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Sexual health: यौन स्वास्थ्य पर ध्यान देना जरूरी क्यों ?

November 20, 2020
Sexual health

Sexual health: यौन स्वास्थ्य के संबंध में 20 हजार से अधिक लड़के-लड़कियों पर एक सर्वे किया गया है। सर्वे में यह पता लगाने का प्रयास किया गया है कि वयस्क होने की यात्रा में वे किन सामाजिक, मनोवैज्ञानिक, आर्थिक और जैविक परिवर्तनों के दौर से गुजरते हैं? उसका उन पर आजीवन क्या प्रभाव पड़ता है?

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Sexual health: अध्ययन के निष्कर्षों पर सेमिनार

इंफोपोस्ट न्यूज

नोएडा। Sexual health: देश में 10 से 19 वर्ष के किशोर/किशोरियां कुल आबादी का लगभग पांचवां हिस्सा हैं। वे वयस्क होने की अपनी यात्रा के दौरान महत्वपूर्ण सामाजिक, मनोवैज्ञानिक, आर्थिक और जैविक परिवर्तनों से होकर गुज़रते हैं। यह उनके अनुभव, उनके लिए उपलब्ध संसाधन व सहयोग, व्यवहार, क्षमता व स्वास्थ्य पर आजीवन प्रभाव डालते हैं।

उदया अध्ययन पॉपुलेशन काउंसिल की ओर से किया गया पहला लोंगीट्यूडनल (देशांतर) अध्ययन है जो बताता है कि उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्य में किशोर और किशोरियां कैसे वयस्कता की ओर बढ़ रहे हैं। इस अध्ययन के बाद आए निष्कर्ष को एक ऑनलाइन सेमिनार में प्रस्तुत किया गया।

यह अध्ययन पहली बार

उदया अध्ययन में 20 हजार से ज़्यादा किशोर और किशोरियों का सर्वे किया गया। उसमें छोटी व बड़ी उम्र के लड़के, लड़कियां और विवाहित युवतियां शामिल थीं। यह अध्ययन पहली बार 2015-16 में 10 से 19 वर्ष के किशोर और किशोरियों के साथ किया गया।

फिर उन्हीं किशोर और किशोरियों का पुनः साक्षात्कार 2018-19 में किया गया। जब वे 13-22 वर्ष के थे। इस अध्ययन की शुरुआत भी सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (ऐसा काम जो अभी करें और वह आगे की पीढ़ी के काम आए) को अपनाने के साथ हुई।

इससे इन तीन सालों के दौरान अध्ययन में शामिल किशोर और किशारियों की प्रगति को नापने का अवसर भी मिला। इस मौके पर स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय में डिप्टी कमिश्नर (किशोर स्वास्थ्य) डॉ. ज़ोया अली रिज़वी ने कहा, उदया अध्ययन से प्राप्त आंकड़े सरकार को नीतियों और उनके प्रभाव से संबंधित प्रमाण प्रदान करते हैं।

यौन और प्रजनन स्वास्थ्य

आंकड़ों से स्पष्ट है कि लड़कों और लड़कियों दोनों के यौन और प्रजनन स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरूरत है। अध्ययन के आंकड़ों को प्रस्तुत करने के बाद किशोरावस्था पर होने वाले निवेश को वरीयता देने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने इस बात पर ज़ोर दिया कि शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य, लिंग, सामाजीकरण, डिजिटल साधन की उपलब्धता और जीवनयापन से जुड़े अवसर वह कारक हैं जो वयस्कता में एक स्वस्थ और उपयोगी जीवन के लिए महत्वपूर्ण हैं।

वक्ताओं में किशोर स्वास्थ्य और कल्याण-लैंसेट कमिशन के चेयरमैन प्रो. जॉर्ज पैट्टन, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान प्रशिक्षण परिषद में किशोर शिक्षा कार्यक्रम की संयोजक प्रो. सरोज बाला यादव, विश्व स्वास्थ्य संगठन में किशोर यौन और प्रजनन के वैज्ञानिक डॉ. वेंकटरमन चंद्रमौली, कटकथा पपेट आर्ट ट्रस्ट के अविनाश कुमार, डेविड एंड लूसिल पैकार्ड फाउंडेशन के आनंद सिन्हा और बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन की डॉ. प्रिया नंदा शामिल थीं।

एक साथ काम करना जरूरी

प्रोफेसर यादव ने जोर दिया कि सरकार की विभिन्न एजेंसियों और विभागों को अलग-अलग काम करने के बजाय एक साथ काम करना चाहिए। उन्होंने कहा, हम देखते हैं कि कई तरह की पहल की गई हैं। लेकिन प्रक्रियाओं पर ध्यान देने की जरूरत है।

यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबॉर्न में किशोरावस्था स्वास्थ्य शोध के प्रोफेशनल फेलो जॉर्ज पैटन ने उदया अध्ययन के उस हिस्से पर जोर दिया जहां पाया गया कि किशोरियों के लिए किशोरावस्था के वयस्कता की उम्र में पहुंचने तक में गर्भावस्था की चुनौतियां बरकरार रहती हैं।

युवतियां शिक्षा, रोजगार, मानसिक स्वास्थ्य, गुणवत्तात्मक जीवन और पोषण के पैमानों पर पिछड़ रही हैं। जबकि यह किशोर एवं किशोरियों के सामाजिक और भावनात्मक विकास के लिए जरूरी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन में किशोर, यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य के प्रमुख डॉ. वेंकटरमन चंद्रमौली ने कहा, किशोरियां जीवन में कुछ करना चाहती हैं।

किशोरावस्था विषय पर राष्ट्रीय तकनीकी बैठक हो

वे अलग-अलग तरह के बंधनों में खुद को शक्ति विहीन पाती हैं। और इसी स्थिति को हमें बदलना है। उन्होंने हर वर्ष राष्ट्रीय स्तर पर किशोरावस्था के विषय पर राष्ट्रीय तकनीकी बैठक आयोजित करने की मांग की।

पॉपुलेशन काउंसिल भारत के डायरेक्टर डॉ. निरंजन सग्गुरटी ने कहा, उदया अध्ययन परिवार, समुदाय और सरकारी कार्यक्रमों पर ज़रूरी जानकारी प्रदान करता है। जो किशोरों के जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं।

और कुछ कमियों को उजागर करता है। जिन्हें संबोधित करने की आवश्यकता है। हालांकि इस अध्ययन में बिहार और उत्तर प्रदेश में रहने वाली भारत की एक-चौथाई किशोरों की आबादी शामिल है। देशभर में इस तरह के और अध्ययन सरकार को किशोरावस्था से वयस्कता की ओर कामयाब परिवर्तन के लिए ज़रूरी और ठोस साक्ष्य प्रदान कर सकते हैं।

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