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जीव में अभिमान आने पर दूर हो जाते हैं भगवान : राजनंदनी किशोरी

ohm verma January 4, 2024
Srimad Bhagwat

इंफोपोस्ट संवाददाता, मोतिहारी। Srimad Bhagwat :

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

मधु पदमा विवाह भवन में चल रहे श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ के छठे दिन बुधवार को कथा में श्री वृंदावन धाम से पधारीं राजनंदनी किशोरी जी ने गोवर्धन लीला की चर्चा की। भगवान श्री कृष्णा स्वयं गोवर्धन बनाकर के गोवर्धन की पूजा करवाते हैं और जब इंद्र अहंकार में होकर पूरे वृंदावन को बारिश के द्वारा दहलाने लगे तो सात वर्ष के कान्हा एक उंगली पर 7 दिनों तक गोवर्धन को उठाए रखे और इंद्र शरण में आकर क्षमा मांगे तब जाकर भगवान क्षमा करते हैं।

Srimad Bhagwat

तब भगवान दूर हो जाते हैं

गोपी गीत पर किशोरी जी ने कहा कि जब तक जीव में अभिमान आता है, भगवान उनसे दूर हो जाते हैं लेकिन जब कोई भगवान को न पाकर बिरह में होता है तो भगवान श्री कृष्णा उस पर अनुग्रह कर दर्शन देते हैं।

Srimad Bhagwat : रासलीला पर प्रकाश डालते हुए बताया कि रास तो जीव का शिव के मिलन की कथा है। रासलीला में जीव पर शंका करना या काम को देखना ही पाप है और अंत में भगवान श्री वृंदावन धाम को छोड़कर के अक्रूर जी के साथ मथुरा चले गए। मथुरा में भगवान श्री कृष्ण ने सभी को दर्शन देते हुए कंस का वध करके अपने माता-पिता देवकी और वासुदेव को मुक्त किया और अग्रसेन को राजा बनाकर भगवान उज्जैन विद्या अध्ययन करने के लिए चले गए।

Srimad Bhagwat

तो आई वृंदावन की याद

विद्या अध्ययन करके लौटे तो उनको वृंदावन की याद आई तो उद्धव को शांति दूत बनाकर भेजा। समझाने के लिए गोपियों को श्री दाऊजी महाराज नंद बाबा यशोदा मैया राधा रानी सभी से मिलते है,सबको समझा करके ठाकुर जी का संदेश सुनाया। उसके बाद जरासंध ने 17 बार मथुरा के ऊपर आक्रमण किया । भगवान हर बार उसे जीवित छोड़ दिए।

Srimad Bhagwat

Srimad Bhagwat : कालजमन का उद्धार मचकुंड ऋषि से करने के बाद 18वीं बार भगवान मथुरा छोड़कर द्वारिका चले गए द्वारकाधीश बने और वही कुंडलपुर के राजा विदर्भ की पुत्री रुक्मणी थी जिनका हरण करके भगवान द्वारका ले गये और कृष्ण रुक्मणी विवाह के सुंदर कथा और झांकी का दर्शन हुआ।

धन को परमार्थ में लगाना चाहिए

दान पर प्रकाश डालते हुए राजनंदनी किशोरी जी ने कहा कि धन को परमार्थ में लगाना चाहिए और जो भी लक्ष्मी नारायण को पूजता है या उसकी सेवा करता है तो भगवान की कृपा स्वत: प्राप्त हो जाती है!

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