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Guidelines on Bulldozer: बुलडोजर अवैध निर्माण पर कार्रवाई या कुछ और?

infopost September 4, 2024
Guidelines on Bulldozer

Guidelines on Bulldozer: सुप्रीम कोर्ट में बुलडोजर मामले पर सुनवाई चल रही है। और सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस पर एक गाइड लाइन बनाई जाएगी। मसला बड़ा गंभीर और टेढ़ा है। क्योंकि सॉलीसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि सरकार अपराधियों पर कार्रवाई के लिए बुलडोजर नहीं चला रही है। अवैध निर्माण पर कार्रवाई की जा रही है। उधर, नेता लोग तो यही कहते हैं कि हम अपराधियों और माफिया को दंडित करने के लिए बुलडोजर चला रहे हैं। लेकिन क्या बुलडोजर एक बीमारी है या किसी बीमारी का लक्षण?

Guidelines on Bulldozer: एक नया राजनीतिक विमर्श गढ़ने की तैयारी

इंफोपोस्ट डेस्क


Guidelines on Bulldozer: बात बुलडोजर चलाने की नहीं है। इसका असली मकसद राम मंदिर मुद्दा फेल होने के बाद एक नया राजनीतिक विमर्श गढ़े जाने की है। क्योंकि ध्रुवीकरण का एक नया माहौल बना कर भारतीय जनता पार्टी अपना राजनीतिक अस्तित्व बचाने के प्रयास में है। चुनाव नतीजों की बात करें, तो भारतय जनता पार्टी एक ढलान पर लुढ़क रही है। शायद इसीलिए वह सांप्रदायिकता फैला कर हिंदुत्व को दोबारा राजनीति की मुख्य धारा में लाना चाहती है।

तभी तो देश भर में लोगों पर अधिनायकवादी हमले किए जा रहे हैं। बुलडोजर की कार्रवाई उसी का एक हिस्सा है। लोकसभा चुनाव मन मुताबिक न जीत पाने के बाद भाजपा जनता पर काफी आक्रामक नजर आ रही है। देखा जाए तो एक महीने में ये अधिनायकवादी हमले काफी बढ़े हैं। जो तर्क दिया है सरकार ने कि हम अतिक्रमण हटाने के लिए बुलडोजर चलाते हैं। लेकिन आपका जो घर है, उसमें कोई अवैध निर्माण है या नहीं?

देश भर में कौन नहीं करता अवैध निर्माण?

Guidelines on Bulldozer: जिसका घर पांच या दस साल पुराना हो जाता है वह अपने घर में कुछ न कुछ बदलाव कर ही लेता है। या तो कोई बच्चा बड़ा हो गया तो उसको एक अलग कमरा चाहिए। तो वह आंगन जैसी खाली जगह पर एक कमरा बना लेगा। तो इसकी अनुमति के लिए वह आमतौर पर नगर निगम के पास नहीं जाता। शायद कोई भी नहीं जाता। इसके अलावा कुछ लोग तो अपनी बालकनी ही बढ़ा लेते हैं या कार अंदर रखने के लिए बिना किसी अनुमति के अपने गेट को ही थोड़ा आगे बढ़ा देते हैं। इस प्रकार देश भर में हर कोई कुछ न कुछ अवैध निर्माण कर ही लेता है।

और अगर किसी ने अवैध निर्माण नहीं भी किया है तो बुलडोजर चलने के बाद कैसे पता चलेगा कि अवैध निर्माण था या नहीं? इसका मतलब सरकार ने घोषित कर दिया तो कोई भी निर्माण अवैध निर्माण मान लिया जाएगा। इसका मतलब सरकार के पास एक एक्स्ट्रा जुडिशियल पावर यानी अतिरिक्त न्यायेतर शक्ति आ गई है, जिसका इस्तेमाल करके वह किसी के भी साथ कुछ भी कर सकती है। जैसे कि मैं सरकार में हूं और सुबह आपने मुझे नमस्ते नहीं किया तो शाम को मैं आपका घर गिरवा सकता हूं। ये जो एक्स्ट्रा पावर सरकार को मिल गई है वह बहुत खतरनाक है।

क्या सरकार से ये पावर वापस ले ली जाए?

तो क्या होना चाहिए? क्या सरकार से ये पावर वापस ले ली जाए? और उसे कहा जाए कि कोई भी अवैध निर्माण गिराना है तो अदालत से अनुमति लेकर आइए। इस स्थिति में बिल्डर क्या करेंगे? वे तो तीन मंजिल बननी है तो सात मंजित बना कर बेच देंगे। प्रशासन उनको रोक नहीं पाएगा। कोर्ट जाए प्रशासन। और बिल्डर आप तो जानते हैं कि उनके पास ज्यादा तेज वकील होते हैं। अवैध होर्डिंग की बात करें तो उस पर लिखा होता है कि फलां फलां कोर्ट से स्थगन मिला है उसे। स्टे लेकर अवैध होर्डिंग लगाने को भी प्रशासन नहीं रोक पाएगा।

यह एक ऐसी सिचुएशन है, जो बहुत ही जटिल है। शायद इसीलिए कोर्ट ने कहा है कि इस पर एक गाइड लाइन बनाएंगे। क्योंकि प्रशासन मक्कारी की हद तक जाकर एक सेलेक्टिव ऐक्शन ले रहा है। और कह रहा है कि उसने अवैध निर्माण किया था, इसलिए गिरा दिया। और जो किसी का बंगला गिराया है, उसे तब तक क्यों नहीं गिराया जब तक उसने कोई प्रदर्शन नहीं किया था? और उसी कॉलोनी में पचासों ऐसी ही बंगले हैं, उनमें किसी को नोटिस क्यों नहीं दिया और बुलडोजर क्यों नहीं भेजा?

अब आप कह सकते हैं कि अपराधी ही तो है जिसका बंगला गिराया गया। लेकिन अब अपराधियों के हाथ में पावर आ गई है। उदाहरण के लिए कभी अतीक अहमद पावरफुल आदमी था। अपनी पावर का इस्तेमाल करके वह अपने किसी दुश्मन का बंगला गिरवा सकता था। तो ये जो ज्यादा पावर है, वह व्यक्ति को ज्यादा करप्ट करती है। इसलिए जितनी ज्यादा पावर, उतना ज्यादा भ्रष्टाचार। तो इसका कुछ रास्ता निकालना जरूरी है। क्योंकि बुलडोजर एक ऐसी पावर है जिसे जहां चाहो लगा दो और जहां चाहो न लगाओ।

बुलडोजर एक तरह का संदेश देने की कोशिश

दरअसल, बुलडोजर एक ऐसे पैटर्न का हिस्सा है जो हम अपनी सोसायटी में देख रहे हैं। क्योंकि बुलडोजर एक तरह का संदेश देने की कोशिश है। आपको एक नरेटिव दिया गया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा था कि बंटोगे तो कटोगे। यानी अगर आप डिवाइड हुए तो लोग आपको काट देंगे। यानी लोग आपको काटने की तैयारी में बैठे हुए हैं। आपको मारने की तैयारी में बैठे हुए हैं।

एक खौफ, एक भय और एक फोविया निरंतर आपके अंदर पैदा किया जा रहा है। क्या सचमुच कोई आपको काटने की तैयारी कर रहा है? क्या आपको कोई कहीं काटता हुआ दिखा? लेकिन जब आपको कहा जाता है कि बंटोगे तो कटोगे तो यह ध्रुवीकरण का एक तरीका है। एक रणनीति है, जो पहली बार सामने नहीं आई है। कई देशों में इसका इस्तेमाल किया जा रहा है।

आखिर इस नफरत की दवा क्या है?

Guidelines on Bulldozer: स्लामोफोबिया एक तरह का तोता है जिसमें एक खास तरह की राजनीति की जान बसती है। लोकसभा चुनाव के परिणाम यह साबित कर चुके हैं कि मंदिर की राजनीति से कुछ नहीं होने वाला है। अब समाज को डराना पड़ेगा। तो नए सिरे से पोलराइजेशन शुरू हो रहा है।कहने का मतलब आपको काटने वाले आएंगे तो हम आपकी रक्षा करेंगे। उसके लिए आपको क्या करना है? मेरे साथ आ जाओ।

यानी भाजपा को वोट देकर जिता दो। जब आप भाजपा को जिता दोगे तो असल में कटोगे। आप नहीं कटोगे, आपकी जेब कटेगी। आपकी जेब काटने के कई औजार हैं। जीएसटी, महंगाई, बेरोजगारी आदि आदि। लेकिन यह मुद्दा भी फेल होता है तो भाजपा भी कोई और मुद्दा लेकर आएगी। क्योंकि राहुल गांधी लगातार कह रहे हैं कि नफरत का जवाब आपसी प्रेम ही हो सकता है।

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