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क्या आप जानते हैं, मंगल कार्यों में नारियल क्यों फोड़ते हैं?

August 18, 2020
A2

हमारी सभ्यता और संस्कृति का विकास मनीषियों के शोध और अध्ययन से हुई है। हमारी हर परंपरा का कोई न कोई विशेष कारण होता है और होता है उसका कोई न कोई वैज्ञानिक आधार। इस आधार को समझे बिना कुछ लोग परंपराओं को मानने से हिचकते हैं। इसलिए उनके बारे में जानना जरूरी है।

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नारियल की बात करें, तो चाहे पूजा हो या नए घर का गृह प्रवेश, नई गाड़ी या नया बिज़नेस किसी भी कार्य का शुभारंभ नारियल फोड़कर किया जाता है। नारियल को भारतीय सभ्यता में शुभ और मंगलकारी माना गया है। इसलिए पूजा-पाठ व मंगल कार्यों में इसका उपयोग किया जाता है।

हिंदू परंपरा में नारियल सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक है। नारियल भगवान गणेश को चढ़ाया जाता है और फिर प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। नारियल इस धरती के सबसे पवित्र फलों में एक है। इसलिए इस फल को लोग भगवान को चढ़ाते हैं।

आइए जानते हैं कि क्यों आखिर किसी भी काम को शुरू करने से पहले नारियल क्यों फोड़ा जाता है। ऋषि विश्वामित्र को नारियल का निर्माता माना जाता है। इसकी ऊपरी सख्त सतह इस बात को दर्शाती है कि किसी भी काम में सफलता हासिल करने के लिए आपको मेहनत करनी होती है।

नारियल में एक सख्त सतह और फिर एक नर्म सतह होती है। फिर इसके अंदर पानी होता है जो बहुत पवित्र माना जाता है। इस पानी में किसी भी तरह की कोई मिलावट नहीं होती है। नारियल भगवान गणेश का पसंदीदा फल है। इसलिए नया घर या नई गाड़ी लेने पर फोड़ा जाता है। इसका पवित्र पानी जब चारों तरफ फैलता है तो नकारात्मक शक्तियां दूर हो जाती हैं।

नारियल तोड़ने का मतलब अपने अहम को तोड़ना है। नारियल इंसान के शरीर को प्रदर्शित करता है और जब आप इसे तोड़ते हैं तो इसका मतलब है कि आपने खुद को ब्रह्मांड में सम्मिलित कर लिया है। नारियल में मौजूद तीन चिन्ह, भगवान शिव की आंखें मानी जाती हैं। इसलिए कहा जाता है कि यह आपकी हर मनोकामनाएं पूरी करता है।

नारियल को संस्कृत में ‘श्रीफल’ कहा जाता है और श्री का अर्थ लक्ष्मी है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, लक्ष्मी के बिना कोई भी शुभ काम पूर्ण नहीं होता है। इसीलिए शुभ कार्यों में नारियल का इस्तेमाल अवश्य होता है। नारियल के पेड़ को संस्कृत में ‘कल्पवृक्ष’ भी कहा जाता है। ‘कल्पवृक्ष’ सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करता है।

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