
Heart Transplant: पश्चिमी उत्तर प्रदेश और नोएडा क्षेत्र में पहली बार सफल हृदय प्रत्यारोपण कर 56 वर्षीय तपस कुमार डे को नया जीवन मिला। पंचकुला से डोनर हार्ट को नोएडा तक 20 किलोमीटर की दूरी 16 मिनट में तय कराई गई। गंभीर क्रॉनिक हार्ट फेलियर से जूझ रहे मरीज के लिए यह प्रक्रिया जीवन बचाने वाली साबित हुई।
Heart Transplant: कॉरिडोर से 16 मिनट में पहुंचा डोनर हार्ट
इंफोपोस्ट/Heart Transplant
नोएडा, 29 सितंबर, 2026: कार्डियक केयर के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज करते हुए फोर्टिस हॉस्पिटल नोएडा में पश्चिमी उत्तर प्रदेश और नोएडा क्षेत्र का पहला सफल हृदय प्रत्यारोपण किया गया। 56 वर्षीय तपस कुमार डे को नया जीवन मिला। अस्पताल के चेयरमैन-कार्डियक साइंसेज के नेतृत्व में डॉक्टरों की मल्टीडिसिप्लिनरी टीम ने यह जटिल ट्रांसप्लांट सर्जरी पूरी की।
मरीज कई वर्षों से क्रॉनिक हार्ट फेलियर से पीड़ित थे। उनकी स्थिति के कारण उन्हें बार-बार अस्पताल में भर्ती कराना पड़ता था और सांस फूलने की गंभीर समस्या बनी हुई थी, जो दवाओं से नियंत्रित नहीं हो रही थी। चिकित्सकीय आकलन के अनुसार तत्काल प्रत्यारोपण नहीं होने पर उनके बचने की संभावना केवल 10 प्रतिशत रह गई थी। उन्हें ट्रांसप्लांट की प्रतीक्षा सूची में रखा गया था और इस दौरान स्थिति स्थिर रखने के लिए दवाएं दी जा रही थीं।
डोनर हार्ट को समय पर पहुंचाने की चुनौती
इस बीच पंचकुला में एक डोनर हार्ट उपलब्ध हुआ। लेकिन उसे नोएडा तक पहुंचाना बड़ी चुनौती थी, क्योंकि डोनर हार्ट को सीमित समय के भीतर प्रत्यारोपित करना आवश्यक होता है। इसे ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश और हरियाणा पुलिस के सहयोग से ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया गया। डोनर हार्ट को गाजियाबाद स्थित हिंडन एयरपोर्ट तक हवाई मार्ग से पहुंचाया गया।
इसके बाद गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर की ट्रैफिक पुलिस की सहायता से एक विशेष ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया गया। इसमें हवाईअड्डा प्राधिकरणों और जिला प्रशासन का भी सहयोग मिला। इस समन्वित व्यवस्था के कारण डोनर हार्ट को हिंडन एयरपोर्ट से फोर्टिस नोएडा तक पहुंचाने में केवल 16 मिनट लगे। इस दौरान हर स्तर पर समय और तालमेल को प्राथमिकता दी गई।
सर्जिकल टीम ने तत्काल शुरू की प्रत्यारोपण प्रक्रिया
डोनर अंग की उपयोगिता समय बीतने के साथ प्रभावित होती है, इसलिए सर्जिकल टीम को डोनर हार्ट के अस्पताल पहुंचते ही ऑपरेशन के लिए तैयार रहना था। श्री डे को ऑपरेशन थिएटर में लाया गया और उन्हें प्रत्यारोपण के लिए तैयार किया गया। डोनर हार्ट अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों की टीम ने मरीज का रोगग्रस्त हृदय निकाला, जो काफी खराब स्थिति में था। इसके बाद डोनर हार्ट को सावधानीपूर्वक लगाया गया और मरीज की प्रमुख हृदय धमनियों से जोड़ा गया।
प्रत्यारोपित हृदय में रक्त प्रवाह बहाल होना और धड़कन शुरू होना प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण था। डॉक्टरों की टीम ने पूरी निगरानी में इस कार्य को पूरा किया। सर्जिकल टीम की दक्षता के कारण ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया लगभग एक घंटे में पूरी कर ली गई। इसके बाद मरीज को उनकी मेडिकल हिस्ट्री और गंभीर स्थिति को देखते हुए विशेषज्ञों की निगरानी में रखा गया।
चौबीस घंटे की निगरानी में स्थिर किया गया मरीज
ऑपरेशन के बाद मरीज को स्पेशलाइज्ड इंटेंसिव केयर मैनेजमेंट में रखा गया। विशेषज्ञों की टीम ने चौबीस घंटे निगरानी के माध्यम से उनके रक्तप्रवाह को स्थिर बनाए रखने पर ध्यान दिया। ऑर्गन रिकवरी में मदद करने के लिए उचित दवाओं का इस्तेमाल किया गया और मरीज को सुगमतापूर्वक रिकवरी की दिशा में आगे बढ़ाया गया। इस दौरान प्रत्यारोपित हृदय में रक्त प्रवाह और धड़कनों पर लगातार नजर रखी गई।
प्रत्यारोपण के बाद तपस कुमार डे ने कहा कि जीवन का यह उपहार उनके लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है। उन्होंने डोनर परिवार के प्रति आभार जताते हुए कहा कि उनके परोपकार ने उन्हें एक बार फिर अपना जीवन जारी रखने का अवसर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि जिस समय वह और उनका परिवार उम्मीद खो चुके थे, उस समय डॉक्टरों की टीम ने अपना फर्ज निभाते हुए उन्हें यह कीमती उपहार दिया।
डॉक्टरों ने समय पर डोनर हार्ट पहुंचने को बताया अहम
डॉ. अजय कौल, चेयरमैन-कार्डियक साइंसेज, फोर्टिस हॉस्पिटल नोएडा ने कहा कि श्री डे का हृदय इतना कमजोर हो चुका था कि उस पर किसी दवा या प्रक्रिया का प्रभाव पड़ना संभव नहीं था। ऐसे में नया हृदय ही उन्हें जिंदा रखने का एकमात्र उपाय था। पंचकुला में डोनर हार्ट उपलब्ध होने के बाद हर मिनट महत्वपूर्ण था और उसे मृतक के शरीर से निकालकर नोएडा के ऑपरेशन थिएटर तक पहुंचाना चुनौतीपूर्ण कार्य था।
डॉ. अजय कौल के अनुसार सर्जरी सही ढंग से पूरी हुई और अब मरीज स्वस्थ होने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल सर्जिकल सफलता तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे नोएडा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मरीजों को हृदय प्रत्यारोपण के लिए दूसरे शहरों तक जाने की आवश्यकता कम हो सकती है। उन्होंने पूरी प्रक्रिया में शामिल मेडिकल टीम के समन्वय और प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया।
पुलिस और एयरपोर्ट अधिकारियों के समन्वय से बनी ग्रीन कॉरिडोर व्यवस्था
मोहित सिंह, रीजनल डायरेक्टर, फोर्टिस हॉस्पिटल नोएडा ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश और नोएडा में पहला सफल हृदय प्रत्यारोपण अस्पताल तथा क्षेत्र के मरीजों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उनके अनुसार यह उपलब्धि डॉक्टरों, क्रिटिकल केयर स्टाफ, ट्रैफिक पुलिस और एयरपोर्ट अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय तथा टीमवर्क से संभव हुई। डोनर हार्ट को समय पर अस्पताल पहुंचाने में सभी संबंधित टीमों ने तत्परता दिखाई।
उन्होंने डोनर परिवार की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। अपने प्रियजन के अंगों को दान करने का निर्णय कठिन परिस्थिति में लिया गया बड़ा फैसला होता है। इस मामले में परिवार की सहमति और तत्परता के कारण डोनर हार्ट को समय पर जरूरतमंद मरीज तक पहुंचाया जा सका। अस्पताल ने इस पूरी प्रक्रिया में सहयोग देने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।
फोर्टिस हेल्थकेयर के नेटवर्क में व्यापक स्वास्थ्य सेवाएं
फोर्टिस हेल्थकेयर लिमिटेड भारत में एकीकृत स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने वाली प्रमुख संस्थाओं में शामिल है। कंपनी के हेल्थकेयर वर्टिकल में अस्पताल, डायग्नोस्टिक्स तथा डे केयर विशेषज्ञ सेवाएं शामिल हैं। कंपनी के नेटवर्क में देशभर के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 36 हेल्थकेयर सुविधाएं शामिल हैं। इसके नेटवर्क में 6,150 से अधिक ऑपरेशनल बेड और 400 डायग्नोस्टिक्स लैब्स शामिल हैं।
आईएचएच हेल्थकेयर मरीजों की देखभाल के भविष्य को नया स्वरूप देने के लिए लगातार प्रयास करने वाली वैश्विक स्वास्थ्य सेवा संस्था के रूप में काम करती है। इसके नेटवर्क में विभिन्न देशों में अस्पताल और हेल्थकेयर सुविधाएं शामिल हैं। कंपनी प्राथमिक और एंबुलेटरी केयर, क्वाटर्नरी केयर, डायग्नोस्टिक्स, इमेजिंग, रिहैबिलिटेशन, टेलीहेल्थ और होम केयर जैसी सेवाओं का संचालन करती है।
सफल प्रत्यारोपण ने क्षेत्र में नई उम्मीद जगाई
नोएडा में हुए इस सफल हृदय प्रत्यारोपण ने गंभीर हृदय रोग से जूझ रहे मरीजों के लिए क्षेत्रीय स्तर पर उपचार की नई संभावना सामने रखी है। इस प्रक्रिया में मरीज की गंभीर स्थिति, डोनर हार्ट की उपलब्धता, समयबद्ध परिवहन, ग्रीन कॉरिडोर और अस्पताल की सर्जिकल तथा क्रिटिकल केयर टीम के बीच लगातार समन्वय की आवश्यकता रही। इन सभी चरणों को निर्धारित समय में पूरा किया गया।
इस मामले में डोनर परिवार के निर्णय से लेकर हृदय को समय पर अस्पताल पहुंचाने और प्रत्यारोपण के बाद मरीज की निगरानी तक कई स्तरों पर सामूहिक प्रयास किए गए। अस्पताल के अनुसार मरीज अब स्वस्थ होने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। सफल प्रक्रिया ने नोएडा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हृदय प्रत्यारोपण की सुविधा को लेकर नई उम्मीद पैदा की है।


