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Xi Jinping on Republic Day 2026: शी जिनपिंग का बधाई संदेश एक अलग संकेत!

infopost January 26, 2026
Xi Jinping on Republic Day 2026

Xi Jinping on Republic Day 2026: चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत के 77वें गणतंत्र दिवस पर बधाई संदेश भेजा: भारत-चीन को ‘अच्छे पड़ोसी, मित्र और साझेदार’ बताया। LAC तनाव कम करने के बीच संबंध सुधार का सकारात्मक संकेत। विस्तार से पढ़ें।

Xi Jinping on Republic Day 2026: “अच्छे पड़ोसी, मित्र और साझेदार”

इंफोपोस्ट न्यूजडेस्क/नई दिल्ली/Xi Jinping on Republic Day 2026


चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा 26 जनवरी 2026 को भारत के 77वें गणतंत्र दिवस पर भेजा गया बधाई संदेश, जिसमें भारत और चीन को “अच्छे पड़ोसी, अच्छे मित्र और अच्छे साझेदार” (good neighbours, good friends and good partners) कहा गया है, कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण लेकिन रूटीन से थोड़ा अलग संकेत देता है।

यह वाक्यांश चीनी कूटनीति में पुराना और बार-बार इस्तेमाल होने वाला है। शी जिनपिंग और पूर्व चीनी नेताओं ने इसे पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश जैसे पड़ोसियों के साथ भी प्रयोग किया है। फिर भी, भारत के संदर्भ में इसे 2020 के गलवान संघर्ष के बाद पहली बार इतनी स्पष्टता से दोहराया जाना ध्यान देने योग्य है।

संदेश LAC पर डिसइंगेजमेंट और डी-एस्केलेशन प्रक्रिया के बीच

संदेश LAC पर डिसइंगेजमेंट और डी-एस्केलेशन प्रक्रिया के बीच आया है। 2024-2025 में दोनों देशों ने कई दौर की सैन्य वार्ता की, जिससे डेप्सांग और डेमचोक जैसे इलाकों में कुछ प्रगति हुई। यह बधाई उस प्रक्रिया को राजनीतिक स्तर पर समर्थन देने जैसी लगती है।

शी ने “सहयोग और अवसरों के साझेदार” होने की बात कही, जो आर्थिक और बहुपक्षीय मंचों (BRICS, SCO, G20) पर सहयोग बढ़ाने का संकेत है। हालांकि, भारत ने अभी भी चीनी ऐप्स, निवेश और कुछ सेक्टर्स में प्रतिबंध बनाए रखे हैं।

सकारात्मक संकेत: यह संदेश विश्वास बहाली (confidence-building) का हिस्सा है। दोनों देश जानते हैं कि पूर्ण सामान्यीकरण बिना सीमा समझौते के संभव नहीं, लेकिन यह रुख दिखाता है कि बीजिंग बातचीत जारी रखना चाहती है।

भारत को “दुश्मन” की कैटेगरी से बाहर रखने की कोशिश

रणनीतिक संतुलन: चीन अमेरिका-केंद्रित इंडो-पैसिफिक गठबंधनों (QUAD, AUKUS) के बीच भारत को अलग-थलग नहीं करना चाहता। “मित्र और साझेदार” कहकर वह भारत को “दुश्मन” की कैटेगरी से बाहर रखने की कोशिश कर रहा है।

सीमित अपेक्षाएं: विश्लेषक इसे “डिप्लोमैटिक कोर्टेसी” मानते हैं। वास्तविक प्रगति तब होगी जब:LAC पर स्थायी डिसइंगेजमेंट और पैट्रोल समझौता हो। व्यापार असंतुलन (चीन के पक्ष में बहुत अधिक) पर कोई ठोस कदम उठे। दोनों तरफ से विश्वास-विरोधी कदम (जैसे नक्शे विवाद) कम हों।

संबंध सुधार की दिशा में सकारात्मक लेकिन सतर्क कदम

भारत ने अभी तक आधिकारिक तौर पर बहुत उत्साह नहीं दिखाया। विदेश मंत्रालय आमतौर पर ऐसे संदेशों का “स्वागत” करता है, लेकिन ठोस कार्रवाई पर फोकस रखता है। यह संदेश संबंध सुधार की दिशा में एक सकारात्मक लेकिन सतर्क कदम है। यह तनाव कम करने की प्रक्रिया को राजनीतिक बैकिंग देता है, पर वास्तविक “मित्रता” या “साझेदारी” के लिए अभी लंबा रास्ता बाकी है। दोनों पक्षों को सीमा पर शांति और विश्वास बहाली के ठोस परिणाम दिखाने होंगे, तभी यह शब्द वाक्यांश सिर्फ कागजी नहीं, बल्कि व्यावहारिक साबित होंगे।

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर बधाई संदेश भेजते हुए दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने की बात कही है। उन्होंने भारत को “अच्छे पड़ोसी, मित्र और साझेदार” करार देते हुए वैश्विक शांति एवं विकास के लिए सहयोग की अपील की है। यह संदेश ऐसे समय में आया है जब भारत-चीन सीमा पर तनाव कम करने की दिशा में प्रयास जारी हैं और दोनों देश आर्थिक तथा रणनीतिक स्तर पर संबंध सुधारने की कोशिश कर रहे हैं।

वैश्विक चुनौतियों का सामना संयुक्त रूप से करेंगे भारत और चीन!

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लिखे गए संदेश में कहा, “भारत और चीन अच्छे पड़ोसी, अच्छे मित्र और अच्छे साझेदार हैं।” उन्होंने भारत के लोगों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच संबंधों का विकास न केवल दोनों राष्ट्रों के लिए लाभदायक है, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण है। शी ने उम्मीद जताई कि दोनों पक्ष मिलकर द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे और वैश्विक चुनौतियों का सामना संयुक्त रूप से करेंगे। यह बधाई संदेश चीनी विदेश मंत्रालय और राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा जारी किया गया, जिसे अंतरराष्ट्रीय मीडिया में व्यापक कवरेज मिली।

रॉयटर्स, हिंदुस्तान टाइम्स, द इकोनॉमिक टाइम्स और अन्य प्रमुख समाचार एजेंसियों ने इसे प्रमुखता से प्रकाशित किया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संदेश दोनों देशों के बीच हाल के वर्षों में हुए कूटनीतिक प्रयासों का प्रतिबिंब है, खासकर 2020 के गलवान संघर्ष के बाद शुरू हुए तनाव को कम करने की प्रक्रिया का।पृष्ठभूमि में देखें तो भारत और चीन के बीच सीमा विवाद लंबे समय से चला आ रहा है। 2020 में लद्दाख सेक्टर में हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों ने कई दौर की सैन्य और कूटनीतिक बातचीत की।

कुछ सकारात्मक कदम उठाए गए

Xi Jinping on Republic Day 2026: हाल के महीनों में LAC (लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल) पर डिसइंगेजमेंट और डी-एस्केलेशन के कुछ सकारात्मक कदम उठाए गए हैं। पिछले साल दोनों देशों के विदेश मंत्रियों और रक्षा मंत्रियों की मुलाकातें हुईं, जिनमें संबंध सुधारने पर सहमति बनी। शी जिनपिंग का यह संदेश उसी दिशा में एक और कदम माना जा रहा है।

भारतीय पक्ष से अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने संकेत दिया कि भारत ऐसे सकारात्मक संदेशों का स्वागत करता है और दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली के लिए ठोस कदमों की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गणतंत्र दिवस पर विभिन्न विश्व नेताओं के संदेशों का स्वागत किया है, जिसमें अमेरिका, रूस, फ्रांस, जापान सहित कई देशों के नेता शामिल हैं।

पुराना चीनी कूटनीतिक भाषण

Xi Jinping on Republic Day 2026: विश्लेषकों का कहना है कि शी जिनपिंग का “अच्छे पड़ोसी, मित्र और साझेदार” वाला वाक्यांश पुराना चीनी कूटनीतिक भाषण है, जिसे वे अक्सर पड़ोसी देशों के साथ इस्तेमाल करते हैं। फिर भी, वर्तमान संदर्भ में यह महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों देश BRICS, SCO और G20 जैसे मंचों पर सहयोग करते हैं। आर्थिक मोर्चे पर भी चीन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना हुआ है, हालांकि भारत ने चीनी निवेश और ऐप्स पर कुछ प्रतिबंध लगाए हैं।गणतंत्र दिवस 2026 भारत के लिए खास महत्व रखता है क्योंकि यह ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ का वर्ष है।

कर्तव्य पथ पर भव्य परेड में सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक प्रदर्शन और विकास की कहानी दिखाई गई। ऐसे में शी जिनपिंग का संदेश न केवल कूटनीतिक शिष्टाचार है, बल्कि दोनों एशियाई दिग्गजों के बीच बेहतर भविष्य की उम्मीद भी जगाता है।दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार की राह चुनौतीपूर्ण है, लेकिन ऐसे संदेश से संकेत मिलता है कि बातचीत और सहयोग का रास्ता खुला हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों पक्ष सीमा पर स्थायी शांति सुनिश्चित कर सकें, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय स्थिरता को बड़ा लाभ होगा।

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