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Acupressure therapy method: हजारों साल पुरानी थेरेपी की बढ़ती लोकप्रियता

infopost May 24, 2026
Acupressure therapy method

Acupressure therapy method: एक्यूप्रेशर चिकित्सा पद्धति का इतिहास, विकास और आधुनिक महत्व जानिए। कैसे बिना दवा और सर्जरी के यह थेरेपी तनाव, दर्द और अनिद्रा में राहत देने का दावा करती है।

Acupressure therapy method: बिना दवा और सर्जरी के इलाज का दावा

इंफोपोस्ट न्यूजडेस्क/Acupressure therapy method


आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में लोग तनाव, अनिद्रा और शारीरिक दर्द जैसी समस्याओं से तेजी से जूझ रहे हैं। ऐसे में वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों की ओर लोगों का रुझान बढ़ा है। इन्हीं में से एक है — एक्यूप्रेशर चिकित्सा पद्धति। यह ऐसी थेरेपी मानी जाती है, जिसमें शरीर के विशेष बिंदुओं पर दबाव डालकर विभिन्न समस्याओं में राहत देने का दावा किया जाता है।

एक्यूप्रेशर को लेकर लोगों के मन में कई सवाल भी हैं। क्या यह वास्तव में प्रभावी है? क्या इसके पीछे कोई वैज्ञानिक आधार है? या यह केवल पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित उपचार पद्धति है? आइए जानते हैं इसका इतिहास, विकास और आधुनिक महत्व।

चीन से हुई शुरुआत

एक्यूप्रेशर की शुरुआत लगभग 5000 वर्ष पुरानी चीनी चिकित्सा पद्धति से मानी जाती है। इसे Traditional Chinese Medicine (TCM) का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। चीन के प्राचीन ग्रंथ Huangdi Neijing यानी “येलो एम्परर का क्लासिक” में पहली बार शरीर के ऊर्जा मार्गों और विशेष बिंदुओं का उल्लेख मिलता है।

चीनी मान्यता के अनुसार मानव शरीर में “Qi” यानी ऊर्जा प्रवाहित होती है। जब इस ऊर्जा का संतुलन बिगड़ता है या उसका प्रवाह बाधित होता है, तब शरीर में बीमारियां उत्पन्न होने लगती हैं। एक्यूप्रेशर में शरीर के विशेष बिंदुओं पर दबाव डालकर इसी ऊर्जा प्रवाह को संतुलित करने का प्रयास किया जाता है।

एशिया से दुनिया तक पहुंची पद्धति

समय के साथ यह चिकित्सा पद्धति चीन से निकलकर जापान, कोरिया और भारत सहित कई देशों तक पहुंची। जापान में इसका विकास “Shiatsu” थेरेपी के रूप में हुआ, जबकि भारत में इसे योग और आयुर्वेद जैसी पारंपरिक प्रणालियों के साथ जोड़कर देखा गया।

20वीं सदी में पश्चिमी देशों में भी एक्यूप्रेशर को पहचान मिलने लगी। खासतौर पर 1970 के दशक में अमेरिकी राष्ट्रपति Richard Nixon की चीन यात्रा के बाद पश्चिमी दुनिया का ध्यान चीनी चिकित्सा पद्धतियों की ओर गया। इसके बाद एक्यूप्रेशर और एक्यूपंक्चर पर कई वैज्ञानिक शोध शुरू हुए।

आधुनिक चिकित्सा में बढ़ा उपयोग

आज एक्यूप्रेशर को पूरी तरह मुख्यधारा चिकित्सा का विकल्प नहीं माना जाता, लेकिन इसे Complementary Therapy यानी पूरक चिकित्सा के रूप में अपनाया जा रहा है। कई लोग तनाव, सिरदर्द, मांसपेशियों के दर्द, नींद की समस्या और पाचन संबंधी परेशानियों में इसका उपयोग कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि एक्यूप्रेशर शरीर के नर्वस सिस्टम को उत्तेजित कर दर्द और तनाव को कम करने में मदद कर सकता है। हालांकि इसकी प्रभावशीलता को लेकर वैज्ञानिक समुदाय में अभी भी व्यापक शोध जारी हैं।

विवाद और सीमाएं भी मौजूद

एक्यूप्रेशर को लेकर कई विवाद भी हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि इसे हर बीमारी का इलाज मानना सही नहीं होगा। गंभीर बीमारियों में केवल वैकल्पिक चिकित्सा पर निर्भर रहना खतरनाक हो सकता है।

इसके अलावा वैज्ञानिक प्रमाण अभी सीमित माने जाते हैं और गलत तकनीक से नुकसान भी हो सकता है। इसलिए प्रशिक्षित विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी माना जाता है।

भारत में तेजी से बढ़ रही लोकप्रियता

भारत में हाल के वर्षों में एक्यूप्रेशर तेजी से लोकप्रिय हुआ है। छोटे शहरों तक इसके क्लीनिक खुलने लगे हैं। ऑनलाइन ट्रेनिंग और कोर्स के जरिए लोग इसे घरेलू उपचार के रूप में भी सीख रहे हैं।

सरकार भी Ministry of AYUSH के माध्यम से वैकल्पिक चिकित्सा प्रणालियों को बढ़ावा दे रही है, जिससे एक्यूप्रेशर जैसी पद्धतियों को नई पहचान मिल रही है।

परंपरा और विज्ञान के बीच संतुलन जरूरी

Acupressure therapy method: एक्यूप्रेशर केवल एक चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि शरीर को ऊर्जा प्रणाली के रूप में देखने वाला एक दर्शन भी माना जाता है। हजारों वर्षों पुरानी यह तकनीक आज भी आधुनिक जीवनशैली में अपनी जगह बनाए हुए है।

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि परंपरागत ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है, ताकि लोग सुरक्षित और प्रभावी उपचार का लाभ उठा सकें।

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