Tainted Elections: महाराष्ट्र में चल रहे स्थानीय निकाय चुनावों का पहला चरण हिंसा, ईवीएम में खराबी और बोगस वोटिंग के आरोपों से कलंकित हो गया। पुणे, नागपुर, हिंगोली और अन्य जिलों में हुई घटनाओं ने न केवल मतदाताओं का विश्वास डिगाया, बल्कि विपक्षी दलों को सत्ता पक्ष पर हमला बोलने का मौका दे दिया।
Tainted Elections: ईवीएम गड़बड़ी के आरोपों और हिंसा में डूबे मतदान
इंफोपोस्ट न्यूजडेस्क
Tainted Elections: राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) ने मतगणना को 21 दिसंबर तक टाल दिया है, जबकि बॉम्बे हाईकोर्ट ने परिणाम घोषणा पर रोक लगा दी है। यह सब कुछ महीनों पहले कैबिनेट के ईवीएम को बैलेट पेपर से बदलने के फैसले के बावजूद हो रहा है, जिसकी आलोचना भाजपा ने की थी।
चुनाव का पहला चरण 1 दिसंबर को संपन्न हुआ, जिसमें 36 नगर निगमों, 26 जिला परिषदों और सैकड़ों पंचायत समितियों के लिए मतदान हुआ। लेकिन मतदान दिवस सुबह से ही तनावपूर्ण रहा। हिंगोली शहर में शिवसेना (शिंदे गुट) के विधायक संतोष बंगार पर पोलिंग बूथ में नियमों का उल्लंघन कर घुसने का आरोप लगा। एक FIR दर्ज की गई, जिसमें बताया गया कि उन्होंने मतदान प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया।
एक बूथ पर महिलाओं का समूह धार्मिक अनुष्ठान करने पहुंचा
इसी तरह, पुणे के भोर नगर परिषद के एक बूथ पर महिलाओं का एक समूह धार्मिक अनुष्ठान करने पहुंचा, जिसके कारण मतदान बाधित हो गया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दिखाया गया कि महिलाएं ईवीएम के सामने पूजा कर रही थीं, जो चुनाव आचार संहिता का स्पष्ट उल्लंघन था। हिंसा की घटनाओं ने तो जैसे आग में घी का काम किया।
नागपुर में महायुति (भाजपा-शिवसेना-एनसीपी) और महाविकास अघाड़ी (कांग्रेस-शिवसेना-यूबीटी-एनसीपी-एसपी) समर्थकों के बीच झड़पें हुईं, जिसमें दो दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए। डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट के अनुसार, नागपुर बेंच ने ईवीएम टैम्परिंग के आरोपों पर SEC को नोटिस जारी किया। विपक्षी नेता ने दावा किया कि सत्ताधारी दलों ने बूथ कैप्चरिंग की कोशिश की, जिससे मतदान केंद्रों पर पथराव और लाठीचार्ज की नौबत आई।
पुणे जिले में एक बूथ पर बोगस वोट डाले गए
पुणे जिले में एक बूथ पर कथित तौर पर 200 से अधिक बोगस वोट डाले गए, जहां मतदाता सूची में नाम न होने पर भी वोटिंग हुई। ईवीएम गड़बड़ी के आरोपों ने सबसे ज्यादा विवाद खड़ा किया। एनसीपी (शरद पवार गुट) ने SEC पर सवाल उठाते हुए कहा कि मशीनों में ‘चुनिंदा हैकिंग’ हुई, जो केवल विपक्ष के पक्ष में नुकसान पहुंचाने के लिए की गई।
पार्टी प्रवक्ता जितेंद्र अव्हाड ने कहा, “यह लोकतंत्र की हत्या है। हम हाईकोर्ट में ईवीएम की सील तोड़कर जांच की मांग करेंगे।” वहीं, सत्ता पक्ष ने इन आरोपों को ‘वोट हारने का बहाना’ करार दिया। भाजपा नेता चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा, “विपक्ष हमेशा ईवीएम पर सवाल उठाता है, लेकिन सबूत कहां? SEC ने स्पष्ट किया है कि मशीनें टैंपर-प्रूफ हैं।”
ईवीएम में खराबी को तकनीकी वजह बताया
राज्य निर्वाचन आयोग ने सफाई देते हुए कहा कि ईवीएम में हुई खराबी तकनीकी थी, न कि छेड़छाड़। एक प्रवक्ता ने बताया, “कुछ बूथों पर बैटरी फेलियर हुई, जिसे तुरंत ठीक किया गया। कुल 2% मतदान केंद्र प्रभावित हुए, और पुनर्मतदान की व्यवस्था की गई।” हालांकि, विपक्ष ने SEC पर सत्ताधारी दलों के इशारों पर नाचने का आरोप लगाया।
मिड-डे की रिपोर्ट के अनुसार, नागपुर बेंच ने SEC को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है, जिसमें ईवीएम की सुरक्षा और मतदान प्रक्रिया पर सवाल हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट का हस्तक्षेप इस मामले को नया मोड़ दे रहा है। कोर्ट ने मंगलवार को मतगणना और परिणाम घोषणा पर अंतरिम रोक लगा दी, जब तक कि ईवीएम की जांच पूरी न हो।
बैलेट पेपर अपनाने के फैसले के बावजूद ईवीएम का इस्तेमाल
याचिका में दावा किया गया कि बैलेट पेपर सिस्टम अपनाने के फैसले के बावजूद ईवीएम का इस्तेमाल अनियमित था। विधि मंत्री एच.के. पाटिल ने सितंबर में कैबिनेट को बैलेट पेपर का फैसला बताया था, लेकिन SEC ने ईवीएम पर ही मतदान कराया। भाजपा ने इसे विपक्ष की चाल बताया, जबकि कांग्रेस ने कहा कि यह ‘लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करने’ का प्रयास है।
इन घटनाओं ने महाराष्ट्र की राजनीति को और ध्रुवीकृत कर दिया है। स्थानीय स्तर पर महायुति की मजबूत पकड़ मानी जा रही है, लेकिन हिंसा और आरोपों ने उनकी छवि को धक्का पहुंचाया। विपक्षी गठबंधन ने ‘लोकतंत्र बचाओ’ अभियान छेड़ दिया है। इंडिया टुडे की लाइव अपडेट्स के मुताबिक, दूसरे चरण के मतदान से पहले सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
कुल 1.2 करोड़ मतदाताओं में से 58% ने वोट डाला
चुनाव आयोग के अनुसार, कुल 1.2 करोड़ मतदाताओं में से 58% ने वोट डाला, लेकिन घटनाओं ने इस आंकड़े पर सवाल खड़े कर दिए। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईवीएम विवाद सुलझा नहीं, तो पूरे चुनाव पर संकट मंडरा सकता है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “हम पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करेंगे। हिंसा की कोई जगह नहीं।”
Tainted Elections: लेकिन सड़कों पर उतरे कार्यकर्ताओं के नारों से साफ है कि तनाव कम होने वाला नहीं। यह चुनाव न केवल स्थानीय मुद्दों—जैसे सड़क, पानी, कचरा प्रबंधन—पर केंद्रित था, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति का आईना भी बन गया। यदि आरोप सिद्ध हुए, तो यह ईवीएम सिस्टम पर बड़ा सवाल खड़े करेगा। फिलहाल, महाराष्ट्र इंतजार में है—क्या न्याय मिलेगा या राजनीतिक साजिशें हावी रहेंगी?


