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Talibani Cabinet: दूर नहीं हुई अमेरिका की चिंता

September 8, 2021
Talibani Cabinet

Talibani Cabinet: सत्ता का चरित्र वैसे भी आम आदमी पर भारी साबित होता रहा है। लेकिन जब यही सत्ता किसी आतंकी के हाथ में चली जाए तो खतरे का अंदाजा भी लगाना कठिन हो जाता है।

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Talibani Cabinet: तालिबानी सरकार की कैबिनेट से चिंता में दुनिया

इंफोपोस्ट न्यूज

Talibani Cabinet: हम बात कर रहे हैं अफगानिस्तान की। जहां अंतरिम सरकार का गठन हो गया है। तभी तो सारी दुनिया अफगानिस्तान सरकार की कैबिनेट से चिंतित है। क्योंकि वहां का प्रधानमंत्री वैश्विक आतंकी, गृहमंत्री मोस्ट वांटेड।

ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि तालिबान सरकार को दुनिया कैसे मान्यता दे पाएगी? तालिबान ने वैश्विक आतंकी मुल्ला हसन अखुंद को इस्लामिक अमीरात का प्रधानमंत्री नियुक्त किया है। मुल्ला अब्दुल गनी बरादर कार्यवाहक उप प्रधानमंत्री बनाए गए हैं।

मुल्ला उमर के बेटे मुल्ला याकूब को रक्षा मंत्री बनाया गया है। अमेरिका के मोस्ट वॉन्टेड आतंकी को तालिबान सरकार में अफगानिस्तान का गृह मंत्री बनाया गया है।

वैश्विक आतंकियों की नियुक्ति

तालिबान सरकार में नंबर एक और दो पद पर वैश्विक आतंकियों की नियुक्ति से दुनिया में तहलका मचा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इन दोनों प्रतिबंधित आतंकियों के प्रमुख पदों पर रहते कोई भी देश तालिबान सरकार को मान्यता कैसे दे सकता है।

अफगानिस्तान का गृह मंत्री या आंतरिक मंत्री बना सिराजुद्दीन हक्कानी अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई की हिटलिस्ट में शामिल है। अमेरिकी सरकार ने तो बाकायदा इस आतंकी के ऊपर 5 मिलियन डॉलर यानी करीब 36 करोड़ रुपये का इनाम भी रखा है। पिता जलालुद्दीन हक्कानी की मौत के बाद सिराजुद्दीन हक्कानी, हक्कानी नेटवर्क की कमान संभाले हुए है।

हक्कानी समूह

हक्कानी समूह पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा पर तालिबान की वित्तीय और सैन्य संपत्ति की देखरेख करता है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि हक्कानी ने ही अफगानिस्तान में आत्मघाती हमलों की शुरुआत की थी। हक्कानी नेटवर्क को अफगानिस्तान में कई हाई प्रोफाइल हमलों के लिए जिम्मेदार माना जाता है। उसने तत्कालीन अफगान राष्ट्रपति हामिद करजई की हत्या की चेष्टा भी की थी।

दैनिक भास्कर ने लिखा है आतंक की आंख में आंख। काबुल में नारे लगाए गए हैं कि सभी पाकिस्तानी निकल जाएं। महिलाओं ने पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाए तो तालिबानियों ने बंदूकें तान दी और फायरिंग भी की।

अफगानिस्तान में अखुंद को कमान

दैनिक हिंदुस्तान ने लिखा है अफगानिस्तान में अखुंद को कमान। बरादर डिप्टी पीएम। अमेरिका का मोस्ट वांटेड हक्कानी होम मिनिस्टर। इस अखबार की संपादकीय टिप्पणी है हम तालिबानी आंच में कितना तपेंगे। अंग्रेजी अखबार हिंदुस्तान टाइम्स ने लिखा है तालिबान नेम केयरटेकर कैबिनेट अंडर अखुंड।

दैनिक जागरण ने लिखा है अफगानिस्तान में पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे। पाकिस्तान की दखलंदाजी और पंजशीर में हवाई हमले के विरोध में महिलाओं ने सड़क पर उतर कर किया प्रदर्शन। कार्यवाहक पीएम होंगे मुल्ला हसन अखुंद।

पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे

जनसत्ता ने लिखा है तालिबानी राज के खिलाफ सड़कों पर उतरीं महिलाएं। प्रदर्शनकारियों ने कहा पंजशीर में पाकिस्तान ने किए हवाई हमले। काबुल में महिलाओं ने पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाए। तालिबान ने चलाई गोलियां। कई पत्रकार गिरफ्तार। संपादकीय आलेख में आगाह किया है कि पूरी दुनिया इस आशंका से भयभीत है कि कहीं आतंकी भी ड्रोन का इस्तेमाल न करने लगें। ऐसा हुआ तो उन्हें खोज पाना नामुमकिन हो जाएगा।

नवभारत टाइम्स ने लिखा है बीस साल बाद तालिबान सरकार। अफगानिस्तान में मोहम्मद हसन को पीएम की जिम्मेदारी। पंजाब केसरी ने लिखा है पाक विरोधी प्रदर्शन पर तालिबानी फायरिंग। कई महिलाएं घायल। कवरेज कर रहे पत्रकार को गिरफ्तार किया। पाकिस्तानी दखल से भड़के अफगानी।

तालिबानियों पर भरोसा नहीं

अमेरिकी सैनिकों को शायद तालिबानियों पर भरोसा नहीं था। तभी तो वे बजाय अमेरिका जाने के, पाकिस्तान में ही लैंड कर गए। इसी का खुलासा पंजाब केसरी के संपादकीय आलेख में किया गया है। आलेख का शीर्षक है पाकिस्तान में क्यों रुके हैं अमेरिकी सैनिक?

प्रभात खबर ने लिखा है पचास लाख डॉलर के इनामी आतंकी हक्कानी को मिला गृह मंत्रालय। अंतरिम सरकार में तालिबान का असली चेहरा आया सामने। पाक दूतावास के कर्मचारियों से महिलाएं बोलीं, छोड़ो काबुल।

कार्यवाहक सरकार

राष्ट्रीय सहारा ने लिखा है अखुंद पीएम, बरादर डिप्टी। अफगानिस्तान में कार्यवाहक सरकार की घोषणा। हक्कानी नेटवर्क के सरगना को गृह मंत्री पद। काबुल में लगे पाक मुर्दाबाद के नारे। द टाइम्स आफ इंडिया ने लिखा है तालिबान बेटरन मुल्ला अखुंड टू लीड ए एफ गवर्नमेंट। बरादर डिप्टी। थर्टी थ्री मैन मिनिस्ट्री पैक्ड विद ओल्ड गार्ड, पस्तून्स।

कुल मिला कर पूरी दुनिया तालिबानी राज से चिंतित है। अमेरिका की भी चिंता दूर नहीं हुई है। उसे इस बात का डर सता रहा है कि कहीं तालिबानी अमेरिका पर हमला न कर दें।

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