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  • आलेख

मोतिहारी में जल संरक्षण की मुहिम को आगे बढ़ाने आया सिटीजन फोरम

ohm verma September 4, 2023
save water:

शहर के बलुआ चौक स्थित होटल के सभागार में आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने रखे विचार

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इंफोपोस्ट संवाददाता, मोतिहारी। water conservation: 


चंपारण क्षेत्र में भूजल स्तर लगातार गिरता जा रहा है। यह स्थिति तब है जब यहां कई नदियां हैं और लगभग औसत बारिश हो रही है। फिर भी विगत दो वर्षों से समस्या विकराल और चिंतनीय बनी हुई है। सिटीजन फोरम ऑफ मोतिहारी के तत्वावधान में रविवार शाम को बलुआ चौक स्थित होटल के सभागार में “गिरता भू-जल स्तर- एक गंभीर चुनौती” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन हुआ। इसमें वक्ताओं ने जलस्तर घटने पर चिंता जताई। साथ ही इसके निदान के बारे में खुल कर चर्चा की।

संगोष्ठी की अध्यक्षता, सिटीजन फोरम अध्यक्ष बीरेंद्र जालान ने की। महासचिव राम भजन के द्वारा विभिन्न वक्ताओं के विचार अंकित किए जा रहे थे। संगोष्ठी में फोरम के मुख्य संरक्षक सदस्य श्रीप्रकाश चौधरी ने संगठन के सभी सदस्यों का स्वागत किया। संगोष्ठी संयोजक इंजीनियर अजय कुमार आजाद द्वारा विषय प्रवेश करते हुए स्थिति की गंभीरता एवं संगोष्ठी के आयोजन का औचित्य रखा गया।

save water:

समस्या का मुख्य कारण वर्षा की कमी : राकेश रंजन

water conservation:  संगोष्ठी में विशेषज्ञ वक्ता के रूप में एलएनडी कॉलेज के जियोग्राफी विभाग के विभागाध्यक्ष राकेश रंजन कुमार ने कहा कि इस समस्या का मुख्य कारण वर्षा की कमी एवं प्रकृति द्वारा प्रदत्त जल जैसे महत्वपूर्ण संसाधन का संरक्षण नहीं होना है। उन्होंने प्लास्टिक और अवशिष्ट कचरा के परत दर परत धरती पर जमे होने के कारण धरती के अंदर जल नहीं जा पाने की बात कही। उन्होंने जल के संरक्षण एवं नहीं गलने वाले अवशिष्ट के प्रबंधन को भी जरूरी बताया।

तो प्रकृति भी हम पर कब्जा करेगी : गंगवार

समारोह के दूसरे विशिष्ट वक्ता अंशु गंगवार, मृदा एवं जल अभियांत्रिकी वैज्ञानिक जल की आवश्यकता एवं इसकी आपूर्ति के बढ़ते अंतर को स्पष्ट करते हुए कहा कि जब हम जल का प्रबंध कर लेंगे तो अपने आप जल का संरक्षण हो जाएगा। वैज्ञानिक गंगवार ने उदाहरण दिया कि जब हम तालाब और कुएं पर अतिक्रमण कर लेंगे तो प्रकृति भी हम पर कब्जा करेगी।

उन्होंने वर्ष का पानी का संरक्षण नहीं किए जाने से इसे समुद्र में बह जाने की बात रखी जिससे पृथ्वी का जल स्तर नीचे जा रहा है। उन्होंने नगर निगम द्वारा बड़े भूखंडों के निर्माण के दौरान वर्षा के पानी संरक्षण के उपाय जरूरी किए जाने को आवश्यक बताया। अगर हमने समय रहते उपाय नहीं किया तो 2025-30 तक यह समस्या और विकराल होगी।

save water:

सिंचाई पर सबसे ज्यादा पानी खर्च : आनंद कुमार

water conservation:  संगोष्ठी के मुख्य वक्ता आनंद कुमार फसल उत्पादन वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केंद्र ने आंकड़े देते हुए बताया कि पृथ्वी पर उपलब्ध जल संसाधन का मात्र 4% हिस्सा पीने योग्य है। उस जल का 70% हिस्सा सिंचाई 18% उद्योग और मात्र 9% घरेलू इस्तेमाल में आता है। अर्थात सबसे ज्यादा जल सिंचाई पर खर्च होता है, उसे बचाए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि एक हेक्टर खेत में धान की खेती करने पर एक करोड़ लीटर पानी खर्च होता है, अगर हम नई तकनीक का प्रयोग करें तो 30 से 40% जल की बचत कर सकते हैं। उन्होंने धान की सीधी बुवाई और शून्य जुताई के तरीके पर जन जागरण की बात कही।

सामाजिक संगठनों का प्रेशर ग्रुप बने : अंसारी

water conservation:  संगोष्ठी में विशेष अतिथि के रूप में आए पर्यावरण विशेषज्ञ अजहर हुसैन अंसारी ने प्रकृति के शोषण की बात कहते हुए सामाजिक संगठनों का एक प्रेशर ग्रुप बनाने की सलाह दी ताकि अधिकारियों और सरकार पर दबाव डाला जा सके। उन्होंने कहा कि तालाबों और कुओं का जीर्णोद्धार अधिकतर सिर्फ कागजों पर हुआ है।

save water:

कार्यक्रम में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका

इस महत्वपूर्ण विषय पर लायंस क्लब कपल के अध्यक्ष अंगद कुमार सिंह आर्य विद्यापीठ के रणजीत कुमार, इस चंपारण लायंस क्लब के अध्यक्ष सुजीत कुमार सिंह, एवं अनिल कुमार वर्मा भारत विकास परिषद के डॉक्टर सच्चिदानंद पटेल, मोतिहारी चेंबर के हेमंत कुमार आलोक कुमार , आदित्य सिंह मनमोहन शर्मा, मेहुल लाल, चंपारण नागरिक मंच के अध्यक्ष विनोद दुबे एवं प्रणव प्रियदर्शी, तथा अरेराज से पधारे आयाम के पदाधिकारी एवं स्वच्छता प्रहरी विजय अमित ने अपने-अपने अनुभव और विचार प्रस्तुत किया। संगोष्ठी में मारवाड़ी युवा मंच के अध्यक्ष विपुल जालान, अभिषेक केडिया, भारत विकास परिषद के अध्यक्ष डॉ उत्तम कुमार, डॉ सच्चिदानंद पटेल, सिटीजन फोरम के सुधीर कुमार गुप्ता, इंजीनियर मुन्ना कुमार, राय रोहित शर्मा इत्यादि नागरिकों की भी भूमिका रही।

सिटीजन फोरम उपाध्यक्ष बिंटी शर्मा ने सबों को सहभागिता हेतु धन्यवाद दिया। इस संगोष्ठी में प्राप्त विभिन्न मुद्दों और सुझावों को, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल, केंद्र और राज्य सरकार, जिला पदाधिकारी, नगर निगम और सभी समाजसेवी संगठन को विस्तृत रिपोर्ट बनाकर प्रेषित किया जाएगा।

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