Gyanesh Kumar Protest: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सोमवार को दिल्ली, पटना, जयपुर, हैदराबाद, श्रीनगर समेत कई शहरों में प्रदर्शन हुए। विपक्षी दलों और अन्य संगठनों ने चुनाव आयोग के कामकाज तथा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर सवाल उठाए। इस बीच ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर याचिका सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई है।
Gyanesh Kumar Protest: चुनाव आयोग के कामकाज पर बढ़ा विवाद
इंफोपोस्ट/Gyanesh Kumar Protest
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सोमवार को देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन हुए। दिल्ली, पटना, इलाहाबाद, जयपुर, हैदराबाद, श्रीनगर, लखनऊ, पुणे, कोलकाता और गुवाहाटी समेत कई शहरों में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, सीपीआई तथा नागरिक संगठनों से जुड़े लोगों ने प्रदर्शन किया। कई जगह पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, जबकि जयपुर में पुलिस की ओर से वाटर कैनन के इस्तेमाल की जानकारी सामने आई।
विवाद की पृष्ठभूमि चुनाव आयोग के भीतर निर्णय प्रक्रिया और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर से जुड़े सवालों से बनी। एक खोजी रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले दस महीनों में आयोग के फैसलों और कुछ प्रक्रियाओं को लेकर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज की थीं। दोनों आयुक्तों की आपत्तियों में नए मतदाताओं के पंजीकरण, नाम हटाने और मतदाता डेटाबेस से जुड़े मुद्दे शामिल बताए गए।
Gyanesh Kumar Protest: प्रदर्शनों में विपक्षी दलों ने उठाए सवाल
दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेता अलका लांबा ने मुख्य चुनाव आयुक्त और केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। भोपाल में मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने लोकतंत्र और मतदान के अधिकार से जुड़े सवालों को लेकर प्रदर्शन किया। तेलंगाना के हैदराबाद में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इंदिरा गांधी की प्रतिमा से चुनाव आयोग के कार्यालय तक मार्च निकाला।
जयपुर में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने रैली निकाली। राजस्थान विधानसभा में विपक्ष के नेता टीका राम जूली ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आरोप लगाए। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। लखनऊ में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने हजरतगंज में प्रदर्शन किया और पुलिस ने कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।
Gyanesh Kumar Protest: कई शहरों में प्रदर्शन और हिरासत
गुवाहाटी में भी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन हुआ। महाराष्ट्र के पुणे, पश्चिम बंगाल के कोलकाता और जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में भी विरोध प्रदर्शन किए गए। श्रीनगर में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन रोकने के लिए कांग्रेस कार्यालय के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। कर्नाटक के हासन में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी प्रदर्शन किया।
हासन में कांग्रेस सांसद श्रेयस एम पटेल ने मतदान के संवैधानिक अधिकार का उल्लेख करते हुए चुनाव आयोग की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आयोग के दो अधिकारियों की ओर से आंतरिक स्तर पर उठाई गई आपत्तियों के बाद आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर चिंता पैदा हुई है। वहीं इलाहाबाद में सिविल सोसाइटी की ओर से ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी और बर्खास्तगी की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया।
सीजेपी ने दो अक्टूबर के आंदोलन का ऐलान किया
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी ने भी आंदोलन तेज करने की घोषणा की है। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि दो अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में जेल भरो आंदोलन किया जाएगा। पार्टी की ओर से इससे पहले ज्ञानेश कुमार को 26 सितंबर तक इस्तीफा देने की मांग की गई थी।
सीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका को रविवार को गुवाहाटी में हिरासत में लिया गया था और सोमवार को उन्हें रिहा कर दिया गया। रांका ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना होगा और अब आंदोलन को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी सीजेपी के पास है। पार्टी ने दो अक्टूबर से देशव्यापी जेल भरो आंदोलन की चेतावनी भी दी है।
कांग्रेस ने लगाए गंभीर आरोप
कांग्रेस नेताओं ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त और केंद्र सरकार के खिलाफ अपने आरोपों को और तेज किया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि देशभर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग और विशेष रूप से ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किया। उन्होंने मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने का दावा भी किया।
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने एसआईआर की वैधानिकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया को लेकर गंभीर आपत्तियां हैं। कांग्रेस के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से भी ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और गिरफ्तार करने की मांग की गई। हालांकि ये आरोप राजनीतिक दलों की ओर से लगाए गए हैं और चुनाव आयोग ने अपने फैसलों को सर्वसम्मति से लिया गया बताया है।
सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा मामला
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने अन्य चुनाव आयुक्तों की मंजूरी के बिना चुनाव आयोग के नाम पर फैसले लिए। याचिका में ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग के साथ क्वो वारंटो की रिट जारी करने का आग्रह किया गया है।
याचिका में यह सवाल उठाया गया है कि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत आयोग को मिले सामूहिक निर्णय लेने के अधिकार का इस्तेमाल क्या मुख्य चुनाव आयुक्त अकेले कर सकते हैं। क्वो वारंटो रिट का इस्तेमाल सामान्यतः यह पूछने के लिए किया जाता है कि कोई व्यक्ति किस अधिकार के तहत सार्वजनिक पद पर बना हुआ है। याचिका में आयोग की निर्णय प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों की न्यायिक जांच की मांग की गई है।
तीन सदस्यीय आयोग में निर्णय की व्यवस्था
भारत में चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त के अलावा दो चुनाव आयुक्त होते हैं। फिलहाल ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त हैं, जबकि सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी चुनाव आयुक्त हैं। आयोग में किसी मुद्दे पर सदस्यों के बीच सहमति नहीं होने की स्थिति में निर्णय बहुमत के आधार पर लिया जाता है।
विवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि दो चुनाव आयुक्तों की ओर से पिछले दस महीनों में 14 बार आपत्तियां दर्ज किए जाने की बात सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार इन आपत्तियों में चुनावी सूची से जुड़े फैसलों और आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए गए थे। दूसरी ओर चुनाव आयोग ने कहा कि एसआईआर समेत पिछले एक वर्ष में लिए गए सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
एनडीए नेताओं ने किया ज्ञानेश कुमार का बचाव
विपक्षी दलों के आरोपों के बीच भारतीय जनता पार्टी और एनडीए के नेताओं ने ज्ञानेश कुमार का बचाव किया है। केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा कि चुनाव आयोग संवैधानिक रूप से स्वतंत्र संस्था है और उसके प्रमुख के इस्तीफे की मांग तथा चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक व्यवस्था के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
उत्तर प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी ने भी चुनाव आयोग के फैसलों को लेकर उठाए जा रहे सवालों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि 26 सितंबर को ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों की बैठक हुई थी तथा आयोग की ओर से साझा बयान जारी किया गया था। उनके अनुसार एसआईआर समेत महत्वपूर्ण फैसले पूरी सहमति से लिए गए। इस तरह ज्ञानेश कुमार को लेकर विवाद में विपक्ष के आरोप और सत्तापक्ष की ओर से दिया गया बचाव आमने-सामने है।
विवाद का केंद्र बना SIR
पूरे विवाद के केंद्र में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर भी है। इस प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची से जुड़े काम निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत किए जा रहे हैं।
चुनाव आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियों, देशभर में हो रहे प्रदर्शनों और सुप्रीम कोर्ट में पहुंची याचिका के कारण मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली को लेकर बहस तेज हुई है। फिलहाल इस विवाद में एक ओर विपक्षी दल इस्तीफे और कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, जबकि दूसरी ओर सरकार और एनडीए के नेता चुनाव आयोग की स्वतंत्रता तथा आयोग की ओर से फैसलों को सर्वसम्मति से लिए जाने की बात कह रहे हैं.


