US Israel Iran war 2026: ईरान-अमेरिका-इज़राइल युद्ध का 7वां दिन: अमेरिका-इज़राइल ने B-52 से तेहरान पर भारी बमबारी की। ईरान ने खोर्रमशहर मिसाइल और ड्रोन अटैक किए। अब तक 1300+ मौतें। होर्मुज संकट से भारत को रूसी तेल छूट मिली। ट्रंप ने ईरान के नए लीडर चयन में भूमिका मांगी। लेटेस्ट अपडेट्स।
US Israel Iran war 2026: पूरे मिडिल ईस्ट को हिला रही है जंग
इंफोपोस्ट न्यूजडेस्क/US Israel Iran war 2026
ईरान-अमेरिका-इज़राइल युद्ध 7वें दिन में प्रवेश कर चुका है। स्थिति तेजी और खतरनाक रूप से बिगड़ती जा रही है। पिछले 28 फरवरी को शुरू हुई संयुक्त अमेरिकी-इज़राइली सैन्य कार्रवाई को अमेरिका ने Operation Epic Fury और इज़राइल ने Operation Lion’s Roar नाम दिया है। कार्रवाई अब पूरे मिडिल ईस्ट को हिला रही है।
ईरान के नेतृत्व, बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम, न्यूक्लियर सुविधाओं और IRGC (इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) के ठिकानों पर प्री-एम्प्टिव स्ट्राइक्स के रूप में शुरू हुई यह जंग अब एक पूर्ण युद्ध में बदल चुकी है। क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभाव पड़ रहे हैं। युद्ध के इस चरण में अमेरिका और इज़राइल ने अपनी एयर स्ट्राइक्स को और तेज कर दिया है।
ईरान के गहरे भूमिगत मिसाइल साइटों पर बमबारी
B-52 बॉम्बर्स के साथ-साथ B-2 स्पिरिट स्टेल्थ बॉम्बर्स ने भी ईरान के गहरे भूमिगत मिसाइल लॉन्चरों और बैलिस्टिक मिसाइल साइटों पर दर्जनों 2,000-पाउंड बम गिराए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, इन हमलों से ईरान की मिसाइल लॉन्च क्षमता में 90% तक कमी आई है।
तेहरान में भारी बमबारी हुई, जहां कई IRGC सुविधाएं, मिसाइल प्रोडक्शन सेंटर (जैसे खोजीर क्षेत्र) और अन्य सैन्य ठिकाने निशाना बने। इज़राइल ने भी तेहरान और अन्य शहरों पर नई लहरें भेजीं, जिसमें हवाई रक्षा प्रणालियों को पूरी तरह नष्ट करने का दावा किया गया है।
ईरान की ओर से जवाबी कार्रवाई भी उग्र
ईरान की ओर से जवाबी कार्रवाई भी उग्र रही है। तेहरान ने खोर्रमशहर-4 (Khorramshahr-4) बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया, जिनमें क्लस्टर मुनिशन वारहेड शामिल थे। ये मिसाइलें इज़राइल पर दागी गईं, खासकर तेल अवीव एयरपोर्ट और अन्य सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया।
इज़राइल के एयर डिफेंस सिस्टम (जैसे आयरन डोम और एरो) ने अधिकांश को रोक लिया, लेकिन कुछ प्रभाव पड़े। ईरान ने दावा किया कि उसने इज़राइल पर सफल हमले किए। इसके अलावा, ईरान ने अपने प्रॉक्सी ग्रुप्स और डायरेक्ट अटैक्स के जरिए गल्फ देशों पर हमले तेज किए। कुवैत के अल-सलेम एयर बेस (अमेरिकी बेस) पर शाहेद ड्रोन्स से हमला, जहां सैकड़ों अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं।
बहरीन, सऊदी अरब, UAE और कतर में भी अटैक्स
बहरीन, सऊदी अरब, UAE और कतर में भी ड्रोन और मिसाइल अटैक्स रिपोर्ट हुए। ईरान ने अजरबैजान पर ड्रोन अटैक किया, जिससे संघर्ष मिडिल ईस्ट से बाहर फैलने की आशंका बढ़ गई। ईरान ने एक अमेरिकी ऑयल टैंकर और एक “ड्रोन कैरियर शिप” (WWII एयरक्राफ्ट कैरियर जितना बड़ा) को भी निशाना बनाया, जिसके बाद वह जल रही है। ईरान में अब तक की मौतें 1,300 से अधिक बताई जा रही हैं।
इनमें सैन्य और नागरिक दोनों शामिल हैं। ईरानी अधिकारियों का आरोप है कि अमेरिका-इज़राइल ने जानबूझकर स्कूल, अस्पताल और सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया। सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान में इंटरिम लीडरशिप काउंसिल बनाई गई है, लेकिन अस्थिरता बढ़ रही है। इस युद्ध का वैश्विक असर भी गहरा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव से शिपिंग ठप
होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव से शिपिंग लगभग ठप हो गई, जिससे ग्लोबल ऑयल सप्लाई प्रभावित हुई। अमेरिका ने भारत को रूसी तेल खरीदने की 30 दिन की अस्थायी छूट (waiver) दी, ताकि भारतीय रिफाइनर्स समुद्र में फंसे रूसी क्रूड को खरीद सकें। यह छूट 4 अप्रैल तक वैध है। साथ ही, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा ने भारत को अतिरिक्त गैस सप्लाई का ऑफर दिया।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर सवाल उठाया कि यह संप्रभुता पर हमला है और भारत की ऊर्जा सुरक्षा खतरे में है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विवादास्पद बयान दिया कि ईरान के अगले सुप्रीम लीडर के चयन में अमेरिका की भूमिका होनी चाहिए। उन्होंने खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को “अनअकseptable” और “लाइटवेट” बताया, कहा कि अमेरिका ऐसा लीडर चाहता है जो “शांति और सद्भाव” लाए, न कि अमेरिका या उसके सहयोगियों को खतरा।
युद्ध अब क्षेत्रीय युद्ध बनने के कगार पर
US Israel Iran war 2026: ट्रंप ने रेजा पहलवी (पूर्व शाह के बेटे) को भी पूरी तरह खारिज नहीं किया, लेकिन स्पष्ट योजना नहीं बताई। यह युद्ध अब क्षेत्रीय युद्ध बनने के कगार पर है—यूरोपीय देश (ब्रिटेन, इटली, फ्रांस आदि) ने अपने जहाज और जेट्स मिडिल ईस्ट भेजे हैं।
NATO ने टर्की की ओर मिसाइलों को रोका। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यह “अट्रिशन वॉर” में बदल सकता है, जो पिछले 25 सालों के मिडिल ईस्ट युद्धों से बड़ा हो सकता है। स्थिति तेजी से बदल रही है—तेहरान में विस्फोट, गल्फ में हमले और वैश्विक ऊर्जा संकट जारी है।


