Skip to content
Primary Menu
  • Home
  • ताजा तरीन
  • आलेख
    • सत्ता की सियासत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • दिल्ली एनसीआर
  • राज्यों से …
  • कारोबार
  • साहित्य
  • संस्कार
  • तकनीक
  • मनोरंजन
  • स्वास्थ्य
  • शिक्षा
  • खेल
Logo300

INFOPOST NEWS

The power of information

October 24, 2026

Connect with Us

  • Home
  • ताजा तरीन
  • आलेख
    • सत्ता की सियासत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • दिल्ली एनसीआर
  • राज्यों से …
  • कारोबार
  • साहित्य
  • संस्कार
  • तकनीक
  • मनोरंजन
  • स्वास्थ्य
  • शिक्षा
  • खेल

Categories

  • INFOPOST PDF
  • अंतरराष्ट्रीय
  • आलेख
  • कारोबार
  • ख़ास ख़बर
  • खेल पोस्ट
  • तकनीक
  • ताजा तरीन
  • दिल्ली एनसीआर
  • बोलती तस्वीरें
  • मनोरंजन
  • राज्यों से …
  • राष्ट्रीय
  • शिक्षा
  • सत्ता की सियासत
  • संस्कार
  • साहित्य
  • स्वास्थ्य
An error has occurred, which probably means the feed is down. Try again later.

  • ताजा तरीन
  • साहित्य

कवियों की वजह से हुआ हिंदी साहित्य का विस्तार

September 4, 2020
P2

हिंदी साहित्य की शुरुआत आठवीं शताब्दी से मानी जाती है। यह वह समय है जब सम्राट हर्ष की मृत्यु के बाद देश में छोटे-छोटे शासन केंद्र स्थापित हो गए थे, जो परस्पर संघर्षरत थे। विदेशी मुसलमानों से भी इनकी टक्कर होती रहती थी। हिन्दी साहित्य के विकास को आलोचक सुविधा के लिए पांच ऐतिहासिक चरणों में विभाजित करते हैं।

हिन्दी साहित्य का आदिकाल 1400 ईसवी से पूर्व का माना जाता है। उस समय हिन्दी का उद्भव हो ही रहा था। हिन्दी की विकास-यात्रा के केंद्र दिल्ली, कन्नौज और अजमेर माने जाते हैं। पृथ्वीराज चौहान का उस समय दिल्ली में शासन था और चंदबरदाई नामक उनके एक दरबारी कवि हुआ करते थे।

चंदबरदाई की रचना ‘पृथ्वीराजरासो’ में पृथ्वीराज की जीवन गाथा है। ‘पृथ्वीराज रासो’ हिंदी साहित्य सर्वाधिक विस्तृत रचना मानी गई है। कन्नौज का अंतिम राठौड़ शासक जयचंद था जो संस्कृत का बहुत बड़ा संरक्षक था।

हिन्दी साहित्य का भक्ति काल प्रमुख रूप से भक्ति भावना से ओतप्रोत काल है। इस काल को समृद्ध बनाने वाली दो काव्य-धाराएं हैं। पहली निर्गुण भक्तिधारा और दूसरी सगुण भक्तिधारा। निर्गुण भक्तिधारा को आगे दो हिस्सों में बांटा गया। संत काव्य जिसे ज्ञानाश्रयी शाखा के रूप में जाना जाता है। इस शाखा के प्रमुख कवि कबीर, नानक, दादूदयाल, रैदास, मलूकदास, सुन्दरदास, धर्मदास आदि हैं।

निर्गुण भक्तिधारा का दूसरा हिस्सा सूफी काव्य का है। इसे प्रेमाश्रयी शाखा भी कहा जाता है। इस शाखा के प्रमुख कवि हैं- मलिक मोहम्मद जायसी, कुतुबन, मंझन, शेख नबी, कासिम शाह, नूर मोहम्मद आदि। भक्तिकाल की दूसरी धारा को सगुण भक्ति धारा के रूप में जाना जाता है।

सगुण भक्तिधारा दो शाखाओं में विभक्त है। रामाश्रयी शाखा और कृष्णाश्रयी शाखा। रामाश्रयी शाखा के प्रमुख कवि हैं-तुलसीदास, अग्रदास, नाभादास, केशवदास, हृदयराम, प्राणचंद चौहान, महाराज विश्वनाथ सिंह, रघुनाथ सिंह।

इसी प्रकार कृष्णाश्रयी शाखा के प्रमुख कवि हैं-सूरदास, नंददास, कुम्भनदास, छीतस्वामी, गोविन्द स्वामी, चतुर्भुज दास, कृष्णदास, मीरा, रसखान, रहीम आदि। चार प्रमुख कवियों ने अपनी-अपनी धारा का प्रतिनिधित्व किया। वे हैं कबीरदास (1399-1518), मलिक मोहम्मद जायसी (1477-1542), सूरदास (1478-1580), तुलसीदास (1532-1602)।

About Author

See author's posts

Post navigation

Previous: क्या भारत समाजवादी के बिना धर्मनिरपेक्ष गणतंत्र हो सकता है?
Next: सत्ता और मीडिया मालिकों के गठजोड़ की राजनीति

Related Stories

SIR Protest
  • ताजा तरीन
  • राष्ट्रीय

SIR Protest: दिल्ली में प्रदर्शन तेज, 1 नवंबर की रैली पर नजर

infopost October 24, 2026 0
November 1 Rally
  • ताजा तरीन
  • सत्ता की सियासत

November 1 Rally: विपक्ष के बड़े शक्ति प्रदर्शन की तैयारी

infopost October 24, 2026 0
Election Transparency
  • ताजा तरीन
  • सत्ता की सियासत

Election Transparency: लोकतंत्र में बढ़ती राजनीतिक बहस

infopost October 23, 2026 0

Copyright © All rights reserved. | MoreNews by AF themes.