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Ravish Kumar NDTV: काव्यात्मक अंदाज में रवीश कुमार

December 5, 2022
Ravish Kumar NDTV

Ravish Kumar NDTV: कहानियों को कविताओं के माध्यम से प्रस्तुत करना कोई नई बात नहीं है। क्योंकि रामायण और महाभारत की कहानियां कविताओं के माध्यम से प्रस्तुत की जा चुकी हैं। लेकिन आज कविता और कहानी की जुगलबंदी कम ही देखने को मिलती है। तभी तो दोनों ही कमजोर हुए हैं। हम न्यूज स्टोरी को कविता के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहे हैं।

Ravish Kumar NDTV: सोशल मीडिया में छा गए रवीश कुमार

श्रीकांत सिंह

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

Ravish Kumar NDTV: आज सोशल मीडिया पर एक आम आदमी के खास नाम की चर्चा है। हम बात कर रहे हैं रवीश कुमार की। जो एनडीटीवी से इस्तीफा देने के बाद सोशल मीडिया पर छा गए हैं। उनका नाम ट्रेंडिंग में है। तभी तो उन्होंने जैसे ही अपने यूट्यूब चैनल रवीश कुमार आफिशियल को सक्रिय किया, मिलियंस में सब्सक्राइबर बन गए।

यह उनकी लोकप्रियता का ज्वलंत उदाहरण है। हालांकि खुद को जीरो टीआरपी वाला एंकर बताने वाले रवीश कुमार कभी भी परिचय के मोहताज नहीं रहे। उनकी स्टोरी, रिपोर्ट और उनके खास कार्यक्रमों को लोगों के दिलों में जगह मिल चुकी थी। क्योंकि उनकी स्टोरी में सर्वहारा वर्ग के प्रति हमदर्दी झलकती रही है।

रवीश कुमार के साथ अद्भुत संस्मरण

मैं ज्यादातर दैनिक जागरण जैसे प्रिंट मीडिया से जुड़ा रहा हूं। शायद यही वजह रही हो कि रवीश कुमार से कभी व्यक्तिगत तौर पर परिचय करने का मौका नहीं मिल पाया। लेकिन उनके साथ एक संस्मरण अद्भुत है। जब हमारा दैनिक जागरण प्रबंधन से मजीठिया वेजबोर्ड के सिलसिले में विवाद चल रहा था और हमारी बात को किसी बड़े मंच पर नहीं उठाया जा रहा था तो हमने रवीश जी से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया। उस समय वह कार ड्राइव कर रहे थे। उन्होंने कार रोक कर मेरा नंबर सेव किया।

जब मैंने उन्हें अपने मुद्दे से अवगत कराया तो उन्होंने कहा था, श्रीकांत जी मुझे एनडीटीवी से निकाल दिया जाएगा तो आप क्या कर सकते हैं। उसी प्रकार यदि दैनिक जागरण आपको नौकरी से हटाता है तो मैं क्या कर सकता हूं। इस पर मेरी निराशा को वह भांप गए। उन्होंने कहा, फिर कभी फुरसत में हम लोग मिलेंगे तो समस्या के समाधान पर कुछ चर्चा जरूर करेंगे। लेकिन रवीश जी की व्यस्तता और मेरे संघर्ष की आपाधापी ने हमें कभी नहीं मिलने दिया।

जब रवीश कुमार का फोन आया

और एक दिन। मेरे फोन की स्क्रीन पर इनकमिंग काल फ्लैश हुई। स्क्रीन पर वही नाम चमक रहा था, रवीश कुमार। मैंने जल्दी से काल पिक कर हेलो कहा। जवाब आया, श्रीकांत जी मैं रवीश कुमार बोल रहा हूं। एक कार्यक्रम करने जा रहा हूं जो मजीठिया वेजबोर्ड पर आधारित है। समय बहुत कम है। संक्षेप में मजीठिया वेजबोर्ड से संबंधित सारे पक्षों को बता दीजिए। अभी आपकी कितनी सैलरी है? मजीठिया वेजबोर्ड लागू हो गया तो कितनी हो जाएगी आदि आदि।

रवीश जी ने यह भी यकीन दिलाया था कि आपका नाम कहीं भी नहीं आएगा, जिससे आपकी नौकरी पर कोई आंच नहीं आएगी। खैर। मैंने रवीश जी को ब्रीफ किया और उन्होंने मजीठिया वेजबोर्ड पर शानदार रिपोर्ट दिखाई थी। यह पत्रकारिता किसी भी टीवी न्यूज चैनल के बूते की बात नहीं थी। आपको याद दिला दें कि उस समय बिहार में विधानसभा चुनाव के दौरान पत्रकारों को लैपटॉप आफर किया गया था। इसी संदर्भ में रवीश कुमार ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि पत्रकार मजीठिया वेजबोर्ड नहीं, लैपटॉप के पीछे भाग रहे हैं।

दुखियारों और बेसहारा लोगों पर विहंगम कवरेज

मेरी कहानी तो एक उदाहरण मात्र है। रवीश कुमार ने न जाने कितने दुखियारों और बेसहारा लोगों पर विहंगम कवरेज करके उनकी समस्याओं को देश और सत्ता के लिए विमर्श का विषय बना दिया था। और विमर्श ही नहीं, तमाम समस्याओं का समाधान भी हुआ था। लेकिन कहा जाता है न कि होम करते समय हाथ अक्सर हाथ जल जाया करते हैं। कुछ ऐसा ही रवीश कुमार के साथ भी हुआ।

रवीश कुमार के संस्थान एनडीटीवी को ही खरीद लिया गया। और खरीदा भी एक ऐसे सेठ ने जिसके साथ रवीश कुमार जनहित की पत्रकारिता कर ही नहीं सकते थे। अंत में रवीश कुमार को एनडीटीवी से इस्तीफा दे देना पड़ा। उनके इस्तीफे से एक ऐसा भूचाल आ गया है कि हर असली पत्रकार अपने में रवीश कुमार का अक्स देखने लगा है। यह देखने वाली बात होगी कि इस घटना से कितने और रवीश कुमार पैदा हो जाएंगे। यूट्यूब चैनल पर। क्योंकि वहां किसी सत्ताधारी या सेठ की मनमानी नहीं चलती।

रवीश कुमार के बारे में सोशल मीडिया पर बहुत कुछ कहा जा चुका है। लेकिन सबका लब्बोलुआब जनहित के प्रति रवीश कुमार का कर्तव्यबोध और भावना है। इसलिए आज मैं भी रवीश कुमार के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त करना चाहता हूं, अपनी ही कविता के माध्यम से।

भले रही टीआरपी, उनकी हरदम जीरो।
फिर भी जनता मान रही है पत्रकार को हीरो।

कदम कदम पर बने रहे वह जनता के हमदर्द।
इस्तीफा क्या दिया उन्होंने बने मीडिया मर्द।

बने मीडिया मर्द नहीं है उनका कोई सानी।
जैसे भारत में आई हो ताजा नई जवानी।

ताजा नई जवानी लेकिन लज्जित है अभिमानी।
नहीं टिका उनके सम्मुख जिसने भी की मनमानी।

जिसने भी की मनमानी उसको समझाने की ठानी।
टीवी की दुनिया भी उनके लिए हुई बेगानी।

उनके लिए हुई बेगानी ट्रेंड कर गया।
सब्सक्रिप्शन यूट्यूब पर एक्सटेंड कर गया।

सब्सक्रिप्शन एक्सटेंड कर गया धूम मची है।
आज कहानी उनकी किसको नहीं जंची है।

लाला तो धन का मालिक है बेशुमार।
उसके सम्मुख आज खड़े हैं रवीश कुमार।

Ravish Kumar NDTV:  अभी के लिए इतना ही। हम फिर हाजिर होंगे ऐसी ही एक नई कहानी के साथ। स्टोरी इन द पोएट्री नाम से यह ब्लागिंग अभियान आपको कैसा लग रहा है? उम्मीद है कि कमेंट करके आप अपनी राय जरूर जाहिर करेंगे।

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