Advanced Cardiac Care: मेदांता हॉस्पिटल नोएडा में हार्ट रिद्म डिसऑर्डर और एडवांस कार्डियक केयर पर जागरूकता सत्र आयोजित किया गया। विशेषज्ञों ने एरिदमिया, इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी और आधुनिक हृदय उपचार तकनीकों की जानकारी दी।
Advanced Cardiac Care: हार्ट रिद्म डिसऑर्डर और एडवांस कार्डियक केयर पर चर्चा
इंफोपोस्ट न्यूज/Advanced Cardiac Care
मेदांता हॉस्पिटल नोएडा ने “हार्ट रिद्म डिसऑर्डर और एडवांस कार्डियक केयर” विषय पर एक जागरूकता सत्र का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में अस्पताल के वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट और हार्ट स्पेशलिस्ट्स ने भाग लिया और लोगों को हृदय रोगों की नई तकनीकों, मिनिमली इनवेसिव प्रक्रियाओं तथा आधुनिक उपचार विकल्पों के बारे में जानकारी दी।
कार्यक्रम में विशेष रूप से तेजी से बढ़ रहे हार्ट रिद्म डिसऑर्डर यानी एरिदमिया और एट्रियल फिब्रिलेशन जैसे रोगों पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि समय पर जांच, शुरुआती पहचान, सही उपचार और बेहतर जीवनशैली अपनाकर गंभीर हृदय रोगों से बचाव संभव है।
मरीजों की रिकवरी भी तेजी से
मेदांता हॉस्पिटल नोएडा के डॉक्टरों ने कहा कि इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी, कैथेटर एब्लेशन, एडवांस इमेजिंग और मिनिमली इनवेसिव तकनीकों के कारण अब हृदय रोगों का इलाज पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित, तेज और प्रभावी हो गया है। साथ ही मरीजों की रिकवरी भी तेजी से हो रही है।
कार्यक्रम में मौजूद विशेषज्ञों ने लोगों से नियमित स्वास्थ्य जांच कराने, संतुलित आहार लेने, तनाव कम रखने और शारीरिक गतिविधियों को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की। डॉक्टरों के अनुसार, बदलती जीवनशैली और बढ़ते तनाव के कारण हृदय संबंधी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं, ऐसे में जागरूकता और समय पर उपचार बेहद जरूरी है।
हार्ट रिदम डिसऑर्डर के मुख्य प्रकार
टैकीकार्डिया (Tachycardia): दिल की धड़कन का बहुत तेज़ होना (>100 धड़कन/मिनट)।ब्रैडीकार्डिया (Bradycardia): दिल की धड़कन का बहुत धीमा होना (<60 धड़कन/मिनट)।एट्रियल फाइब्रिलेशन (AFib): दिल की ऊपरी कक्षों का अनियमित रूप से फड़फड़ाना।
हार्ट रिदम डिसऑर्डर (Arrhythmia) हृदय की धड़कन की एक अनियमितता है, जिसमें दिल सामान्य से बहुत तेज़, बहुत धीमा या बेतरतीब ढंग से धड़कता है। यह स्थिति हृदय के विद्युत संकेतों में खराबी के कारण होती है, जिसके प्रमुख लक्षणों में छाती में फड़फड़ाहट, चक्कर आना, या सांस फूलना शामिल है। इसका समय पर निदान और उपचार (दवाएं, पेसमेकर, एब्लेशन) जरूरी है।


