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Sheroes Hangout: शीरोज कैफे और छाँव फाउंडेशन की कहानी

infopost June 30, 2026
Sheroes Hangout

Sheroes Hangout: तेजाब हमले की एक बूंद सिर्फ चेहरा नहीं जलाती, वह पहचान, आत्मविश्वास और सामाजिक जीवन को भी पिघला देती है। इसी अंधेरे को रोशनी में बदलने का नाम है, शीरोज हैंगआउट और छाँव फाउंडेशन। यह कहानी सिर्फ कैफे की नहीं, उन सैकड़ों महिलाओं के फिर से मुस्कुराने की है जिन्हें समाज ने ‘पीड़िता’ कहकर किनारे कर दिया था।

Sheroes Hangout: करुणा से शुरू हुआ क्रांतिकारी आंदोलन

Sheroes Hangout: वर्ष 2013 में पत्रकारिता की पृष्ठभूमि से आए आलोक दीक्षित और आशीष शुक्ला ने छाँव फाउंडेशन की नींव रखी। ‘स्टॉप एसिड अटैक्स’ अभियान से शुरू हुई यह मुहिम सिर्फ विरोध-प्रदर्शन तक सीमित नहीं रही। इसका लक्ष्य था कि सर्वाइवर्स को चिकित्सा, कानूनी लड़ाई, शिक्षा और सबसे अहम, आर्थिक स्वावलंबन देना।

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राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के अनुसार, 2023 में 207 मामले दर्ज किये गए, जो वर्ष 2021 में 176 मामलों से अधिक हैं। जहाँ आधिकारिक आँकड़े सैकड़ों में हैं, वहीं एसिड सर्वाइवर्स ट्रस्ट इंटरनेशनल (ASTI) का अनुमान है, कि भारत में प्रतिवर्ष लगभग 1,000 हमले होते हैं, जिन्हें सामाजिक कलंक और प्रतिशोध के डर के कारण दबा दिया जाता है। हर संख्या के पीछे एक टूटी हुई दुनिया थी, जिसे छाँव फाउंडेशन ने फिर से बसाने का संकल्प लिया है।

जहां मेज नहीं, मिसालें परोसी जाती हैं

2014 में आगरा में पहला शीरोज कैफे खुला देश का पहला ऐसा कैफे जिसे पूरी तरह तेजाब हमले से उबरी महिलाएं चलाती हैं। यहाँ ‘She + Heroes’ सिर्फ नाम नहीं, दर्शन है। वेटर्स से मैनेजर तक, हर भूमिका में एक नायिका है। शुरुआत ‘Pay What You Want’ मॉडल से हुई, क्योंकि अधिकतर महिलाएं रेस्तरां का काम सीख रही थीं। आज फिक्स मेन्यू के साथ इंग्लिश, कंप्यूटर और हैंडीक्राफ्ट की क्लास भी चलती हैं।

आज लखनऊ, नोएडा, दिल्ली और पुणे तक पहुँच गया है। जून 2026 में पुणे के विमान नगर में कैफे का उद्घाटन ‘शीरोज़ फेस्टिवल 2026’ के साथ हुआ, जहाँ जाकिर खान, प्रिया मलिक, राहीगर जैसे कलाकारों ने शिरकत की। आलोक दीक्षित कहते हैं, “महाराष्ट्र में पिछले एक दशक में करीब 50 हमले हुए, लेकिन सर्वाइवर-नेतृत्व वाला पुनर्वास तंत्र नहीं था। पुणे सेंटर इसी खालीपन को भरने आया है”।

क्या हैं एसिड अटैक के कारण?

एक अध्ययन से पता चला है कि एसिड अटैक के 78 फीसदी मामले शादी के प्रस्ताव को अस्वीकार करने या रोमांटिक रिश्ते में प्रवेश करने से इनकार करने के होते हैं। दहेज के भी कई मामले सामने आते हैं। इसके अलावा, द लॉजिकल इंडियन की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 40% हमले असंबंधित लोगों द्वारा, व्यापार प्रतिद्वंद्विता, बिक्री विवाद, भूमि विवाद, या परिवारों के बीच प्रतिशोध के कारण हुए हैं। वहीं एसिड हमलों में, 36% पीड़िता ऐसी होती हैं जिन्होंने किसी के शादी के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया हो।

बदलाव की चार मंजिले : इलाज से नेतृत्व तक

1.गरिमा की वापसी: हमले के बाद अधिकतर महिलाएं शर्म और ट्रॉमा के कारण घरों में कैद हो जाती हैं। कई पर अपनों ने ही हमला किया था। छाँव उन्हें सर्जरी, काउंसलिंग और कानूनी मदद देता है।

2.हुनर से हुनरमंद तक: कैफे के अलावा रेडियो, डिज़ाइन, कंटेंट क्रिएशन में ट्रेनिंग देकर रोज़गार के नए रास्ते खोले गए। 2026 तक फाउंडेशन 100+ सर्वाइवर्स तक पहुंच चुका था।

3. पीड़िता से प्रेरिका: ग्राहकों से रोज़ का संवाद इन महिलाओं के आत्मविश्वास को सीमेंट करता है। अंशु राजपूत जैसी सर्वाइवर्स अब नई महिलाओं की काउंसलर बन चुकी हैं।

4. संवेदना का विस्तार: चार-दिवसीय शीरोज़ फेस्टिवल कहानी, कविता, संगीत और संवाद के ज़रिए समाज को झकझोरता है।

आलोक दीक्षित: आंदोलन के पीछे का अदृश्य चेहरा

‘स्टॉप एसिड अटैक्स’ के संयोजक आलोक दीक्षित मानते हैं कि पुनर्वास का मतलब सिर्फ नौकरी नहीं, नेतृत्व देना है। कोरोना काल में उन्होंने लिखा था कि शीरोज की महिलाएं ही दूसरों के लिए सबसे अधिक करुणा दिखा रही हैं। उनके लिए हर सर्वाइवर एक संभावित चेंज मेकर है।

शीरोज टीवी अब स्क्रीन पर भी

Sheroes Hangout: छाँव अब डिजिटल दुनिया में ‘शीरोज़ टीवी’ के ज़रिए कदम रख चुका है। यहां सर्वाइवर्स खुद एंकर, स्क्रिप्ट राइटर और एडिटर हैं। यह पहल बताती है कि स्वावलंबन की कोई सीमा नहीं होती।

छाँव फाउंडेशन को 2017 में नारी शक्ति पुरस्कार मिला, पर असली पुरस्कार वह पल है जब कोई ग्राहक कहता है। “आपकी मुस्कान सबसे खूबसूरत है।” नोएडा से पुणे तक फैले शीरोज कैफे यह साबित करते हैं कि सहानुभूति नहीं, सम्मान चाहिए। यह सिर्फ पुनर्वास नहीं, सामाजिक सोच की री-डिजाइनिंग है, जहां ‘एसिड अटैक सर्वाइवर’ की जगह ‘शीरोज’ लिखा जाता है।

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