Indian Institute of Heritage: नोएडा में एक और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हेरिटेज बनेगा। केन्द्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जी. किशन रेड्डी ने इसकी मंजूरी भी दे दी है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!Indian Institute of Heritage: डॉक्टर महेश शर्मा ने जताई खुशी
इंफोपोस्ट न्यूज
नोएडा, उत्तर प्रदेश। Indian Institute of Heritage: नोएडा में एक और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हेरिटेज की मंजूरी मिलने पर डॉक्टर महेश शर्मा ने खुशी जताई है। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं केन्द्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री का हृदय से धन्यवाद करता हूँ।
मुझे अत्यंत खुशी हो रही है कि मेरे पर्यटन एवं संस्कृति राज्यमंत्री कार्यकाल के दौरान 31 जनवरी 2015 को इस संस्थान का शिलान्यास एवं 2019 में उद्घाटन करने का सौभाग्य मिला। केन्द्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जी. किशन रेड्डी ने नोएडा को एक और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हेरिटेज स्थापित करने स्वीकृति प्रदान की है।
उसमें आईआईएच कला, संरक्षण, संग्रहालय विज्ञान, अभिलेखीय अध्ययन, पुरातत्व के इतिहास में परास्नातक और पीएचडी पाठ्यक्रम की व्यवस्था होगी। यह एक समृद्ध भारतीय विरासत और इसके संरक्षण से संबंधित क्षेत्रों में उच्च शिक्षा और अनुसंधान को प्रभावित करेगा।
संरक्षण प्रशिक्षण सुविधाएं मिलेंगी
भारतीय विरासत संस्थान कला, संरक्षण, संग्रहालय विज्ञान, अभिलेखीय अध्ययन, पुरातत्व, निवारक संरक्षण, पुरालेख और मुद्राशास्त्र, पांडुलिपि विज्ञान आदि के इतिहास में परास्नातक और पीएचडी पाठ्यक्रमों के साथ-साथ सेवारत कर्मचारियों और छात्रों को संरक्षण प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
पं. दीनदयाल उपाध्याय पुरातत्व संस्थान, भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार, नई दिल्ली के तहत अभिलेखीय अध्ययन के स्कूल, सांस्कृतिक संपत्ति के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय अनुसंधान प्रयोगशाला (एनआरएलसी) को एकीकृत करके विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित किया जा रहा है।
लखनऊ, नेशनल म्यूजियम इंस्टीट्यूट ऑफ हिस्ट्री ऑफ आर्ट, कंजर्वेशन एंड म्यूजियोलॉजी (एनएमआईसीएचएम) और इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर द आर्ट्स (आईजीएनसीए), नई दिल्ली का अकादमिक विंग। ये संस्थान के विभिन्न स्कूल बन जाएंगे।
संस्थान एक विश्वस्तरीय विश्वविद्यालय होगा
आज हर्ष का दिन है कि गौतमबुद्वनगर में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हेरिटेज की मंजूरी मिलने से काफी खुशी का माहौल है। यह संस्थान एक विश्वस्तरीय विश्वविद्यालय होगा इसके बनने से क्षेत्रवासियों के लिए उच्च शिक्षा के नवीन अवसर और रोजगार के नये आयाम स्थापित होगे।
भारत की समृद्ध मूर्त विरासत में संरक्षण और अनुसंधान पर ध्यान केंद्रित करेगा, जबकि अनुसंधान, विकास और ज्ञान के प्रसार, अपने छात्रों की शिक्षा में उत्कृष्टता और विरासत से जुड़ी गतिविधियों में योगदान देता है। भारत का सांस्कृतिक, वैज्ञानिक और आर्थिक जीवन। यह देश में अपनी तरह का एक स्टैंडअलोन संस्थान होगा।


