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Kalmadi has passed away: नहीं रहे सुरेश कलमाड़ी, 81 की उम्र में निधन

infopost January 6, 2026
Kalmadi has passed away

Kalmadi has passed away: पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुरेश कलमाड़ी का 81 वर्ष की आयु में पुणे में निधन। कॉमनवेल्थ गेम्स 2010 के आयोजक रहे कलमाड़ी का राजनीति और खेल प्रशासन में बड़ा योगदान। अंतिम संस्कार वैकुंठ श्मशान में।

Kalmadi has passed away: राजनीति और खेल जगत में शोक व्याप्त

पुणे/इंफोपोस्ट न्यूजडेस्क/Kalmadi has passed away


कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश कलमाड़ी का लंबी बीमारी के बाद आज तड़के निधन हो गया। वे 81 वर्ष के थे। परिवारिक सूत्रों के अनुसार, कलमाड़ी ने पुणे के दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल में सुबह करीब 3:30 बजे अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से राजनीति और खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। विभिन्न दलों के नेताओं ने उनके योगदान को याद करते हुए श्रद्धांजलि दी।

कलमाड़ी के परिवार में उनकी पत्नी, एक पुत्र, पुत्रवधू, दो विवाहित पुत्रियों, दामाद और पोते-पोतियां हैं। सुरेश कलमाड़ी का जन्म 1 मई 1944 को मद्रास (अब चेन्नई) में हुआ था, हालांकि उनका परिवार मूल रूप से कर्नाटक के मंगलुरु से था। उनके पिता डॉ. के. शमराव कलमाड़ी और मां शांता राव थे।

कई भाषाओं में थे पारंगत, भारत-पाकिस्तान युद्धों में लिया हिस्सा

बचपन से ही पुणे में बसने वाले कलमाड़ी ने अपनी स्कूली शिक्षा यहीं पूरी की। वे कई भाषाओं—कोंकणी, कन्नड़, मराठी, अंग्रेजी, हिंदी और तुलु—में पारंगत थे। कलमाड़ी ने भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट के रूप में करियर शुरू किया। उन्होंने 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्धों में हिस्सा लिया। वायुसेना से सेवानिवृत्ति के बाद वे राजनीति में सक्रिय हुए। 1977 में वे पुणे में भारतीय युवा कांग्रेस के अध्यक्ष बने।

शरद पवार के करीबी रहे कलमाड़ी ने 1982 में राज्यसभा के लिए पहली बार चुनाव लड़ा और जीते। वे 1982, 1986 और 1992 में राज्यसभा सदस्य रहे। बाद में 1996, 2004 और 2009 में पुणे से लोकसभा सांसद चुने गए। पी.वी. नरसिम्हा राव सरकार में 1995-96 के दौरान वे रेल राज्य मंत्री रहे। इस दौरान उन्होंने रेल बजट पेश किया।

कलमाड़ी का नाम भारतीय खेल जगत से जुड़ा रहा

कलमाड़ी ने महाराष्ट्र पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष के रूप में भी काम किया और 1989 में पुणे फेस्टिवल की शुरुआत की, जो आज भी गणेशोत्सव के दौरान आयोजित होता है। कलमाड़ी का नाम भारतीय खेल जगत से गहराई से जुड़ा रहा। वे 1996 से 2012 तक भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) के अध्यक्ष रहे। यह सबसे लंबा कार्यकाल था।

एशियन एथलेटिक्स एसोसिएशन के अध्यक्ष और अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स फेडरेशन (अब वर्ल्ड एथलेटिक्स) के काउंसिल सदस्य भी रहे। उन्होंने पुणे में खेल के विकास में बड़ा योगदान दिया। 1994 में पुणे में राष्ट्रीय खेलों का आयोजन, 2008 में कॉमनवेल्थ यूथ गेम्स और पुणे इंटरनेशनल मैराथन की शुरुआत उनके प्रयासों का नतीजा थी। कई खेल प्रशासकों ने उन्हें “भारतीय खेल आंदोलन का दिग्गज” कहा। IOA के पूर्व सचिव राजीव मेहता ने कहा, “यह व्यक्तिगत क्षति है। हम उन्हें हमेशा मिस करेंगे।

दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स सबसे विवादास्पद अध्याय रहा

कलमाड़ी की विरासत में 2010 दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स सबसे विवादास्पद अध्याय रहा। वे आयोजन समिति के अध्यक्ष थे। खेलों से पहले और बाद में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे। टाइमिंग-स्कोरिंग-रिजल्ट (TSR) सिस्टम सहित कई अनुबंधों में अनियमितताओं का खुलासा हुआ। CBI ने अप्रैल 2011 में उन्हें गिरफ्तार किया। वे 10 महीने तिहाड़ जेल में रहे। आरोपों में धोखाधड़ी, साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामले शामिल थे।

हालांकि, बाद में CBI और ED ने मामले बंद कर दिए। 2016 में IOA ने उन्हें आजीवन संरक्षक बनाने की घोषणा की, जिस पर विवाद हुआ और खेल मंत्रालय ने हस्तक्षेप किया। कलमाड़ी ने पद स्वीकार नहीं किया। इस घोटाले ने उनकी राजनीतिक और खेल करियर को बड़ा झटका दिया। पुणे में कलमाड़ी कांग्रेस के स्वर्णिम युग के प्रतीक थे। उन्होंने शहर की संगठनात्मक संरचना मजबूत की।

शरद पवार: लंबे समय तक जिम्मेदारियां निभाते रहे

Kalmadi has passed away: शरद पवार ने उनके निधन पर श्रद्धांजलि देते हुए कहा, “वे लंबे समय तक जिम्मेदारियां निभाते रहे। उनकी दृढ़ता और आत्मविश्वास कभी कम नहीं हुआ। “कलमाड़ी ने पुणे को खेल और पर्यटन हब बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

विभिन्न दलों के नेता उनके निधन पर शोक व्यक्त कर रहे हैं। कांग्रेस से लेकर अन्य पार्टियों तक, सभी ने उनके सार्वजनिक जीवन के योगदान को सराहा। सुरेश कलमाड़ी का निधन भारतीय राजनीति और खेल प्रशासन के एक महत्वपूर्ण युग का अंत है। विवादों के बावजूद उनके योगदान को नकारा नहीं जा सकता। वे एक ऐसे व्यक्तित्व थे जिन्होंने वायुसेना से लेकर संसद और ओलंपिक मंच तक लंबी यात्रा की। देश उन्हें याद रखेगा।

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