Hind Mazdoor Sabha: भारत का टोकियो कहे जाने वाले नोएडा में हजारों फैक्टरियां हैं। उनमें लाखों श्रमिक काम करते हैं। लेकिन यह अत्यंत शर्मनाक स्थिति है कि जिन मजदूरों की मेहनत के बल पर देश की अर्थव्यवस्था आगे बढ़ रही है, उन्हीं की शिकायतों पर श्रम कार्यालयों में ध्यान नहीं दिया जाता।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!Hind Mazdoor Sabha: श्रमिकों की मुख्य मांगों पर बनी सहमति: राघवेंद्र

नोएडा पोस्ट
Hind Mazdoor Sabha: हिंद मजदूर सभा गौतबुद्ध नगर की अगुवाई में मजदूरों ने नोएडा के सेक्टर-3 स्थित श्रम कार्यालय के बाहर बेमियादी धरना प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में सैकड़ों मजदूर शामिल हुए।
संगठन के महामंत्री राघवेन्द्र सिंह ने बताया कि शाम को श्रम अधिकारियों ने सभी संगठनों को बातचीत के लिए बुलाया और 6 मुख्य मांगें मानने का आश्वासन दिया। मजदूरों की परेशानी यह है कि श्रम कार्यालयों में उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया जाता।
अब इन शिकायतों का निपटारा दो सप्ताह के भीतर करने का वादा किया गया। इसके अलावा भी 6 प्रमुख मांगों पर सहमति बन गई है।
जिनका रहा पूरा सहयोग
प्रदर्शन को सफल बनाने में अनमोल इंडस्ट्रीज इंम्प्लाइज यूनियन के नेता मुकेश कुमार राघव, सुखलाल, एचएमएस सुखलाल, एचएमएस महामंत्री रितेश कुमार झा, एटक के जिला महामंत्री कॉमरेड नईम अहमद, टीयूसीआई के महासचिव उदय चंद्र झा, सीटू महासचिव रामसागर, इंटक के जिला मंत्री संतोष कुमार तिवारी, ऐक्टू के जिला अध्यक्ष अमर सिंह, यूटीयूसी के नेता सुभाष, यूपीएलएफ के नेता एसएन पांडे आदि का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
बता दें कि जब कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए देश में लॉकडाउन लागू हुआ था, तब राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली से हजारों की तादाद में प्रवासी मजदूर अपने घरों को चल दिए थे। सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय कर जैसे-तैसे अपने गांव पहुंचे मजदूरों में ज्यादातर अब लौट आए हैं।
काम मिलने में अभी काफी मुश्किल
उनको काम मिलने में अभी काफी मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। बिल्डरों के पास पैसों की कमी है और ठेकेदार सस्ती दर पर मजदूर चाहते हैं। इससे मजदूरों का गुजारा मुश्किल से चल पा रहा है।
नोएडा और गाजियाबाद के बीच का लेबर चौक लॉक डाउन के दौरान बिल्कुल खाली था। अब फिर से गुलजार है। कई मज़दूर ऐसे भी हैं जो सुबह से शाम तक का वक्त काम की आस में ही गुजार दे रहे हैं, लेकिन उन्हें काम नहीं मिल पा रहा है।
मजदूरों की इसी मजबूरी का फायदा फैक्टरी मालिक उठाते हैं। और मजदूरों का तरह तरह से शोषण करते हैं। सरकार की श्रम विरोधी नीतियों के कारण श्रम कार्यालयों में भी उन्हें कोई राहत नहीं मिल पाती। शायद यही वजह है कि श्रमिकों को प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होना पड़ा।


