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Helicopter accident: पहाड़ों पर क्यों क्रैश होते हैं हेलीकॉप्टर?

October 18, 2022
Helicopter accident

Helicopter accident: केदार घाटी में हेलीकॉप्‍टर क्रैश हो गया। इस हादसे में पायलट समेत सात लोगों की मौत हो गई। यात्री गुजरात और तमिलनाडु के रहने वाले थे। देश भर में शोक की लहर है। जानते हैं कि पहाड़ों पर क्यों क्रैश होते हैं हेलीकॉप्टर?

Helicopter accident: केदारघाटी में 12 सालों में सात बार हेलीकॉप्‍टर क्रैश

इंफोपोस्ट न्यूज डेस्क

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Helicopter accident: केदार घाटी में हेलीकॉप्‍टर क्रैश का यह पहला मामला नहीं है। पिछले 12 सालों में केदारघाटी में सात बार हेलीकॉप्‍टर क्रैश हुए हैं। कुल 26 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें सेना के 20 जवान भी शहीद हुए थे।

बारह साल पहले 2010 में केदारनाथ धाम में प्राइवेट हेलीकॉप्टर के पंखे से कटकर एक स्थानीय व्यक्ति की मौत हो गई थी। इसी प्रकार 2013 में 16 और 17 जून को केदारनाथ में भारी तबाही आई थी। केंद्र सरकार ने वायु सेना को रेस्क्यू के लिए भेजा था। 19 जून 2013 को रेस्क्यू के दौरान जंगलचट्टी में एक हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस दुर्घटना में जनहानि नहीं हुई थी।

गौरीकुंड और रामबाड़ा के बीच हादसा

इसी वर्ष 25 जून को सेना का एक एमआई-17 हेलीकॉप्टर राहत बचाव के दौरान गौरीकुंड और रामबाड़ा के बीच घनी पहाड़ियों में कोहरे और खराब मौसम के कारण क्रैश हो गया था। इस घटना में पायलट, कोपायलट समेत 20 जवान शहीद हो गए थे।

इसी वर्ष 28 जून को केदारनाथ से दो किलोमीटर दूर गरुड़चट्टी के पास एक प्राइवेट हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया था। इस दुर्घटना में पायलट और को-पायलट समेत तीन लोगों की मौत हुई थी। यह हेलीकॉप्टर भी रेस्‍क्‍यू में लगा था। इसी वर्ष केदार घाटी में एक और हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया था। कोपायलट और इंजीनियर की मौत हो गई थी।

वर्ष 2016 में केदार घाटी में एक हेलीकॉप्‍टर क्रैश हुआ था। इसी प्रकार 2018 में केदारघाटी में सेना का एमआई-17 हेलीकॉप्टर बिजली के तार से उलझकर क्रैश हो गया था। लेकिन सभी यात्री सुरक्षित बच गए थे।

यह हेलीकॉप्टर टेक ऑफ करते हुए हुआ था क्रैश

वर्ष 2019 में केदारनाथ में हेलीपैड पर यूटी एयर हेली कंपनी का हेलीकॉप्टर टेक ऑफ करते हुए क्रैश हो गया था। इस हादसे में भी सभी यात्री बच गए थे। उत्‍तरकाशी में 2019 में हेलीकॉप्‍टर क्रैश हुआ था, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई थी।

वर्ष 2019 में उत्तरकाशी में हेलीकॉप्टर क्रैश हुआ था। इस हादसे में तीन यात्रियों की मौत हुई थी। हेलीकॉप्‍टर आपदा प्रभावित आराकोट न्याय पंचायत क्षेत्र के मोल्डी गांव में राहत सामग्री ड्रॉप कर लौट रहा हेलीकाप्टर क्रैश हो गया था। आराकोट इलाके में बादल फटने से भारी तबाही मची थी।

सुरक्षा मानकों का ख्याल रखा जाता है या नहीं?

ऐसे में सवाल पैदा होता है कि क्या ऐसी खतरनाक घाटियों में हेलिकॉप्टर सेवाएं ठीक से उड़ान भरती हैं? सुरक्षा मानकों का ख्याल रखा जाता है या नहीं? दरअसल सुरक्षा मानकों का ख्याल रखा जाता तो बर्फबारी और कम दृश्यता वाले मौसम में हेलिकॉप्टर उड़ान ही नहीं भरता। 31 मई 2022 को केदारनाथ में ही यात्रियों से भरे एक हेलिकॉप्टर की हार्ड लैंडिंग हुई थी।

उसी के बाद जून में डॉयरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन यानी डीजीसीए ने 7 और 8 जून को ऑडिट कराया था। उसमें पता चला कि केदारनाथ में हेलिकॉप्टर सेवा देने वाली पांचों कंपनियां सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं करतीं। वे सुरक्षा संबंधी नियमों पर कम ही ध्यान देती हैं।

हेलीकॉप्टर सेवा कंपनियों पर लग चुका है भारी जुर्माना

तभी तो केदारनाथ में हेलिकॉप्टर सेवाएं देने वाली सभी पांच कंपनियों पर पांच पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। इसके अलावा दो अन्य ऑपरेटरों के अधिकारियों को सुरक्षा मानकों को तोड़ने के जुर्म में तीन महीने निलंबित भी कर दिया गया था। ऑडिट के समय डीजीसीए की टीम ने देखा कि हेलिकॉप्टर सेवा देने वाली कंपनियां चॉपर शटल ऑपरेशंस के दौरान सुरक्षा मानकों के नियमों को क्रॉसचेक नहीं करती हैं।

जो हेलिकॉप्टर गरुड़चट्टी पर क्रैश हुआ है, उसका संचालन आर्यन एविएशन कंपनी के जिम्मे है। यह हेलिकॉप्टर अमेरिका और कनाडा में बनाया जाता है। इसकी पहली उड़ान जून 1995 में हुई थी। तब से अब तक दुनिया के कई देशों में इस हेलिकॉप्टर का उपयोग नागरिक उड्डयन के लिए किया जा रहा है।

बेल 407 हेलिकॉप्टर से हुआ ताजा हादसा

Helicopter accident: यह बेल 407 हेलिकॉप्टर था। आमतौर पर इसे सिविल यूटिलिटी हेलिकॉप्टर कहते हैं। इस हेलिकॉप्टर को एक पायलट उड़ाता है। 41.8 फीट लंबे इस हेलिकॉप्टर में सात लोगों के बैठने की व्यवस्था होती है। दो लोग आगे और पांच पीछे बैठ सकते हैं। 11.8 फीट ऊंचे इस हेलिकॉप्टर में सिंगल इंजन होता है, जो हेलीकाप्टर को अधिकतम 260 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से उड़ा सकता है।

लेकिन आमतौर पर इसे 246 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से ही उड़ाते हैंं। यह अधिकतम 18,690 फीट की ऊंचाई तक जा सकता है। केदारनाथ पहाड़ की ऊंचाई 22,411 फीट है। जबकि घाटी की ऊंचाई करीब 11,755 फीट है। अब हेलिकॉप्टर को उड़ना है इन्हीं दो ऊंचाइयों के बीच। दुनिया भर में यह बात सबको पता है कि प्लेन से ज्यादा कठिन होता है हेलिकॉप्टर को उड़ाना। खराब मौसम में हेलिकॉप्टर को उड़ाना और कठिन हो जाता है।

 

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