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Exploitation and suppression: तो निजी कंपनियों के पालतू बन जाएंगे कर्मचारी?

October 8, 2020
Exploitation and suppression

Exploitation and suppression: श्रम कानूनों में संशोधन से शोषण का रास्ता साफ हो गया है। क्योंकि नियमित कर्मचारियों को कांट्रैक्ट पर करने की छूट मिल गई है। जिन्हें कंपनी जब चाहे नौकरी से निकाल सकती है।

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Exploitation and suppression

Exploitation and suppression: सरकार ने की नई पीढ़ी के शोषण और दमन की तैयारी

सी एस राजपूत


नई दिल्ली। Exploitation and suppression: नई पीढ़ी के शोषण और दमन की सरकार ने तैयारी कर ली है। श्रम कानून में संशोधन के बाद अब परमानेंट कर्मचारियों को कॉन्ट्रेक्ट पर लाने की छूट है। मतलब, निजी कंपनियों में जो भी कर्मचारी परमानेंट हैं, वे अब कॉन्ट्रेक्ट पर जाने की तैयारी कर लें।

कॉन्ट्रेक्ट भी ऐसा कि कंपनी प्रबंधन जब चाहे नो एंट्री लगा दे। नौकरी जाने के डर से कर्मचारी शोषण और दमन के शिकार होंगे। वे मानसिक बीमारी से भी नहीं बच पाएंगे। जरा सा बोले नहीं कि गई नौकरी। काम भी 10-12 घंटे लिया जाएगा।

वैसे भी गुजरात सरकार ने कर्मचारियों से 10-12 घंटे काम लेना शुरू कर दिया था। क्योंकि लॉक डाउन से घाटा होने का उसे बहाना मिल गया था। ओवरटाइम भी नहीं दिया जा रहा था। सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप कर अतिरिक्त काम लेने पर ओवरटाइम का भुगतान करने को कहा है।

कोर्ट भी कुछ नहीं कर पाएगा

परमानेंट कर्मचारियों को कॉन्ट्रेक्ट पर रखने के मामले में कोर्ट भी कुछ नहीं कर पाएगा। श्रम कानून में संशोधन कंपनियों को फायदा और कर्मचारियों को बंधुआ बनाने के लिए ही तो किया है। मतलब साफ है लोग भाजपा के हिन्दू मुस्लिम के खेल में फंस गए हैं।

उन्होंने खुद ही अपने बच्चों का भविष्य पूंजीपतियों के यहां गिरवी रख दिया है। इसके लिए युवा वर्ग भी कम जिम्मेदार नहीं है। युवा वर्ग भी जाति धर्म में फंसकर अपना जीवन बर्बाद कर रहा है। उसे वह दिखाई दे रहा है जो सरकार दिखा रही है।

दरअसल, मोदी के प्रधानमंत्री बनते ही सबसे अधिक रोजी और रोटी प्रभावित हुई है। मोदी सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष होता रहा। युवाओं को सचेत किया जाता रहा। पर युवा वर्ग पीएम मोदी की चिकनी चुपड़ी बातों में आता रहा।

समाज भी कम जिम्मेदार नहीं

युवाओं की जो अब दुर्गति होने वाली है इसके लिए समाज भी कम जिम्मेदार नहीं है। लोग अपने बच्चों के भविष्य के प्रति चिंतित नहीं हैं। वे राजनीतिक दलों के एजेंडों में उलझे रहे। लोगों को लग रहा है कि मोदी देश के उद्धारक हैं।

मेरी बात कुछ लोगों को बुरी लग सकती है। लेकिन इसमें सच्चाई है। किसान मजदूर और छोटे व्यापारियों के मामले में भी गलत हुआ है। पीएम मोदी ने देश कुछ पूंजीपतियों के यहां गिरवी रख दिया है। नई पीढ़ी का भविष्य बर्बाद करने की व्यवस्था कर दी है।

अब नहीं संभले तो कब संभलेंगे? अपने मान सम्मान और अधिकार की लड़ाई लड़ने के लिए तैयार होना होगा। मैं आज के हालात के लिए विपक्ष को भी कम जिम्मेदार नहीं मानता। आज युवाओं को आगे बढ़ कर क्रांति करने की जरूरत है।

राजनीतिक दलों के भरोसे देश को नहीं छोड़ा जा सकता

इन राजनीतिक दलों के भरोसे देश को नहीं छोड़ा जा सकता। सब सत्ता के भूखे हैं। अब जरूरत है कि अच्छे आगे बढ़ें। अराजक लोगों को ललकारना होगा। वोटबैंक के लिए देश में जाति और धर्म के नाम पर लड़ाया जा रहा है।

सचेत होने की जरूरत है। नहीं संभले तो आने वाली पीढ़ी माफ नहीं करेगी। देश बहुत नाजुक दौर से गुजर रहा है। कुछ बच्चे भुखमरी से मारे जा रहे हैं। कुछ युवा रोजगार न मिलने पर आत्महत्या कर रहे हैं। कुछ रोजगार छिनने से परेशान हैं।

कुछ को मारने की व्यवस्था निजी कंपनियों में कर दी गई है। कोरोना से मरने वालों को तो कोई गिन ही नहीं रहा है। देश में जिम्मेदारी के पद पर रहने वाले लोग जनविरोधी नीतियों में शामिल हो रहे हैं। न्यायपालिका, विधायिका, कार्यपालिका और मीडिया जनता के लिए नहीं है।

संविधान को बचाने वाले ये तंत्र सरकार के लिए काम कर रहे हैं। अब जनता को ही विपक्ष बनने की जरूरत है। निजी स्वार्थ छोड़ कर देश और समाज के लिए लड़ने की जरूरत है। क्या आप इसके लिए तैयार हैं? यदि हां तो आगे बढ़िए। जनविरोधी नीतियों का विरोध कीजिए।

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