श्रीकांत सिंह।
कल रविवार पहली अगस्त को फ्रेंडशिप डे यानी मित्रता दिवस है। इस मौके पर संस्कृत की ये पंक्तियां प्रासंगिक हैं। अलसस्य कुतो विद्या, अविद्यस्य कुतो धनम। अधनस्य कुतो मित्रम, अमित्रस्य कुतो सुखम। यानी आलसी व्यक्ति के पास विद्या नहीं होती और जिसके पास विद्या नहीं होती, उसके पास धन नहीं होता। जिसके पास धन नहीं होता, उसके मित्र नहीं होते और जिनके मित्र नहीं होते, उन्हें सुख नहीं मिलता।
लेकिन शास्त्रों की बात करें तो इसके अपवाद भी हैं। कृष्ण और सुदामा की मित्रता जगजाहिर हैं। कहां कृष्ण राजा थे और सुदामा निर्धन ब्राह्मण। फिर भी दोनों में प्रगाढ़ मित्रता थी। भले ही कहा जाता है कि मित्रता समानता में ही होती है, लेकिन ऐसे उदाहरणों की कमी नहीं है जब दो असमान लोगों में मित्रता हुई है।
फ्रेंडशिप डे अंग्रेजी भाषा का शब्द है, जिसका हिन्दी में अर्थ मित्रता दिवस से है। वाकई मित्रता प्रत्येक व्यक्ति के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। बिना मित्र के जीवन में सुखों की कल्पना नहीं की जा सकती है। भारत सहित विश्व के अनेक देशों में मित्र व मित्रता का भाव व्याप्त है। यह मित्रता का भाव प्रत्येक उम्र में देखा जा सकता है। बाल, युवा और वृद्धावस्था हर उम्र में मित्रता होती है।
यूनाइटेड स्टेट्स कांग्रेस ने 1935 में अगस्त माह के पहले रविवार को नेशनल फ्रेंडशिप डे मनाने की घोषणा की। तब से भारत सहित विश्व के अनेक देशों में अगस्त माह के पहले रविवार को फ्रेंडशिप डे मनाने की प्रथा है। इसे प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी अगस्त माह के पहले रविवार को मनाया जाएगा।
अंकशास्त्र मानव जीवन के अनेक पहलुओं को उद्घाटित करता है। इसमें मित्र व मित्रता का बड़ा ही सरल वर्णन किया गया है। किसी व्यक्ति की कुंडली में ग्रह-नक्षत्रों का मैत्री व शत्रु भाव तीव्र प्रभाव डालते हैं। उससे व्यक्ति अपने इच्छित मित्र के साथ खूबसूरत संबंध स्थापित करता है।
अंक शास्त्र (न्यूमरोलॉजी) भी हमें मित्र व विरोधी अंक वाले व्यक्ति के बारे पूर्व जानकारी देता है। प्रत्येक अंक ब्रह्मांड में स्थित ग्रह-नक्षत्रों की शक्ति से प्रभावित होता रहता है, जिससे हमारे मन के भावों में उतार-चढ़ाव की स्थिति उत्पन्न होती रहती है।
न्यूमरोलॉजी यानी अंक शास्त्र के जरिये आप अपने सहयोगी अंक के मित्र को बखूबी समझ सकते हैं। यदि आपका मूलांक 1 है तो आपके लिए 1, 2, 4, 7 व 9 अंक के व्यक्ति मित्र रहेंगे। यदि आप 2 मूलांक के हैं तो आप 1, 2, 7 व 9 अंक के व्यक्तियों के साथ अटूट दोस्ती का लाभ उठा सकते हैं। अगर 3 मूलांक है तो 1, 3, 6, 9 अंक के लोगों के साथ मधुरता कायम कर सकते हैं।
यदि आपका 4 मूलांक हैं तो 4, 5, 6 अंक के व्यक्ति अच्छे मित्र व सहयोगी होंगे। अगर 5 अंक आपका मूलांक है तो 1, 5, 6 व 8 अंक के लोग प्रत्येक स्तर पर मित्रता रखेंगे। 6 अंक वाले के लिए 3, 6, व 9 अंक सहयोगी मित्र के रूप में होंगे। इसी प्रकार 7 मूलांक के लिए 1, 2, 7, 9 अंक के व्यक्ति अच्छे मित्र की भूमिका निभाएंगे।
यदि आप 8 मूलांक के है तो 5, 6 अंक के मित्र आपके लिए फायदेमंद रहेंगे। यदि आप 9 मूलांक के हैं तो 1, 3, 6 और 9 मूलांक के व्यक्ति आपके सहयोगी मित्र बनकर लाभ पहुंचाएंगे।
इस प्रकार अंकशास्त्र के इस मित्र भाव के सिद्धांत को समझकर आप अपने मूलांक के अनुसार किसी व्यक्ति से मित्रता करने का लाभ उठा सकते हैं।


