Chhath celebrated: प्रवासी महासंघ ने धूमधाम से छठ महापर्व का आयोजन किया। NCR में रहने वाले श्रद्धालुओं ने आयोजन में शिरकत की। डूबते सूर्य को अर्घ देने के बाद सुबह 4 बजे से ही उगते सूर्य को अर्घ देने के लिए नोएडा स्टेडियम पहुंच गए और अस्ताचल गामी एवं उगते सूर्य को अर्घ देकर इस महाव्रत को सम्पन्न किया।
Chhath celebrated: व्रतियों की सुविधा का पूरा ध्यान रखा गया
इंफोपोस्ट न्यूज
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!Chhath celebrated: प्रवासी महासंघ के महासचिव अवधेश राय ने बताया कि कार्यक्रम में व्रतियों की सुविधा का पूरा ध्यान रखा गया एवं छठ घाट में श्रद्धालुओं के लिए चारों तरफ सीढ़ीनुमा घाट बनाया गया था जिससे किसी भी श्रद्धालु को अर्घ देने में परेशानी नहीं हुई।
महासंघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं पूजा संयोजक विकास तिवारी ने बताया कि छठ घाट का आकार 60×120 फ़ीट का बनाया गया था और इस में किसी प्रकार की अव्यस्था न हो इसके लिए हमारे लगभग 100 से अधिक वॉलेंटियर पूरे मेला परिसर में रहे जिन्होंने व्यवस्था को बखूबी संभाला एवं सुरक्षा के लिहाज से ड्रोन कैमरे द्वारा मेला परिसर की निगरानी की गई। 
छठ घाट में गंगा जल के साथ ताज़े गुलाब के फूल
इसके साथ ही छठ घाट में गंगा जल के साथ ताज़े गुलाब के फूल डलवाये गए जिसे श्रद्धा एवं आस्था का विश्वास भक्तों में और बढ़ गया। कार्यकम में संघ के अध्यक्ष आलोक वत्स, कार्यकारी अध्यक्ष टी एन चौरसिया, महासचिव अवधेश राय, कोषाध्यक्ष श्रीमती छाया राय, वरिष्ठ उपाध्यक्ष जीतेन्द्र सिंह उपस्थित रहे।
संस्था के वरिष्ठ पदाधिकारी मिथलेश राय, विकास तिवारी, अखिलेश सिंह, विजय कुमार सिंह, ममता पांडेय, इंदु यादव, सनम यादव, रेखा सिंह, अभिनव पांडेय, अनुज त्रिपाठी, मिथलेश राय, कमलेश तिवारी, आकाश तिवारी, मृत्युंजय त्रिपाठी, राजेश तिवारी, विकास शर्मा, अमन मिश्र, सतरंजन कुमार एवं अन्य सदस्यों ने भी कार्यक्रम में शिरकत की।
सूर्य देव और छठी मैया की उपासना का एक पवित्र पर्व
बता दें कि छठ पूजा, सूर्य देव और छठी मैया की उपासना का एक पवित्र पर्व है, जिसे पूरे उत्साह और धूमधाम से मनाया गया। इस पर्व में लाखों श्रद्धालु घाटों पर एकत्रित होकर अस्त होते और उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। यह पर्व प्रकृति और जीवन के लिए सूर्य के महत्व को दर्शाता है, जिसमें परिवार की सुख-समृद्धि और संतान की लंबी उम्र की कामना की जाती है।
सूर्य देव को जीवन का स्रोत माना जाता है और उनकी कृपा के लिए आभार व्यक्त किया जाता है। छठी मैया की पूजा संतान की लंबी उम्र और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए की जाती है। यह पर्व प्रकृति और उसके विभिन्न रूपों की पूजा का प्रतीक है, जो प्रकृति के प्रति सम्मान व्यक्त करता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाभारत में कर्ण ने सूर्य की उपासना के बाद अपने दानवीर होने का फल प्राप्त किया था। माता सीता ने भी त्रेतायुग में सूर्य की उपासना की थी।


