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स्ट्रीट डॉग फीडर्स पर हमले, धमकी और झूठे केस—एनिमल एक्टिविस्ट्स का बड़ा खुलासा

infopost January 12, 2026
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नोएडा। देश में पशुओं के खिलाफ बढ़ती क्रूरता के साथ-साथ पशु अधिकार कार्यकर्ताओं (एनिमल एक्टिविस्ट्स) के खिलाफ हिंसा में भी लगातार इज़ाफ़ा हो रहा है। यह गंभीर आरोप एनिमल एक्टिविस्ट्स ने नोएडा मीडिया क्लब में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान लगाए।

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए पशु अधिकार कार्यकर्ता और फ़िल्ममेकर संक्षय बब्बर तथा लोकप्रिय टीवी सेलेब्रिटी व पशु अधिकार कार्यकर्ता करुणा ने कहा कि आवारा जानवरों को हटाने के नाम पर सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेशों की गलत व्याख्या के चलते ज़मीनी स्तर पर हालात बेहद चिंताजनक हो गए हैं।

स्ट्रीट डॉग फीडर्स के खिलाफ बढ़ी हिंसा और उत्पीड़न

संक्षय बब्बर ने बताया कि हाल के दिनों में स्ट्रीट डॉग फीडर्स के खिलाफ हिंसा, धमकी, झूठी शिकायतों और प्रशासनिक कार्रवाइयों में तेज़ी से बढ़ोतरी हुई है। सिर्फ जानवर ही नहीं, बल्कि वे नागरिक भी उत्पीड़न का शिकार हो रहे हैं, जो बेज़ुबान जानवरों को भोजन देकर अपना मानवीय दायित्व निभा रहे हैं।

उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा पर चिंता जताई। बब्बर के अनुसार, जो महिलाएं जानवरों को खाना खिलाती हैं और उनकी सुरक्षा करती हैं, वे अब भीड़ द्वारा हमलों, यौन हिंसा के प्रयासों और मानसिक उत्पीड़न का सामना कर रही हैं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में पेश किए गए दस्तावेज़ी सबूत

प्रेस कॉन्फ्रेंस में वे पशु अधिकार कार्यकर्ता भी मौजूद थे, जो सिर्फ जानवरों को खाना देने के कारण हिंसा और उत्पीड़न का शिकार बने। टीवी सेलेब्रिटी व एनिमल एक्टिविस्ट करुणा ने वर्चुअल माध्यम से जुड़कर अपनी बात रखी।

इस दौरान वीडियो फुटेज, ऑडियो रिकॉर्डिंग, शिकायत पत्र, नोटिस, एफआईआर और अन्य दस्तावेज़ी सबूत मीडिया के सामने प्रस्तुत किए गए।

देश के कई हिस्सों से सामने आए हिंसा के मामले

एनिमल एक्टिविस्ट्स ने देश के विभिन्न हिस्सों से सामने आए कई गंभीर मामलों का ज़िक्र किया।

  • दिल्ली के हरिनगर में सामुदायिक कुत्ते की तलाश कर रही मां-बेटी को घेरकर पीटा गया, उन पर पानी डाला गया, वस्तुएं फेंकी गईं और यौन हमले का प्रयास किया गया।

  • दिल्ली की गीता कॉलोनी में एक महिला और उसकी 17 वर्षीय बेटी पर कुत्ते को खाना खिलाने के कारण लोहे की रॉड से हमला किया गया।

  • उत्तर प्रदेश के गाज़ियाबाद और मध्य प्रदेश के ग्वालियर में महिला फीडर्स और उनके परिवारों पर सार्वजनिक रूप से हमले किए गए।

पशु क्रूरता का डरावना पैटर्न आया सामने

संक्षय बब्बर ने बताया कि देश में पशु क्रूरता का एक स्पष्ट और बेहद डरावना पैटर्न उभरकर सामने आया है। इसमें कुत्तों की पीट-पीटकर हत्या, एसिड अटैक, सामूहिक रूप से ज़हर देना, पिल्लों को घसीटना या कुचलना और नसबंदी किए गए कुत्तों को मरने के लिए छोड़ देना जैसी अमानवीय घटनाएं शामिल हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि महिला फीडर्स को जानबूझकर निशाना बनाना, भीड़ मानसिकता और अदालत के फैसलों की गलत व्याख्या इस हिंसा को बढ़ावा दे रही है। जबकि सुप्रीम कोर्ट का हालिया आदेश न तो पशुओं को भोजन देने पर रोक लगाता है और न ही किसी प्रकार की हिंसा को वैध ठहराता है।

सख़्त कार्रवाई और सुरक्षा की मांग

एनिमल एक्टिविस्ट्स ने दोषियों के खिलाफ सख़्त कानूनी कार्रवाई और महिला फीडर्स को तत्काल सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है।

संक्षय बब्बर ने कहा कि इस मुद्दे से जुड़े संवैधानिक, कानूनी और मानवीय पहलुओं पर सुप्रीम कोर्ट में अभी सुनवाई जारी है। ऐसे में ज़मीनी हकीकत और तथ्य सामने लाना बेहद ज़रूरी हो गया है। उन्होंने यह भी बताया कि पशु अधिकार कार्यकर्ताओं के खिलाफ होने वाली हिंसा के अधिकांश मामले कभी दर्ज ही नहीं हो पाते।

बब्बर के अनुसार, 7 नवंबर 2025 को आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले की गलत व्याख्या के बाद यह संकट और गहरा गया है, जिसका खामियाज़ा न सिर्फ जानवरों बल्कि उन्हें बचाने वाले इंसानों को भी भुगतना पड़ रहा है।

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