Lok Sabha Elections24: पीएम मोदी के बयानों से अंदाजा लगाया जा रहा है कि 2024 के लोकसभा चुनावों में मोदी की भाजपा का खेल खत्म हो चुका है। आज कल हो यह रहा है कि गोदी मीडिया के चमचे और चमची पीएम मोदी के बंगाल दौरे का बड़ा बखान कर रहे हैं। जबकि बिहार रैली में पीएम मोदी ने अपने भाषण के दौरान ‘मुजरा’ शब्द का इस्तेमाल कर दिया जिससे बवाल हो गया। इसे मोदी जी की बौखलाहट का परिणाम बताया जा रहा है।
Lok Sabha Elections24: किसी भी प्रधानमंत्री ने ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं किया
इंफोपोस्ट डेस्क
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Lok Sabha Elections24: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव प्रचार के लिए बिहार में चुनावी रैलियों के दौरान ‘मुजरा’ शब्द का इस्तेमाल कर दिया, जिस पर बवाल हो गया है। विपक्षी नेता पीएम मोदी के भाषण पर निशाना साध रहे हैं। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने कहा है कि इतिहास में किसी प्रधानमंत्री ने इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं किया है।
उत्तर प्रदेश में एक रैली के दौरान प्रियंका गांधी ने कहा, ‘क्या प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी नहीं बनती कि वह पद की गरिमा को बनाए रखें, पद की मर्यादा रखें। आज जिस तरह से वह (मोदी) बोल रहे हैं, अफसोस की बात ये है कि उनकी असलियत दिखाई देने लगी है। प्रधानमंत्री बौखलाहट में आ गए हैं। वह भूल गए हैं कि देश के प्रतिनिधि हैं और इस तरह के शब्द उनके मुंह से नहीं निकलने चाहिए।’
मोदी की बौखलाहट और बंगाल के निहितार्थ
टीवी न्यूज चैनल चिल्ला चिल्ला कर कह रहे हैं कि मोदी जी ने बंगाल फतह कर लिया है। लेकिन वरिष्ठ पत्रकार अभय दुवे कहते हैं कि अब तक तो यह ड्रामा चल रहा था कि भाजपा का सबसे अच्छा प्रदर्शन उत्तर प्रदेश में होगा। और अब सबसे अच्छा प्रदर्शन की जिम्मेदारी बंगाल पर डाल दी गई है। ऐसा इसलिए है कि उत्तर प्रदेश से सीटों की भरपाई नहीं होने जा रही है। अलबत्ता यूपी में भाजपा को नुकसान ही होने जा रहा है। तभी तो उत्तर प्रदेश से फोकस हटा कर बंगाल पर शिफ्ट कर दिया गया है।
बंगाल की बात करें, तो वहां के बारे में भारतीय जनता पार्टी का मानना है कि ममता बनर्जी के खिलाफ जबरदस्त सत्ता विरोधी लहर है। और इसी का भाजपा को फायदा मिल सकता है। दूसरा तर्क यह है कि ममता पर आसानी से यह आरोप लगाया जा सकता है कि वह मुस्लिम तुष्टीकरण कर रही हैं। इसलिए हिंदुओं में ममता के खिलाफ प्रतिक्रिया सामने आ सकती है। इस संदर्भ में दो अदालती फैसलों का भी जिक्र किया जा रहा है। पहला यह कि मुसलिमों को ओबीसी की सूची में डालने की याचिका को कलकत्ता हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। दूसरा फैसला शिक्षक भर्ती घोटाले के संदर्भ में आया है।
ममता ने हिंदू और मुसलिम दोनों समुदायों को बैलेंस किया
वास्तव में हालात इसके उलट हैं। क्योंकि ममता बनर्जी ने विधान सभा चुनाव के समय ही अंदाजा लगा लिया था कि लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा क्या नाटक करेगी। उस चुनाव में भाजपा ने 200 सीटें हासिल करने का दावा किया था। लेकिन 200 सीटें ममता को मिल गईं। लोकसभा चुनाव में तुष्टीकरण के आरोपों से बचने के लिए ममता ने हिंदू और मुसलिम दोनों समुदायों के लोगों को सरकारी सहायता पहुंचा कर बैलेंस किया।
इसलिए भाजपा बंगाल में हिंदू कार्ड का फायदा नहीं उठा पा रही है। क्योंकि ममता के एक हाथ में हिंदू कार्ड है तो दूसरे हाथ में मुसलिम कार्ड। दूसरी बात यह है कि ममता ने बंगाल की क्षेत्रीय अस्मिता का सवाल उठा दिया है। और इस सवाल को हवा देने में भाजपा ने ही उनकी मदद कर दी है। कारण यह कि भाजपा के पास कोई भी बड़ा बंगाली नेता नहीं है। शुभेंदु अधिकारी और दिलीप घोष के बस की बात नहीं है कि वह ममता का मुकाबला कर पाएं। इसलिए भाजपा की ओर से मोदी, शाह औ नड्डा हिंदी में भीषण भाषण दे आते हैं, लेकिन मतदाताओं पर उसका कोई खास असर नहीं हो पा रहा है।
क्या कहा था पीएम मोदी ने?
Lok Sabha Elections24: प्रधानमंत्री मोदी ने बिहार के काराकाट और पाटलिपुत्र लोकसभा सीटों पर रैलियां कीं और कहा, ‘बिहार वह भूमि है, जिसने सामाजिक न्याय की लड़ाई को एक नई दिशा दी है। मैं इसकी धरती पर घोषणा करना चाहता हूं कि मैं एससी, एसटी और ओबीसी को उनके अधिकारों से वंचित करने और उन्हें मुसलमानों की ओर मोड़ने की इंडी गठबंधन की योजनाओं को विफल कर दूंगा। वे गुलाम बने रह सकते हैं और अपने वोटबैंक को खुश करने के लिए ‘मुजरा’ कर सकते हैं।’
पीएम मोदी के बयान पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट साझा की, जिसमें उन्होंने कहा कि ‘पीएम पद पर बैठे व्यक्ति को ऐसे शब्द शोभा नहीं देते। आज प्रधानमंत्री के मुंह से मुजरा शब्द सुना, मोदी जी ये क्या है? आप कुछ लेते क्यों नहीं? हो सकता है कि धूप में प्रचार करने की वजह से आपके दिमाग पर असर पड़ गया है।’


