Jammu Kashmir1: पाकिस्तान शुरुआत से ही कश्मीर को हड़पना चाहता था। इसके लिए उसने 1948 और 1965 में कश्मीर पर हमला भी किया। युद्ध में नाकामी के बाद पाकिस्तान ने कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा देना शुरू किया। ताजा घटनाक्रम की बात करें तो शनिवार को बदायूं के मोहित राठौड़ (27) शहीद हो गए हैं।
Jammu Kashmir1: बदायूं के मोहित राठौड़ शहीद
इंफोपोस्ट डेस्क
बदायूं, उत्तर प्रदेश। Jammu Kashmir1: जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा में आतंकियों से मुठभेड़ में शनिवार को बदायूं के मोहित राठौड़ (27) शहीद हो गए। चार जवान घायल भी हुए हैं। रात 2 से 3 बजे के बीच आतंकियों की उपस्थिति का पता चला तो सर्च ऑपरेशन चलाया गया। इस्लामनगर थाना क्षेत्र के गांव सवानगर में सैनिक सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
परिजनों के मुताबिक, शहीद मोहित राठौड़ घर का इकलौता चिराग था। डेढ़ वर्ष पहले मोहित की शादी हुई थी। इकलौता चिराग बुझने से परिवार में कोहराम मचा है। ग्रामीणों का कहना है कि नत्थू सिंह के इकलौते बेटे मोहित की अंतिम झलक पाने के लिए लोग आ रहे हैं। मोहित की बड़ी बहन रुचि की शादी हो चुकी है और उससे छोटी नीतू की भी शादी हो चुकी है। सबसे छोटी बहन पूजा की शादी के लिए रिश्ते की बात चल रही थी।
कश्मीर को हड़पना चाहता था पाकिस्तान
Jammu Kashmir1: पाकिस्तान शुरुआत से ही कश्मीर को हड़पना चाहता था। उसने 1948 और 1965 में कश्मीर पर हमला भी किया था। युद्ध में नाकामी के बाद पाकिस्तान ने कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा देना शुरू किया। 1990 में शुरू हुआ पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद जारी है।
आजादी से पहले कश्मीर अलग रियासत थी। करीब 2.1 लाख वर्ग किलोमीटर में फैली इस रियासत पर डोगरा राजपूत वंश के राजा हरि सिंह का शासन था। डोगरा राजाओं ने पूरी रियासत को एक करने के लिए पहले लद्दाख को जीता। फिर 1840 में अंग्रेजों से कश्मीर छीना। उस समय इस रियासत की सीमाएं अफगानिस्तान और चीन से लगती थीं। ऐसे में कश्मीर रणनीतिक तौर पर बेहद अहम था।
कश्मीर के भारत में विलय के समझौते पर हस्ताक्षर
पाकिस्तान समर्थित कबायली हमले के बाद हरि सिंह भारत में विलय के लिए तैयार हुए। जब कबायलियों की फौज श्रीनगर की ओर बढ़ी तो हिंदुओं की हत्या और उनके साथ लूटपाट की खबरें आने लगीं। हरि सिंह ने 26 अक्टूबर 1948 को भारत में विलय के लिए संधि पत्र पर हस्ताक्षर किए।
अगले दिन कबायलियों से मोर्चा लेने भारतीय सेना श्रीनगर एयरपोर्ट पर उतरी। लेकिन संयुक्तराष्ट्र के हस्तक्षेप से युद्ध विराम हो गया और कश्मीर का एक हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे में चला गया। यही मौजूदा गुलाम जम्मू-कश्मीर है।
विलय नहीं चाहते थे हरि सिंह
महाराजा हरि सिंह स्वतंत्र रहना चाहते थे और विलय से कतराते रहे। रणनीतिक महत्व और मुस्लिम बहुल होने के कारण पाकिस्तान कश्मीर को अपने में मिलाना चाहता था। अगस्त 1947 के दूसरे सप्ताह तक दोनों देशों की ओर से कश्मीर के विलय की कोशिशें जारी रहीं। हालांकि इसका कोई नतीजा नहीं निकला।
शेख अब्दुल्ला नेशनल कानफ्रेंस के संस्थापक और नेहरू के मित्र थे। आजादी के बाद नेहरू ने उन्हें कश्मीर का प्रमुख बनाया। शेख ने कश्मीर को विशेष दर्जा देने के लिए नेहरू को मनाया। उनके प्रस्ताव को गोपालस्वामी अयंगर ने 1949 में संविधान सभा में अनुच्छेद 306-ए के तौर पर रखा। बाद में यही अनुच्छेद 370 बना।
जब हटा दिया गया अनुच्छेद 370
1987 के विधानसभा चुनाव में धांधली के आरोप लगे और चुनाव हारे नेताओं ने हथियार उठा लिए। आतंकियों ने 1989 में गृहमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी को अगवा किया। बेटी को छुड़ाने के लिए 13 आतंकियों को छोड़ना पड़ा।
पांच अगस्त, 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया गया। घाटी में अलगाववादियों और कट्टरपंथियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए गए। पाकिस्तान से होने वाली फंडिंग पर रोक लगी। जमीन पर इसका असर भी दिखा और घाटी में हालात सामान्य होने लगे। जम्मू-कश्मीर में निवेश बढ़ा और पर्यटकों की संख्या भी बढ़ी।
अब तक 42 हजार लोगों की मौतें
भारत सरकार के आंकड़ों के अनुसार 1990 से अब तक जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद की वजह से करीब 42 हजार लोगों की मौत हो चुकी है। जान गंवाने वालों में आम नागरिक, सुरक्षाकर्मी और आंतकवादी शामिल हैं। 1990 के दौरान पाकिस्तान से प्रशिक्षण लेकर आतंकी लौटने लगे।
आतंकी गैर मुस्लिमों की हत्या करने लगे। लाखों कश्मीरी पंडित बेघर हो गए। हालात इतने बिगड़े कि 1990-1996 तक राज्यपाल शासन रहा। 1996 में चुनाव हुए। पाकिस्तान समझ गया कि वो सीधी लड़ाई में भारत से नहीं जीत सकता है। उसने गुलाम जम्मू-कश्मीर में आतंकी कैप शुरू कर दिए। आतंकी तैयार किए और कश्मीरी युवाओं को सशस्त्र विद्रोह के लिए भड़काना शुरू कर दिया। जिसका खामियाजा आज देश भुगत रहा है।
समाधान क्या है?
Jammu Kashmir1: अब तक के अनुभव बताते हैं कि पाकिस्तान पर बातचीत का कोई असर नहीं पड़ता। हमारे नेता कहते रहते हैं कि पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब दिया जाएगा। लेकिन हमारे नेताओं में इतनी इच्छा शक्ति नहीं है कि वे समस्या का समाधान कर सकें। इन परिस्थितियों में सेना का विशेष आधुनिकीकरण किया जाना जरूरी है। सेना को हर तरह से मजबूत किया जाना चाहिए। लेकिन अग्निवीर जैसी योजनाओं के जरिये सेना को दिनोंदिन कमजोर किया जा रहा है। सरकार ने नहीं चेता तो कश्मीर में लोग यूं ही बेमौत मारे जाते रहेंगे। कश्मीर को लेकर राजनीति भी बंद होनी चाहिए। वोट की राजनीति ने कश्मीर को बर्बाद करके रख दिया है।


