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‘आध्यात्मिक भारत-2047’ कॉन्क्लेव में गूंजा विश्व शांति का संदेश, गौमाता को बनाया जाएगा ‘ग्लोबल पीस एम्बेसडर’

infopost June 15, 2026
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मनोज तिवारी बोले- दूध दे या न दे, गाय की अंतिम सांस तक सेवा करना ही सच्ची भक्ति; गौवंश अखाड़ा ने रखा 101 पॉइंट विजन

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नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में रविवार को गौवंश अखाड़ा द्वारा आयोजित “स्प्रिचुअल कॉन्क्लेव – आध्यात्मिक भारत-2047” में देशभर से आए संतों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, नीति-निर्माताओं और जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में गौमाता के महत्व को पुनर्स्थापित करना तथा उन्हें “विश्व शांति का राजदूत” बनाने के लिए जनजागरण अभियान शुरू करना था।

कार्यक्रम के दौरान गौवंश अखाड़ा ने यह संकल्प लिया कि गौमाता केवल भारतीय आस्था का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि करुणा, सेवा, सह-अस्तित्व और विश्व बंधुत्व का संदेश देने वाली शक्ति हैं। इसी उद्देश्य के साथ उन्हें “ग्लोबल पीस एम्बेसडर” यानी विश्व शांति का राजदूत बनाने की दिशा में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अभियान चलाया जाएगा।

कार्यक्रम में विश्व शांति और सामाजिक सद्भाव का संदेश जन-जन तक पहुंचाने के लिए एक “अखंड मशाल” भी प्रज्वलित की गई। आयोजकों के अनुसार यह मशाल पूरे भारत में भ्रमण करेगी और लोगों को गौसंरक्षण, सेवा और मानवीय मूल्यों के प्रति जागरूक करेगी।

गौवंश अखाड़ा के पीठाधीश्वर श्री गोविंद देव ‘ब्रह्म’ जी ने इस अवसर पर एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए “गोलोक सद्गति महायज्ञ” अभियान की शुरुआत की। उन्होंने बताया कि दुर्घटना, बीमारी या अन्य कारणों से मृत्यु को प्राप्त होने वाली गोमाताओं की आत्मिक शांति और मोक्ष की कामना हेतु देशभर में विशेष महायज्ञ आयोजित किए जाएंगे। इसके लिए एक समर्पित डिजिटल पोर्टल भी लॉन्च किया गया है, जिसके माध्यम से भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी श्रद्धालु इस अभियान से जुड़ सकेंगे।

कार्यक्रम में गौवंश अखाड़ा की अध्यक्ष (चेयरपर्सन) विभा शर्मा ने संगठन का महत्वाकांक्षी “101 पॉइंट विजन” प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि यह विजन केवल गौसंरक्षण तक सीमित नहीं है बल्कि धर्म, पर्यावरण, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, जैविक कृषि और सामाजिक समृद्धि को एक साथ जोड़ने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि गौआधारित अर्थव्यवस्था भारत के आत्मनिर्भर बनने के संकल्प को भी मजबूती प्रदान कर सकती है।

इस अवसर पर उत्तर-पूर्वी दिल्ली से सांसद मनोज तिवारी ने अपने भावुक संबोधन से उपस्थित लोगों का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा, “मेरी मां की उम्र आज 92 वर्ष हो चुकी है, लेकिन वह आज भी स्वयं गाय माता की सेवा करती हैं। मैंने अपने घर में हमेशा यह देखा है कि गाय दूध दे या न दे, वह अपनी अंतिम सांस तक हमारे परिवार का हिस्सा बनी रहती है।”

उन्होंने आगे कहा, “दूध देने वाली गाय की सेवा तो हर कोई करता है, लेकिन जो गाय दूध देना बंद कर दे, उसकी भी उसी श्रद्धा और समर्पण के साथ सेवा की जाए, वही सच्ची भक्ति और वास्तविक गोसेवा है। सेवा कभी स्वार्थ से नहीं होनी चाहिए। गाय के प्रति प्रेम और सम्मान हमारी संस्कृति का मूल तत्व है।”

मनोज तिवारी के इस वक्तव्य को उपस्थित लोगों ने जोरदार तालियों के साथ सराहा। उन्होंने कहा कि गौसेवा केवल धार्मिक विषय नहीं बल्कि मानवीय संवेदनाओं और कर्तव्यबोध का विषय है।

कार्यक्रम में सांसद प्रवेश वर्मा, दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा, अरविंद नागर स्वामी, गुरु उदय भट्ट और श्री रामरतन जी सहित अनेक विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने गौसंरक्षण, भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम का संचालन गौवंश अखाड़ा के मुख्य रणनीतिक सलाहकार एवं अंतरराष्ट्रीय संरक्षक कर्नल मयंक चौबे (सेवानिवृत्त) ने किया, जबकि आयोजन के संयोजक भाई दीपक तंवर रहे। इस दौरान देश के विभिन्न राज्यों से आए संत-महात्माओं, गोसेवकों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे।

गौवंश अखाड़ा ने घोषणा की कि आने वाले समय में इस प्रकार के आध्यात्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों का विस्तार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किया जाएगा। संस्था का उद्देश्य विश्वभर में करुणा, शांति, पर्यावरण संरक्षण और मानवीय मूल्यों का संदेश पहुंचाना है। कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों ने गौवंश अखाड़ा के प्रयासों की सराहना करते हुए संगठन के विजन को अपना समर्थन देने का आश्वासन दिया।

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