिनंदन किया।

एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत करते हुए आचार्य प्रशांत ने कहा, हमारे देश की ज्ञान परंपरा और सभ्यता पश्चिमी देश समझ रहे हैं, लेकिन हमारे अपने लोग उससे दूर होते जा रहे हैं। जिस ज्ञान को समझने की सबसे अधिक आवश्यकता है, उसी की ओर हमारा ध्यान सबसे कम है।” प्रशांत अद्वैत फाउंडेशन के संस्थापक आचार्य ने कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा महज धार्मिक या सांस्कृतिक विरासत नहीं, बल्कि मानव जीवन, प्रकृति और समाज के बीच संतुलन स्थापित करने वाला एक गहन दर्शन है। आचार्य के अनुसार वेदांत, उपनिषद और भगवद्गीता में निहित शिक्षाएं पर्यावरणीय संकट, मानसिक तनाव, सामाजिक असंतुलन और जीवन संघर्ष का प्रभावी समाधान प्रस्तुत करती हैं। उन्होंने कहा कि केवल तकनीकी उपायों से पर्यावरण संकट का समाधान संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए मनुष्य की सोच, जीवनशैली और चेतना में परिवर्तन आवश्यक है। आचार्य प्रशांत ने कहा कि आधुनिक समाज अक्सर उन परंपराओं को सहजता से स्वीकार करता है जो मनोरंजन, पहचान या सामाजिक सुविधा से जुड़ी हों, जबकि आत्म-जिज्ञासा, आत्मबोध और उपनिषदों के गहन संदेशों को केवल सम्मान के नाम पर किनारे कर दिया जाता है।

ऑक्सफोर्ड, कैम्ब्रिज और यूके संसद में आचार्य प्रशांत ने वेदांत को आधुनिक मानवता के समक्ष उपस्थित चुनौतियों का समाधान देने वाली जीवंत ज्ञान-धारा के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि एनसीआर में एक शिविर के बाद वे दोबारा लंदन रवाना होंगे, जहां लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, किंग्स कॉलेज लंदन सहित कई प्रतिष्ठित संस्थानों में उनके संबोधन हैं।

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