winter session: संसद के शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन राज्यसभा चेयरमैन इतने आहत हो गए कि उन्हें कहना पड़ा कि गिरावट की कोई हद नहीं है। लेकिन विपक्षी नेता एक दूसरे प्रकार की गिरावट की बात कर रहे हैं।
winter session: अब तक 141 सदस्य संसद से बाहर
इंफोपोस्ट डेस्क
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!winter session: संसद सुरक्षा चूक की घटना को लेकर सोमवार को विपक्षी सांसदों ने संसद के दोनों सदनों में हंगामा किया था। लोकसभा और राज्यसभा से 78 विपक्षी सदस्यों को निलंबित कर दिया गया। इससे पहले 14 सांसदों को निलंबित किया जा चुका है। मंगलवार को 49 और सांसदों पर कार्रवाई हुई। अब तक 141 विपक्षी सदस्यों को निलंबित किया जा चुका है।
इसी को लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि यह सरकार सही बात सुनना नहीं चाहती है। भाजपा से यह पूछना चाहिए कि वे लोकतंत्र का मंदिर बोलते हैं। हम सब अपने भाषणों में लोकतंत्र का मंदिर कहते हैं। ये किस मुंह से इसे लोकतंत्र का मंदिर कहते हैं, जब ये विपक्ष को बाहर कर रहे हैं। अगर ये दूसरी बार सरकार में आ गए तो यहां बाबासाहेब अंबेडकर का संविधान नहीं बचेगा।
‘लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए यह दुर्भाग्यपूर्ण’
विपक्षी सांसदों के निलंबन पर सपा सांसद डिंपल यादव ने सरकार पर सवाल उठाए और कहा कि यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। जो वातावरण हम देख रहे हैं, जहां हम संसद में अपनी बात नहीं रख पा रहे हैं वह सरकार की विफलता को दर्शाता है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष फारुख अब्दुल्ला ने गृह मंत्री अमित शाह से सवाल पूछा और कहा कि पुलिस किसके हाथ में है? वह गृह मंत्रालय के अधीन है। क्या हो जाता अगर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह संसद में आकर 5 मिनट बयान दे देते और कह देते कि हम कार्रवाई कर रहे हैं।
लोकसभा में केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि सदन के अंदर तख्तियां न लाने देने का निर्णय किया गया। हाल के चुनाव हारने के बाद हताशा के कारण ऐसे कदम उठाए जा रहे हैं। यही कारण है कि हम सांसदों को निलंबित करने का प्रस्ताव ला रहे हैं।
तानाशाही रवैया करार दिया
कुछ पत्रकारों ने विपक्षी सांसदों के निलंबन को तानाशाही रवैया करार दिया है। उनका कहना है कि एक सांसद को बचाने के लिए इतनी बड़ी संख्या में सांसदों को सदन से बाहर किया जा रहा है। मामला संसद की सुरक्षा का है। सदन में दो युवकों के प्रवेश का है। संसद में स्मॉग बम छोड़ने का है।
विपक्ष इसी मुद्दे पर बयान की मांग पर अड़ा है। पत्रकार अशोक वानखेड़े कहते हैं, एक सांसद जिसने युवकों को संसद का पास जारी किया, इतना महत्वपूर्ण नहीं है कि उसके लिए पूरे विपक्ष को सदन से बाहर कर दिया जाए। आज जो कुछ भी लोकसभा और राज्यसभा में दिख रहा है, वही असली गुजरात मॉडल है, जिसे तानाशाही रवैया कहा जाता है।


