Anti-incumbency wave: दुनिया भर में जनता सत्ता के खिलाफ मतदान कर रही है। नेपाल में सत्ता के खिलाफ माहौल है। फ्रांस में भी मैक्रोन के खिलाफ माहौल बन गया है। कुल मिलाकर दुनिया के 55 से ज्यादा देशों में चुनाव की बयार बह रही है। ईरान की सत्ता के खिलाफ जनता एकजुट है। यूके की बात करें तो वहां 650 सीटों में 412 सीटें विपक्षी लेबर पार्टी को 14 साल बाद मिली हैं। इनमें 29 सांसद भारतीय मूल के हैं। यही नहीं, 242 तो महिलाओं ने जीत दर्ज की है। ऋषि सूनक की कंजरवेटिव पार्टी का तो दो सौ वर्षों में सबसे खराब प्रदर्शन रहा है। भारत में भी भयंकर बईमानी सत्ता पक्ष ने न की होती तो विपक्ष 400 सीटें पार कर जाता।
Anti-incumbency wave: भारत में खत्म हुआ मोदी का जादू
इंफोपोस्ट डेस्क
Anti-incumbency wave: भारत के चुनाव परिणाण की तुलना हम यूके से कर सकते हैं। मोदी के 20 से ज्यादा मंत्री तो 96 सांसद चुनाव हार गए हैं। सबसे बड़ी बात यह कि मोदी ने जहां जहां चुनाव प्रचार किया, वहां वहां 62 प्रतिशत प्रत्याशियों की लुटिया डूब गई है। कहने का मतलब यह कि मोदी मैजिक इस चुनाव में कहीं भी नजर नहीं आया। भाजपा में भी 106 तो भगोड़े जीते हैं। असली भाजपा को तो मात्र 134 सीटें मिली हैं। ऋषि सूनक ने तो पूरी साफगोई से अपनी हार को स्वीकार किया है, लेकिन दो बैसाखियों पर खड़े मोदी साहब का घमंड तो अभी भी सातवें आसमान पर है।
भारतीय सदन का हाल यह है कि लोकसभा में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अग्निवीरों के बारे में जो सफाई दी, वह सरासर झूठ साबित हुई है। उन्होंने अग्निवीरों के लिए जिस क्षतिपूर्ति की बात की थी, वह कोई क्षतिपूर्ति नहीं बीमा का क्लेम मिला था। अग्निवीरों की हालत इतनी खराब है कि हाल ही में एक अग्निवीर ने आत्महत्या कर ली थी। अग्निवीर योजना से हमारी सेना का मनोबल गिर रहा है, क्योंकि अग्निवीरों को तमाम मनोवैज्ञानिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि आर्थिक तंगी से परेशान होकर इन्हीं अग्निवीरों में कुछ देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त हो सकते हैं। तो आखिर सरकार इस संकट से कैसे निपट पाएगी?
गोदी मीडिया भी कम जिम्मेदार नहीं
गोदी मीडिया ने देश के लोगों को अंधेरे में रखा। कभी भी सच को सामने नहीं आने दिया। लगातार सच पर पर्दा डालने में लगा रहा। उससे सरकार तो गुमराह हुई ही, आम जनता का भी गोदी मीडिया से भरोसा उठ गया। अब लोगों के लिए सोशल मीडिया जानकारी का स्रोत बन गया। शायद यही वजह रही कि गोदी मीडिया सरकार के लिए कुछ भी नहीं कर पाया। उसका यह कदम आत्मघाती साबित हुआ।
एक इंटरनेशनल रिपोर्ट की बात करें, तो 2022 से गोदी मीडिया की ग्रोथ घटने लगी थी। रिपोर्ट के मुताबिक, अब गोदी मीडिया की ग्रोथ घट कर आठ प्रतिशत पर आ गई है, जबकि ग्रोथ के मामले में सोशल मीडिया उसका डबल यानी 16 प्रतिशत पर है। चुनाव परिणाम से पहले गोदी मीडिया मोदी के सुर में सुर मिला कर चार सौ पार का नारा लगा रहा था। लेकिन चुनाव परिणाम आने के बाद गोदी मीडिया की बची खुची साख मिट्टी में मिल गई है। यह देश का दुर्भाग्य है कि लोगों तक सच पहुंचाने वाले सोशल मीडिया को कोई सरकारी मदद नहीं मिलती। जबकि झूठ फैलाने वाले गोदी मीडिया के मालिकों पर आपके टैक्स के अरबों रुपये पानी की तरह बहाए जाते हैं।
राहुल ने सदन में मोदी, भाजपा और संघ को बताया हिंसक
Anti-incumbency wave: राहुल के एक बयान से देश भर में नया विमर्श शुरू हो गया है। लोकसभा में राहुल गांधी ने जब मोदी, भाजपा और संघ को हिंसक बताया तो मोदी तिलमिला गए। उन्होंने राहुल के बयान को हिंदू विरोधी बता दिया। जबकि राहुल गांधी ने तुरंत ही अपने बयान पर स्पष्टीकरण दे दिया था। लेकिन राहुल गांधी के बयान को भाजपा का आईटी से लगातार तोड़ मरोड़ कर पेश कर रहा है। गोदी मीडिया भी इसी सुर में सुर मिला रहा है।
यही नहीं, कुछ पालतू कथित संत महात्मा भी राहुल गांधी का विरोध कर रहे हैं। दरअसल, हमारे शास्त्रों में हिंदू धर्म जैसा कुछ भी नहीं है। सनातन का आधार हमारे वेद, पुराण, उपनिषद, गीता, महाभारत और रामायण हैं। इन ग्रंथों में लिखी बातों का पालन मोदी, भाजपा और संघ की ओर से नहीं किया जा रहा है। इसी आधार पर राहुल गांधी ने लोकसभा में कहा था कि ये लोग हिंदू नहीं हैं। वास्तव में, हिंदू उन्हें कहा जाता है जो सिंधु नदी के पार वाले भूभाग पर रहते हैं। इस आधार पर तो मुसलमान भी हिंदू ही हैं। लेकिन चुनाव के दौरान हिंदुओं और मुसलमानों में नफरत पैदा की गई। और यही नफरत हिंसा का सबब बनती है। तभी तो राहुल गांधी एक खास समूह को हिंसक बता रहे हैं, न कि हिंदुओं को। आपको क्या लगता है, जरूर बताएं।


