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builders: आश्रम और ट्रस्ट की जमीन पर बिल्डरों की बुरी नजर

June 2, 2022
builders

देश के योगियों, साधुओं और संतों के नाम पर ली गई जमीन पर बिल्डरों की बुरी नजर किस प्रकार पड़ रही है, इसका ज्वलंत उदाहरण महर्षि महेश योगी का एक आश्रम है। जानते हैं कि वहां आज कल क्या चल रहा है।


हिंदू संस्कारों को पुष्ट करने वाले ब्राह्मणों की चीख पुकार

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आईपी न्यूज


गौतमबुद्ध नगर। सलारपुर स्थित महर्षि महेश योगी के आश्रम में आजकल हिंदू संस्कारों को पुष्ट करने वाले ब्राह्मणों की चीख पुकार सुनाई दे रही है। कारण? महेश योगी की अगली पीढ़ी आश्रम की जमीन को बिल्डरों के हवाले कर रही है। और बिल्डर नियमों को ताक पर रखकर बेतहाशा मंदिर ढहा रहे हैं। पचास वर्ष पुराने पीपल के पेड़ काट रहे हैं।

बता दें कि आश्रम की जमीन पर दुर्गा सदन ट्रस्ट का मंदिर बनाया गया था। यह मंदिर 40 से 50 साल पुराना है। दुर्गा सदन ट्रस्ट की भूमि राघवेंद्र सचान के नाम बताई जा रही है। अब उस भूमि पर प्लाट काटे जा रहे हैं। आश्रम के ट्रस्ट की जमीन को ट्रस्ट वाले बिल्डरों को बेच रहे हैं। जबकि नियमानुसार ट्रस्ट की जमीन पर पूजा पाठ के अलावा किसी और कार्य की इजाजत नहीं है।

खेती की भूमि दिखा कर बेच दी ट्रस्ट की जमीन

ट्रस्ट की जमीन को उसके कर्ताधर्ता खेती की जमीन दिखा कर जमीन बेच रहे हैं। जबकि उसे बेचने की अनुमति नहीं है। महर्षि महेश योगी आश्रम के तहत कुल 12 ट्रस्ट संचालित हैं। ट्रस्ट की गौशाला को बेचा जा चुका है। वहां पांच हजार गायें थीं, जिनका कहीं अता पता नहीं है। बिल्डर का नाम सुनील कुमार बताया जा रहा है। आश्रम के कर्ताधर्ता हैं राहुल भारद्वाज। आश्रम थाना सेक्टर 39 के अंतर्गत आता है।

इस संदर्भ में चौकी इंचार्ज आशुतोष पांडे से 8595902582 पर बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। आश्रम के पास कुल दो सौ एकड़ जमीन थी, जिसमें से 10 एकड़ जमीन की हेराफेरी कर दी गई है। इस हेराफेरी के जरिये कुछ मंदिर ढहाए गए हैं। भूमि पर प्लाटिंग करने के लिए कई पुराने पीपल के पेड़ भी काटे गए हैं।

पुजारी बदले जाने के पीछे क्या है साजिश?

ट्रस्ट के एक कर्ताधर्ता ने बताया कि पीपल के पेड़ वन विभाग की अनुमति से काटे गए हैं। लेकिन यह बात समझ से परे है कि वन विभाग ने नियमों के विपरीत जाकर पेड़ काटने की अनुमति कैसे दे दी? उसने बताया कि मंदिर के पुराने पुजारियों को हटा कर नए पुजारी रखे जाएंगे। इसीलिए विरोध हो रहा है।

लेकिन पुराने पुजारियों का कहना है कि पुजारी बदलने की साजिश इसलिए रची जा रही है, ताकि मंदिर को ढहा कर उसे बिल्डरों को प्लाटिंग के लिए सौंपा जा सके। पुराने पुजारियों में ऐसे भी ज्ञानी गुरु हैं, जो महर्षि महेश योगी के आश्रम में दशकों से शुक्ल यजुर्वेद पढ़ाते रहे हैं। यही नहीं, ऐसे पुजारियों को जान से मारने की धमकी देने के आरोप बिल्डरों पर लगे हैं। इस संदर्भ में जिलाधिकारी सुहास एलवाई से भी बात नहीं हो पाई।

अदालत की शरण में जाएंगे दुर्गा सदन के पुराने पुजारी

अब दुर्गा सदन के पुजारी अदालत की शरण में जाने की तैयारी कर रहे हैं। मंदिर के आस पास कई सीसीटीवी कैमरे लगा दिए गए हैं। शायद यही वजह है कि बिल्डर धमकाने के लिए दोबारा मौके पर नहीं जा पाए हैं। लेकिन वे साम, दाम, दंड और भेद आदि नीतियों को अपना कर दुर्गा सदन की जमीन पर काबिज होना चाहते हैं।

हमारे पास दुर्गा सदन क्षेत्र के मंदिर ढहाए जाने और पुराने पीपल के पेड़ काटे जाने के वीडियो उपलब्ध हैं। एक वीडियो हमने देश के कुछ स्वनामधन्य पत्रकारों को भी भेजा। लेकिन उन पत्रकारों ने इस संदर्भ में एक शब्द भी लिखने या बोलने की जहमत नहीं उठाई। यही पत्रकार विपक्ष की आलोचना करने और सरकार की तारीफ करने में ही अपने को व्यस्त रखते हैं। उम्मीद है कि जागरूक पत्रकार और इच्छाशक्ति वाले नेता इस मुद्दे को जरूर जनता के सामने लाएंगे।

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