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Wedding Industry GST Relief: टेंट-बैंक्वेट कारोबारियों ने मांगी GST राहत

infopost September 18, 2026
Wedding Industry GST Relief

Wedding Industry GST Relief: ग्रेटर नोएडा में महाधिवेशन से पहले कारोबारियों ने उद्योग का दर्जा, GST राहत और कारोबार से जुड़े नियमों में बदलाव की मांग उठाई।

Wedding Industry GST Relief: टेंट और वेडिंग कारोबार को उद्योग का दर्जा नहीं 

इंफोपोस्ट/Wedding Industry GST Relief


ग्रेटर नोएडा में टेंट, बैंक्वेट हॉल, फार्म हाउस, कैटरिंग और वेडिंग इंडस्ट्री से जुड़े कारोबारियों ने केंद्र और प्रदेश सरकार के सामने अपनी मांगें रखी हैं। 19 और 20 सितंबर को गोल्डन ड्रीम विस्टा, ग्रेटर नोएडा में होने वाले महाधिवेशन से पहले शुक्रवार को नोएडा मीडिया क्लब में प्रेस वार्ता आयोजित की गई।

कारोबारियों ने कहा कि टेंट और वेडिंग कारोबार से बड़ी संख्या में लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलता है, लेकिन इसके बावजूद इस क्षेत्र को अभी तक उद्योग का दर्जा नहीं मिला है। संगठन ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार से कारोबार को सुविधाजनक बनाने के लिए नीतिगत स्तर पर कई बदलाव करने की मांग की है।

टेंट कारोबार के लिए अलग व्यवस्था की मांग

प्रदेश सरकार से टेंट का सामान ले जाने वाले वाहनों को नो-एंट्री व्यवस्था से छूट देने की मांग की गई है। कारोबारियों का कहना है कि कार्यक्रमों से जुड़े सामान को निर्धारित समय पर आयोजन स्थल तक पहुंचाना जरूरी होता है, इसलिए परिवहन व्यवस्था में व्यावहारिक राहत मिलने से कारोबार को सुविधा होगी।

बैंक्वेट हॉल और फार्म हाउस को सराय एक्ट के दायरे से बाहर रखने की मांग भी सामने रखी गई। कारोबारियों के अनुसार इन स्थानों का मुख्य इस्तेमाल शादी-विवाह और सामाजिक आयोजनों के लिए होता है, न कि लोगों को स्थायी रूप से ठहराने के लिए। इसलिए उनका तर्क है कि सराय एक्ट से जुड़ी औपचारिकताओं को इस कारोबार की प्रकृति के अनुरूप देखा जाना चाहिए।

रियायती भूखंड और ‘टेंट नगर’ का सुझाव

कारोबारियों ने नए विकसित क्षेत्रों में टेंट, बैंक्वेट हॉल, फार्म हाउस, कैटरिंग और इवेंट कारोबार के लिए रियायती दरों पर भूखंड उपलब्ध कराने की मांग की। साथ ही यूपीएसआईडीसी के प्लॉटों को फ्रीहोल्ड करने का सुझाव भी दिया गया है।

संगठन ने ऐसे कारोबार के लिए अलग से ‘टेंट नगर’ विकसित करने का प्रस्ताव रखा। कारोबारियों का कहना है कि एक निर्धारित क्षेत्र में इस तरह की गतिविधियों को विकसित करने से कारोबारियों को जरूरी सुविधाएं मिल सकती हैं और संबंधित सेवाओं के लिए बेहतर कारोबारी ढांचा तैयार किया जा सकता है।

GST में बदलाव की प्रमुख मांग

केंद्र सरकार से सेवा प्रदाताओं के लिए GST पंजीकरण की सीमा बढ़ाने की मांग की गई। कारोबारियों ने सामान्य राज्यों में यह सीमा 20 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये और विशेष राज्यों में 10 लाख से बढ़ाकर 25 लाख रुपये करने का सुझाव दिया।

कंपोजिशन स्कीम की सीमा 50 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 करोड़ रुपये करने और कर की दर 6 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत करने की मांग भी रखी गई। इसके अलावा वेडिंग सेवाओं पर लागू 18 प्रतिशत GST को तर्कसंगत बनाने की मांग करते हुए 5 प्रतिशत बिना ITC या 18 प्रतिशत ITC सहित विकल्प देने का सुझाव दिया गया।

ई-वे बिल में बदलाव की भी मांग

कारोबारियों ने सरकारी विभागों से भुगतान प्राप्त होने के बाद GST जमा करने की व्यवस्था लागू करने की मांग की। दूसरे राज्यों में काम करने के दौरान इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी ITC से जुड़ी समस्याओं को दूर करने और वेडिंग इंडस्ट्री को औपचारिक रूप से उद्योग का दर्जा देने की मांग भी उठाई गई।

ई-वे बिल व्यवस्था में भी टेंट कारोबार की प्रकृति के अनुसार बदलाव का सुझाव दिया गया। कारोबारियों के मुताबिक टेंट का सामान कई बार बिक्री के लिए नहीं, बल्कि किसी कार्यक्रम में इस्तेमाल के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाया जाता है। ऐसे में मौजूदा व्यवस्था में कारोबारियों को व्यावहारिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

प्रेस वार्ता में अध्यक्ष अशोक चावला, वरिष्ठ उपाध्यक्ष अरुण शर्मा, महामंत्री अभिलेश वर्मा, कोषाध्यक्ष महेश गुप्ता, संयुक्त महामंत्री मुकेश त्यागी, उपाध्यक्ष मुकेश सिंगल, युवा कोषाध्यक्ष पश्चिम क्षेत्र विनोद पाल, नोएडा अध्यक्ष जगदीश नागर, नोएडा महामंत्री विनोद शर्मा और नोएडा कोषाध्यक्ष प्रवीण चौहान समेत संगठन के अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

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