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Wreck of ‘Montha’: चक्रवात मोंथा ने पूरे दक्षिण भारत को दहलाया

infopost October 29, 2025
Wreck of 'Montha'

Wreck of ‘Montha’: चक्रवात ‘मोंथा’ बंगाल की खाड़ी से उठकर आंध्र प्रदेश के तट पर टकराया और पूरे दक्षिणी भारत को दहला दिया। शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक, कम से कम 12 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से अधिकांश बाढ़ या गिरे पेड़ों के कारण। आंध्र प्रदेश के कृष्णा, गोपलपुरम और ईस्ट गोदावरी जिलों में 50,000 से ज्यादा लोग विस्थापित हो गए। फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है।

Wreck of ‘Montha’: लाखों लोगों की जिंदगी प्रभावित

इंफोपोस्ट न्यूजडेस्क


Wreck of ‘Montha’: बड़ी खबर चक्रवात ‘मोंथा’ के रूप में उभरी है, जो बंगाल की खाड़ी से उठकर आंध्र प्रदेश के तट पर टकराया और पूरे दक्षिणी भारत को दहला दिया। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार, यह गंभीर चक्रवाती तूफान रात 11:30 बजे से 12:30 बजे के बीच काकीनाड़ा के दक्षिण में नरसापुर के निकट तट से गुजरा, जिससे 15 जिलों में तबाही मच गई। हवाओं की रफ्तार 120-150 किमी/घंटा रही, जो बाद में कम हुई, लेकिन भारी बारिश, बाढ़ और बिजली-पानी की कटौती ने लाखों लोगों की जिंदगी प्रभावित कर दी।

यह 2025 की सबसे विनाशकारी प्राकृतिक आपदा है, जो जलवायु परिवर्तन के खतरों को फिर से उजागर कर रही है। चक्रवात ‘मोंथा’ की शुरुआत बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में गहरे अवसाद के रूप में हुई थी। 26 अक्टूबर को यह चक्रवाती तूफान में तब्दील हो गया और 28 अक्टूबर तक गंभीर रूप धारण कर लिया। आईएमडी ने पहले ही 23 जिलों के लिए रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी कर दिया था।

बाढ़ की तस्वीरें वायरल हो गईं

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने 26 अक्टूबर को ही प्रशासनिक मशीनरी को हाई अलर्ट पर डाल दिया था। तूफान के लैंडफॉल के समय काकीनाड़ा और विजाग से पानी की बाढ़ की तस्वीरें वायरल हो गईं, जहां सड़कें नदियों में बदल गईं। ओडिशा के 15 जिलों में भी प्रभाव पड़ा, जहां सामान्य जीवन ठप हो गया। प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (पीटीआई) की वीडियो रिपोर्ट्स में काकीनाड़ा के बाद के दृश्य दिखाए गए, जहां पेड़ उखड़े हुए, घर ढह गए और वाहन बह गए।

प्रभाव की तीव्रता का अंदाजा नुकसान के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, कम से कम 12 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से अधिकांश बाढ़ या गिरे पेड़ों के कारण। आंध्र प्रदेश के कृष्णा, गोपलपुरम और ईस्ट गोदावरी जिलों में 50,000 से ज्यादा लोग विस्थापित हो गए। फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। चावल, केला और मछली पालन क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है।

दो हजार करोड़ रुपये की तत्काल राहत की घोषणा

राज्य सरकार ने 2,000 करोड़ रुपये की तत्काल राहत की घोषणा की, जबकि केंद्र सरकार ने एनडीआरएफ की 10 टीमें तैनात कीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा, “चक्रवात प्रभावितों के साथ खड़े हैं। राहत कार्य तेजी से चल रहे हैं।” आंध्र प्रदेश सरकार ने स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए और ट्रेन-बस सेवाएं प्रभावित हुईं। विजाग से तटीय इलाकों में बाढ़ के कारण मछुआरों को समुद्र से वापस बुलाया गया। सरकार की प्रतिक्रिया त्वरित रही।

मुख्यमंत्री नायडू ने व्यक्तिगत रूप से काकीनाड़ा का दौरा किया और प्रभावित परिवारों को पांच लाख रुपये की सहायता का ऐलान किया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से समीक्षा की। आईएमडी के निदेशक ने बताया कि तूफान अब कमजोर हो रहा है, लेकिन अगले 48 घंटों में भारी बारिश जारी रहेगी।

ओडिशा में 500 करोड़ रुपये का राहत पैकेज घोषित

ओडिशा में नवीन पटनायक सरकार ने 500 करोड़ का राहत पैकेज घोषित किया। एनजीओ जैसे रेड क्रॉस और ऑक्सफैम ने भोजन-पानी वितरण शुरू किया। हालांकि, आलोचना भी हो रही है—कई ग्रामीण इलाकों में राहत पहुंचाने में देरी की शिकायतें आई हैं। जलवायु विशेषज्ञों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी में चक्रवातों की तीव्रता बढ़ रही है, जो ग्लोबल वार्मिंग का परिणाम है। 2025 में यह तीसरा बड़ा चक्रवात है, जो पूर्वी तट को निशाना बना रहा है।

इस आपदा का आर्थिक असर गहरा है। आंध्र प्रदेश की अर्थव्यवस्था, जो कृषि और मत्स्य पालन पर निर्भर है, को अरबों का नुकसान हुआ। बंदरगाह जैसे काकीनाड़ा पोर्ट पर कार्गो हैंडलिंग रुक गई, जिससे निर्यात प्रभावित हुआ है। विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, भारत को प्राकृतिक आपदाओं से सालाना 10 बिलियन डॉलर का नुकसान होता है और ‘मोंथा’ इसे और बढ़ा देगा।

तूफान ने असमानताओं को उजागर किया

Wreck of ‘Montha’: पुनर्वास के लिए लंबे समय की योजना जरूरी है—मजबूत तटीय बांध, जलरोधक फसलें और पूर्व चेतावनी प्रणाली। सामाजिक रूप से, यह तूफान असमानताओं को उजागर करता है। गरीब मछुआरे समुदाय सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं, जहां महिलाओं और बच्चों को सबसे ज्यादा खतरा पहुंचा है। सोशल मीडिया पर #CycloneMontha ट्रेंड कर रहा है, जहां पीड़ितों की मदद के लिए फंडरेजर चल रहे हैं।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शोक व्यक्त किया और कहा, “प्रकृति के प्रकोप से सबको एकजुट होकर लड़ना होगा। “कुल मिलाकर, चक्रवात ‘मोंथा’ न केवल एक प्राकृतिक आपदा है, बल्कि भारत की जलवायु संकट से जूझने की क्षमता की परीक्षा। सरकारें राहत पर फोकस कर रही हैं, लेकिन दीर्घकालिक समाधान जैसे हरित ऊर्जा और सस्टेनेबल डेवलपमेंट जरूरी। यह घटना याद दिलाती है कि विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देनी होगी।

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