सम्मेद शिखरजी की
पवित्रता बनाए रखने के लिए केंद्र का निर्देश, शराब-मांस बिक्री
और तेज संगीत पर रोक
नई दिल्ली/रांची/INFOPOST
झारखंड के
गिरिडीह जिले में स्थित पवित्र सम्मेद शिखरजी पर्वत क्षेत्र की धार्मिक और
पर्यावरणीय पवित्रता बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को आवश्यक कदम
उठाने के निर्देश दिए हैं। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु
परिवर्तन मंत्रालय के वन्यजीव प्रभाग की ओर से 5 जनवरी 2023 को जारी कार्यालय ज्ञापन में क्षेत्र में शराब, मांसाहारी वस्तुओं की बिक्री और उपभोग समेत कई गतिविधियों
पर रोक को प्रभावी ढंग से लागू करने को कहा गया है।
मंत्रालय ने अपने
पत्र में कहा है कि सम्मेद शिखरजी पर्वत जैन धर्म के विश्व के सबसे पवित्र और
प्राचीन तीर्थ स्थलों में से एक है। यह क्षेत्र धार्मिक आस्था के साथ-साथ
पारिस्थितिक दृष्टि से भी संवेदनशील है।
पत्र में झारखंड
सरकार को निर्देश दिया गया है कि पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र के संरक्षण
के लिए बनाई गई मास्टर प्लान योजना के तहत आवश्यक कदम तत्काल उठाए जाएं।
इन गतिविधियों पर
रोक
केंद्र सरकार के
निर्देश के अनुसार सम्मेद शिखरजी क्षेत्र में—
शराब, ड्रग्स और अन्य नशीले पदार्थों की बिक्री पर रोक रहेगी।
तेज संगीत बजाने
और लाउडस्पीकर के उपयोग की अनुमति नहीं होगी।
धार्मिक और
सांस्कृतिक महत्व के पवित्र स्थलों को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर
प्रतिबंध रहेगा।
झरनों, गुफाओं, मंदिरों और अन्य
पवित्र स्थलों की प्राकृतिक शांति भंग नहीं की जा सकेगी।
वन्यजीवों, जल निकायों, पौधों और
जीव-जंतुओं को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों पर रोक होगी।
पालतू जानवरों के
साथ आने और अत्यधिक कैंपिंग व ट्रैकिंग जैसी गतिविधियों की अनुमति नहीं होगी।
शराब और
मांसाहारी वस्तुओं की बिक्री-उपभोग पर भी सख्ती
पत्र में यह भी
उल्लेख किया गया है कि झारखंड सरकार पहले ही 21 दिसंबर 2022 के आदेश के तहत पारसनाथ पर्वत क्षेत्र में शराब एवं
मांसाहारी खाद्य वस्तुओं की बिक्री और उपभोग पर प्रतिबंध लागू कर चुकी है। केंद्र
ने इस प्रतिबंध को सख्ती से प्रभावी बनाने के निर्देश दिए हैं।
इको सेंसिटिव जोन
की निगरानी के लिए समिति
केंद्र सरकार ने
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत इको सेंसिटिव जोन की निगरानी के लिए समिति
गठित करने का भी उल्लेख किया है। राज्य सरकार को निर्देश दिया गया है कि इस समिति
में जैन समुदाय के दो सदस्यों और स्थानीय जनजातीय समुदाय के एक सदस्य को स्थायी
सदस्य के रूप में शामिल किया जाए, ताकि स्थानीय
स्तर पर प्रभावी निगरानी और सभी संबंधित पक्षों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
केंद्रीय वन्यजीव
प्रभाग की ओर से जारी यह आदेश साफ करता है कि सम्मेद शिखरजी की धार्मिक गरिमा, प्राकृतिक वातावरण और पारिस्थितिक संवेदनशीलता को बनाए रखने
के लिए राज्य सरकार को प्रतिबंधों का कड़ाई से पालन कराना होगा।


