Adani summoned!: अमेरिका की SEC ने की गौतम अडानी को समन भेजने की कोशिश। भारत सरकार को बायपास करने का आरोप। जानिए पूरा मामला Infopost News पर।
Adani summoned!: कानूनी प्रक्रिया या कूटनीतिक टकराव?
इंफोपोस्ट न्यूजडेस्क/नई दिल्ली/न्यूयॉर्क/Adani summoned!
अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) ने गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी को समन सर्व करने के लिए एक असामान्य कदम उठाया है। SEC ने न्यूयॉर्क की फेडरल कोर्ट से अनुमति मांगी है कि वह भारत सरकार के माध्यम से पारंपरिक चैनलों को बायपास करते हुए, अडानी को उनके अमेरिकी वकीलों के जरिए या डायरेक्ट ईमेल से समन भेज सके।
यह कदम भारत-अमेरिका के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों के बीच एक नया कानूनी और कूटनीतिक विवाद पैदा कर रहा है।SEC का यह प्रयास नवंबर 2024 में दायर सिविल केस से जुड़ा है, जिसमें गौतम अडानी और सागर अडानी पर आरोप हैं कि उन्होंने Adani Green Energy के $750 मिलियन बॉन्ड इश्यू (2021) में अमेरिकी निवेशकों को गुमराह करने वाली जानकारी दी।
$265 मिलियन की ब्राइबरी स्कीम से संबंधित केस
यह केस अलग है US Department of Justice (DoJ) के क्रिमिनल इंडिक्टमेंट से, जो $265 मिलियन की ब्राइबरी स्कीम से संबंधित है। SEC का दावा है कि अडानी ग्रुप ने सिक्योरिटीज लॉ का उल्लंघन किया, जिससे अमेरिकी निवेशकों को नुकसान हुआ।हालांकि, समस्या सर्विस ऑफ समन में आई। SEC ने हाग सर्विस कन्वेंशन (Hague Convention) के तहत भारत के Law Ministry से दो बार मदद मांगी — पहली बार मई 2025 में और दूसरी दिसंबर 2025 में — लेकिन दोनों बार भारत ने रिजेक्ट कर दिया।
पहली रिजेक्शन का कारण: दस्तावेजों में इंक सिग्नेचर और ऑफिशियल सील की कमी। दूसरी बार भारत ने SEC के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाए और प्रक्रियात्मक मुद्दों का हवाला दिया। SEC की फाइलिंग में कहा गया है कि वह “वर्तमान रूट से सर्विस पूरी होने की उम्मीद नहीं करता”।इस वजह से SEC ने 22 जनवरी 2026 को US कोर्ट से अल्टरनेटिव सर्विस की इजाजत मांगी। अगर कोर्ट मंजूर करता है, तो यह पहला बड़ा मामला होगा जहां अमेरिकी रेगुलेटर भारत जैसे सहयोगी देश की सरकार को दरकिनार कर डायरेक्ट संपर्क करेगा।
अडानी ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट
इस खबर के सामने आने से अडानी ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई। 23 जनवरी को कुल मार्केट कैप में $12.5 बिलियन (करीब ₹1.05 लाख करोड़) की कमी दर्ज की गई। Adani Enterprises 11% तक गिरा, जबकि Adani Green Energy, Adani Ports और अन्य में 5-15% की गिरावट देखी गई। हालांकि, कुछ स्टॉक्स में मामूली रिकवरी भी हुई, लेकिन निवेशकों में अनिश्चितता बनी हुई है।
अडानी ग्रुप ने इन आरोपों को “बेबुनियाद” करार दिया है। कंपनी ने स्टेटमेंट जारी कर कहा, “हम सभी कानूनों का पालन करते हैं और किसी भी जांच में पूरा सहयोग करने के लिए तैयार हैं।” ग्रुप ने पहले भी Hindenburg रिपोर्ट और DoJ केस में आरोपों को खारिज किया और कानूनी रास्ता अपनाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि संप्रभुता का मुद्दा भी है।
मामला राजनयिक स्तर पर चर्चा का विषय
पूर्व राजनयिकों ने कहा कि विदेशी एजेंसी द्वारा किसी भारतीय नागरिक को बिना सरकार के माध्यम से संपर्क करना असहजता पैदा कर सकता है। भारत-अमेरिका रिश्ते QUAD, डिफेंस और टेक्नोलॉजी में मजबूत हैं, लेकिन ऐसे मामले राजनयिक स्तर पर चर्चा का विषय बन सकते हैं। कुछ विश्लेषक इसे भारत की उभरती आर्थिक ताकत को चेक करने की कोशिश बताते हैं, हालांकि कोई ठोस सबूत नहीं है।
भारत सरकार की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन अगर SEC का अल्टरनेटिव सर्विस अप्रूव होता है, तो भारत कूटनीतिक या अंतरराष्ट्रीय फोरम पर अपना पक्ष रख सकता है। यह मामला नजीर बन सकता है कि क्रॉस-बॉर्डर इन्वेस्टमेंट्स और रेगुलेटरी जांचों में देश कैसे डील करेंगे।अभी केस “रिपोर्टिंग स्टेज” में है।
Adani summoned!: कोर्ट का फैसला, डिस्कवरी प्रक्रिया और संभावित ट्रायल आने वाले महीनों में और स्पष्टता लाएंगे। लेकिन यह स्पष्ट है कि गौतम अडानी और SEC का यह विवाद सिर्फ एक उद्योगपति की नहीं, बल्कि वैश्विक कानून, कूटनीति और शक्ति संतुलन की कहानी है। सच क्या है, आने वाला समय बताएगा।


